प्रयागराज।हिंदू धर्म में पितृ पक्ष में पूर्वजों के स्मरण,तर्पण, श्राद्ध,पिंडदान और दान-पुण्य का विशेष समय माना जाता है। पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से हुई है और समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।संगम तट पर पितृपक्ष में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर संगम तट पर अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान कर रहे हैं।मान्यता है कि संगम तट पर पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है,जो लोग किसी कारणवश संगम नगरी नहीं पहुंच पा रहे हैं,उनके लिए भी तीर्थ पुरोहितों ने एक नई व्यवस्था शुरू की है। अब ऐसे श्रद्धालु ऑनलाइन भी पिंडदान और तर्पण की पूजा करा सकते हैं।
संगम तट पर सुबह से ही मंत्रोच्चार सुनने को मिल रहा है।गंगा-यमुना के पवित्र संगम के सामने लोग पिंडदान के समय अपने पूर्वजों को याद कर रहे हैं।पितृपक्ष में यहां दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं और विधि-विधान के साथ अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान कर रहे हैं।लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ संगम में पिंड अर्पित कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक प्रयागराज को विष्णु का मुख,काशी को विष्णु की नाभि और गया को विष्णु के चरण माना जाता है।इस कारण पितृ कर्म के लिए प्रयागराज,काशी और गया का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।लोग प्रयागराज में पिंडदान और तर्पण के बाद काशी और फिर गया में पितृ कर्म करते हैं।गया में पिंडदान के बाद पितरों के प्रति अपने धार्मिक कर्तव्य की पूर्णता मानी जाती है,लेकिन हर कोई इन धार्मिक स्थलों तक पहुंच सके, यह संभव नहीं।इसी को देखते हुए प्रयागराज के तीर्थ पुरोहितों ने ऐसे लोगों के लिए ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था की है।अब घर बैठे लोग तीर्थ पुरोहितों के माध्यम से पूजा में शामिल हो सकते हैं।पुरोहित ऑनलाइन विधि-विधान के साथ पितृ पूजा और पिंडदान की प्रक्रिया संपन्न करा रहे हैं।दूरी भले ही हजारों किलोमीटर की हो,लेकिन आस्था और श्रद्धा का रिश्ता अब भी संगम से जुड़ सकता है।
ऑनलाइन पिंडदान की प्रक्रिया,पूजा विधि और लोगों की सहभागिता रहती है,जो लोग दिव्यांग है या बाहर देश में हैं,किसी कारण से वह प्रयागराज नहीं आ पा रहे हैं,उनके लिए यह ऑनलाइन व्यवस्था की गई है।इससे वह अपने पूर्वजों और अपनी परंपरा से भी जुड़े रहेंगे।
संगम तट कोई अपने पिता को याद कर रहा है तो कोई अपने दादा और परदादा के नाम से पिंड अर्पित कर रहा है।मंत्रों की गूंज के बीच लोग अपने पितरों को याद कर रहे हैं और उनसे परिवार पर सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना कर रहे हैं।फिलहाल पितृपक्ष के दौरान संगम नगरी में लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।संगम तट पर पिंडदान और तर्पण का सिलसिला जारी है।अगले कई दिनों तक संगम तट पर आस्था,परंपरा और पितरों के प्रति श्रद्धा का यही संगम देखने को मिलेगा।