प्रयागराज।गंगा,यमुना,सरस्वती के संगम पर पितृपक्ष पर हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।लोग संगम में स्नान करने के बाद अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं और उनकी आत्मा की शांति और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।इस बार पितृपक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक है। तीर्थ पुरोहितों ने इस बार विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए ऑनलाइन पिंडदान करने की व्यवस्था भी की है।
देशभर से लोग यहां श्राद्धों में पिंडदान करने आते हैं और भारी संख्या में प्रयागराज आकर अपने पुरखों और पूर्वजों को पिंडदान कर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति कराते हैं और अपने परिवार की सुख शांति की कामना करते हैं।संगम को पितृ कर्म के लिए विशेष श्रद्धा का स्थान माना जाता है,यहां दूर-दूर से लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने आते हैं।बता दें कि विष्णु मुख प्रयाग,विष्णु नाभि काशी,विष्णु चरण गया,इन तीन जगह पर लोग जाकर अपने पुरखों का पिंडदान करते हैं और शांति बनाये रखने की कामना करते है।
पितृपक्ष हिंदू धर्म में अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। पितृपक्ष में लोग अपने दिवंगत माता-पिता,दादा-दादी और अन्य पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके निमित्त श्राद्ध,तर्पण और पिंडदान करते हैं।पितृपक्ष का यह अवसर केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि परिवार की पिछली पीढ़ियों को याद करने,उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी स्मृतियों को सम्मान देने की परंपरा भी है।
इस बार प्रयागराज के तीर्थ पुरोहितों ने ऑनलाइन पिंडदान की भी व्यवस्था की है।इनका कहना है कि जो लोग देश-विदेश या किसी कारणवश अपने पुरखों का पिंडदान करने नहीं आ सकते वह ऑनलाइन ही पिंडदान कर सकते हैं और ऐसा करके वह लोग अपने पूर्वजों और अपनी परंपराओं से जुड़े रह सकेंगे।
कब से हैं पितृपक्ष नोट करें श्राद्ध की तिथियां
26 सितंबर, शनिवार- भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर, रविवार- प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर, सोमवार- द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर, मंगलवार- तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर, बुधवार- चतुर्थी श्राद्ध
1 अक्टूबर, गुरुवार- पंचमी श्राद्ध
2 अक्टूबर, शुक्रवार- षष्ठी श्राद्ध
3 अक्टूबर, शनिवार- सप्तमी और अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर, रविवार- नवमी श्राद्ध यानी मातृ नवमी
5 अक्टूबर, सोमवार- दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर, मंगलवार- एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर, बुधवार- द्वादशी श्राद्ध
8 अक्टूबर, गुरुवार- त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर, शुक्रवार- चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर, शनिवार- अमावस्या श्राद्ध
श्राद्ध के दिनों के दौरान बाल,दाढ़ी और नाखून काटने से बचना चाहिए।इस दौरान मांस-मदिरा और तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज आदि का सेवन नहीं करना चाहिए,नए वस्त्र भी इस दौरान न खरीदें।विवाह,सगाई,मुंडन,गृह प्रवेश या किसी नए काम की शुरुआत भी पितृपक्ष में करने से बचना चाहिए।
पितृपक्ष में घर के दरवाजे पर आने वाले गाय,कुत्ते,कौवे या अन्य जीव-जंतुओं को भोजन और पानी देने का विशेष महत्व है।कहा जाता है कि ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। पितृ कृपा से दरिद्रता दूर होती है और परिवार में आर्थिक संपन्नता आती है,इसलिए इन दिनों पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ दान-पुण्य और सेवा को भी महत्वपूर्ण माना गया है।