पश्चिमी यूपी में दुजाना-मुकीम काला-जीवा के छपे पोस्टर,पोस्टर के जरिए कौन सा गढ़ा जा रहा नैरेटिव
पश्चिमी यूपी में दुजाना-मुकीम काला-जीवा के छपे पोस्टर,पोस्टर के जरिए कौन सा गढ़ा जा रहा नैरेटिव

21 Sep 2026 |   31



 

धनंजय सिंह।उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होगा,लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पोस्टर वॉर तेज हो गया है।पश्चिमी यूपी मतलब जाटलैंड में सामने आए वन डिस्ट्रिक्ट,वन माफिया पोस्टर से पुराने अपराध और कानून-व्यवस्था के मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।आजम खान,याकूब कुरैशी,अनिल दुजाना,डीपी यादव,संजीव जीवा और मुकीम काला का नाम पोस्टर में शामिल किए गए हैं।इन नामों के जरिए सपा मुखिया अखिलेश यादव और सपा के पुराने शासनकाल पर सियासी हमला किया गया है।जाटलैंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस नैरेटिव का सियासी मतलब क्या है।समझिए पूरा विश्लेषण।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में कानून-व्यवस्था और अपराध का मुद्दा पहले भी चुनावी बहस का हिस्सा रहा है।अब वन डिस्ट्रिक्ट,वन माफिया के पोस्टर में इसी पुराने नैरेटिव को नए तरीके से सामने रखा गया है।पोस्टर पर अखिलेश यादव के माफिया,माफिया के अखिलेश जैसे संदेश लिखे गए हैं। हालांकि इन पोस्टरों को किसने लगवाया,इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है।

पश्चिमी यूपी के पोस्टर में मुकीम काला का नाम खास तौर पर ध्यान खींचता है।पोस्टर में मुकीम काला गिरोह को कैराना पलायन के मामले से जोड़ा गया है।कैराना पलायन का मुद्दा पश्चिमी यूपी की सियासत में पहले भी बड़ा सियासी विषय रहा है।मुकीम काला का नाम शामली-कैराना क्षेत्र में अपराध की कई चर्चाओं से जुड़ा रहा।मुकीम काला के गिरोह पर हत्या, लूट और रंगदारी जैसे गंभीर अपराधों के आरोप रहे हैं।मई 2021 में चित्रकूट जेल में गैंगवार के दौरान मुकीम काला की मौत हुई थी।पोस्टर में मुकीम काला का नाम दोबारा सामने आने से पश्चिमी यूपी में अपराध और पलायन से जुड़े पुराने सियासी संदर्भ चर्चा में आ गए हैं।

अनिल दुजाना का नाम गौतमबुद्ध नगर और एनसीआर के अपराध जगत से जुड़े पुराने मामलों में चर्चित रहा है।अनिल दुजाना पर हत्या,हत्या के प्रयास,रंगदारी और लूट समेत कई आपराधिक मामलों का जिक्र रिपोर्टों में मिलता है। 2023 में यूपी एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में अनिल दुजाना मारा गया।ऐसे में पोस्टर में मुकीम काला के साथ अनिल दुजाना का नाम रखना पश्चिमी यूपी के दो अलग-अलग इलाकों में चर्चित रहे अपराध के चेहरों को एक ही सियासी नैरेटिव में जोड़ता है।

पश्चिमी यूपी की सूची में मेरठ का याकूब कुरैशी और बाहुबली राजनीति के चर्चित नाम डीपी यादव को भी शामिल किया गया है।पोस्टर में इन नामों को सपा के पुराने शासनकाल से जोड़ते हुए सियासी संदेश दिया गया है।यहां हम सबको बस यह बात समझना है कि पोस्टर में किसी नाम का शामिल होना अपने आप में उस व्यक्ति के खिलाफ पोस्टर में लगाए गए हर आरोप की पुष्टि नहीं करता।पोस्टर का उद्देश्य सियासी संदेश दे क्या है,यह समझना जरूरी है।

पोस्टर में संजीव जीवा का भी नाम है।संजीव जीवा का नाम 1997 में पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के मामले में सामने आया था।बाद के वर्षों में भी संजीव जीवा पश्चिमी यूपी के चर्चित अपराधियों में गिना गया। 2023 में लखनऊ की अदालत में पेशी के दौरान संजीव जीवा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।पोस्टर में जीवा का नाम शामिल कर पश्चिमी यूपी के अपराध जगत से जुड़े पुराने चर्चित अध्यायों को फिर सियासी बहस में लाने की कोशिश की गई है।

पोस्टर में सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ इन नामों को जोड़कर संदेश दिया गया है।यानी हमला सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि 2012-2017 की सपा सरकार की कानून-व्यवस्था की छवि पर है।

पश्चिम यूपी में कानून-व्यवस्था पहले भी चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा रही है।ऐसे में पुराने चर्चित अपराधियों के नामों को सामने लाना 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उसी मुद्दे को दोबारा चर्चा में लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है,लेकिन इसका वोटरों पर वास्तविक असर कितना होगा,यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।

अगर यह नैरेटिव आगे बढ़ता है तो सपा को पश्चिम यूपी में अपने पुराने शासनकाल की कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों का जवाब देना पड़ सकता है।दूसरी तरफ सपा इस बहस को मौजूदा सरकार के कामकाज और दूसरे स्थानीय मुद्दों की ओर मोड़ने की कोशिश कर सकती है।कुल मिलाकर पश्चिम यूपी में वन डिस्ट्रिक्ट,वन माफिया पोस्टर को सिर्फ पोस्टर नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था के पुराने नैरेटिव को फिर सामने लाने की कोशिश के तौर पर पढ़ा जा सकता है।अनिल दुजाना और मुकीम काला के नाम इसी नैरेटिव के सबसे चर्चित हिस्से हैं,लेकिन यह पोस्टर लगाने वालों की रणनीति है या इसका व्यापक चुनावी असर पड़ेगा, इसका आकलन अभी नहीं किया जा सकता।

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