रबी फसलों की बुवाई पर अल-नीनो का असर,उर्वरक की मांग में आ सकती है नरमी
रबी फसलों की बुवाई पर अल-नीनो का असर,उर्वरक की मांग में आ सकती है नरमी

30 Sep 2026 |   36



 

धनंजय सिंह।रबी फसलों की बुवाई शुरू होने से पहले मौसम को लेकर कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ रही है।अल-नीनो की आशंका से गेहूं,चना,सरसों और अन्य रबी फसलों की बुवाई पर प्रभाव पड़ सकता है।मौसम की स्थिति प्रतिकूल रहने पर बुवाई का क्षेत्रफल कम होने के साथ-साथ डीएपी और एनपीके जैसे उर्वरकों की मांग में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।एक अक्टूबर से शुरू होने वाले आगामी रबी सीजन में करीब 350 लाख टन उर्वरकों की मांग रहने अनुमान है। यह मांग पिछले वर्ष के स्तर से लगभग 2 लाख टन अधिक है।

अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के दौरान सब्सिडी वाले खादों की महीना दर महीना जरूरत का एक प्रारंभिक अनुमान तैयार किया गया है।इस प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक रबी सीजन के लिए 199.27 लाख टन यूरिया, 55.07 लाख टन डीएपी, 16.4 लाख टन एमओपी और 79.12 लाख टन कॉम्प्लेक्स खाद की मांग आंकी गई है।इसके मुकाबले देश में 18 सितंबर तक उर्वरकों का क्लोजिंग स्टॉक कुल 141.69 लाख टन उपलब्ध था। इस स्टॉक में 64.91 लाख टन यूरिया, 22.83 लाख टन डीएपी, 9.38 लाख टन एमओपी और 44.57 लाख टन कॉम्प्लेक्स खाद मौजूद है।

देश कई राज्यों में कम बारिश और सूखे की स्थिति से सितंबर महीने में खाद की बिक्री कम हुई।पूरे सितंबर महीने के लिए उर्वरकों की कुल मांग 54.48 लाख टन अनुमानित थी, जिसमें 26.77 लाख टन यूरिया, 10.2 लाख टन डीएपी, 2.87 लाख टन एमओपी और 14.64 लाख टन कॉम्प्लेक्स खाद शामिल है।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 4 से 18 सितंबर के बीच केवल 21.6 लाख टन यानी 40 प्रतिशत से भी कम खाद की बिक्री हो सकी। इन 15 दिनों की अवधि में 13.15 लाख टन यूरिया, 4.39 लाख टन डीएपी, 0.81 लाख टन एमओपी और 3.25 लाख टन कॉम्प्लेक्स खाद बेची गई।

अल नीनो की स्थिति का असर मौसम और बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है।रबी फसलों की बुवाई मुख्य रूप से मिट्टी में उपलब्ध नमी और सिंचाई की सुविधा पर निर्भर करती है। ऐसे में मौसम में बदलाव होने पर कई क्षेत्रों में किसानों की बुवाई योजना प्रभावित हो सकती है। इस बात पर भी निर्भर करेगा कि आने वाले समय में तापमान, बारिश और मिट्टी में नमी की स्थिति कैसी रहती है। अगर मौसम अनुकूल नहीं रहता है, तो कुछ क्षेत्रों में रबी फसलों का रकबा कम हो सकता है।

सहकारी उर्वरक संस्था कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड यानी कृभको ने भी रबी सीजन में किसानों को खाद की उपलब्धता में परेशानी न हो, इसके लिए संस्था ने गैर-यूरिया उर्वरकों के आयात की तैयारी कर ली है। रबी सीजन के लिए करीब 4 लाख टन गैर-यूरिया उर्वरकों के आयात की योजना है। इसमें मुख्य रूप से डीएपी और एनपीके उर्वरक शामिल हैं।
संस्था का मकसद मौसम की परिस्थितियों के बावजूद किसानों के लिए खाद की उपलब्धता बनाए रखना है। कृभको देशभर में किसानों और सहकारी संस्थाओं को उर्वरकों की आपूर्ति करती है।

कृभको ने रबी फसल सीजन के लिए करीब 3 से 4 लाख टन डीएपी और एनपीके उर्वरकों के आयात की व्यवस्था की है। किसानों की जरूरत के अनुसार फॉस्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डीएपी यानी डाय-अमोनियम फॉस्फेट देश में प्रमुख रूप से इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों में शामिल है। वहीं एनपीके उर्वरक फसलों को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है।

कृभको हर साल करीब 12 से 15 लाख टन गैर-यूरिया उर्वरकों का आयात करती है। देश में गैर-यूरिया उर्वरकों का कुल आयात करीब 70 लाख टन बताया गया है।कृभको पहले ही करीब 8 लाख टन डीएपी और 1 लाख टन अन्य एनपीके उर्वरकों का आयात कर चुकी है।

खरीफ सीजन के लिए कृभको के पास पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध था।करीब 6 लाख टन उर्वरक का स्टॉक पहले से मौजूद है। इसके अलावा रबी सीजन की जरूरत को पूरा करने के लिए करीब 3 लाख टन अतिरिक्त उर्वरक आयात किया जाएगा।

मिडिल ईस्ट में जारी संकट का असर वैश्विक उर्वरक बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। गैर-यूरिया उर्वरकों की कीमतें ऊंची रहने से आयात लागत बढ़ सकती है।डीएपी की कीमत करीब 900 अमेरिकी डॉलर प्रति टन, जबकि एनपीके की कीमत लगभग 915 अमेरिकी डॉलर प्रति टन बताई गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की स्थिति आने वाले समय में भारत में उर्वरक आयात को प्रभावित कर सकती है

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