धनंजय सिंह।भारतीय अर्थव्यवस्था में औद्योगिक गतिविधियों की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। बीते माह अगस्त में औद्योगिक उत्पादन सालाना आधार पर 8 फीसदी बढ़ा। जुलाई में यह 7.4 फीसदी था।अप्रैल से अगस्त के दौरान भी उत्पादन का ग्रोथ 6.7 फीसदी रहा,जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 4.2 फीसदी था।वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं।पूरे वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7 से 7.2 फीसदी रहने का अनुमान है,लेकिन दूसरी छमाही में पहली छमाही के मुकाबले रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है।इसके पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से लेकर कमजोर मानसून और बढ़ती महंगाई तक कई जोखिम हैं।
दूसरी छमाही के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में ऊंची कच्चे तेल की कीमतें शामिल हैं।महंगा कच्चा तेल कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है।इसका असर खास तौर पर उन उद्योगों पर ज्यादा पड़ सकता है,जिनमें ऊर्जा की खपत अधिक होती है। लागत बढ़ने पर कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास किसी तरह की लंबी बाधा का भी जोखिम है।ऐसी स्थिति में कमोडिटी की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।
मानसून भी दूसरी छमाही की ग्रोथ के लिए अहम रहेगा।अल नीनो से बारिश कमजोर पड़ने का जोखिम जताया गया है। बारिश में कमी आने से कृषि उत्पादन पर प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा असमान बारिश और जलाशयों में पानी का कम स्तर खाद्य आपूर्ति के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में महंगाई से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं।खाद्य कीमतों के अलावा कच्चा तेल और दूसरी कमोडिटी महंगी रहने से महंगाई पर दबाव बन सकता है। कंपनियों के लिए कच्चे माल और दूसरी लागत बढ़ने से मुख्य महंगाई पर भी दबाव रह सकता है। यानी चुनौती केवल खाद्य महंगाई तक सीमित नहीं रह सकती।
फिलहाल औद्योगिक आंकड़े मजबूत तस्वीर दिखा रहे हैं। अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन 9 फीसदी बढ़ोतरी हुई,कैपिटल गुड्स में 16.9 फीसदी और इंटरमीडिएट गुड्स में 13.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का उत्पादन भी 11.1 फीसदी बढ़ा। जुलाई-अगस्त के दौरान औद्योगिक उत्पादन की औसत वृद्धि 7.7 फीसदी रही।मैन्युफैक्चरिंग में व्यापक सुधार, कैपिटल गुड्स का मजबूत उत्पादन और खपत में मजबूती अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है।
हालांकि दूसरी छमाही में तस्वीर काफी हद तक मानसून, खाद्य महंगाई, कच्चे तेल और दूसरी कमोडिटी की कीमतों पर निर्भर करेगी।ग्रोथ मजबूत बनी रह सकती है, लेकिन महंगाई बढ़ने पर ग्रोथ और महंगाई का संतुलन पहली छमाही के मुकाबले कम अनुकूल हो सकता है।