जंग शुरू हुई तो काम आएंगे ये 5 एक्सप्रेसवे,जानें भारत में कहां-कहां उतर सकते हैं फाइटर जेट्स
जंग शुरू हुई तो काम आएंगे ये 5 एक्सप्रेसवे,जानें भारत में कहां-कहां उतर सकते हैं फाइटर जेट्स

29 Jul 2026 |   21



 

नई दिल्ली।आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से हीं नहीं मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से भी जीते जाते हैं।यही कारण है कि देश में कुछ प्रमुख एक्सप्रेसवे को इस तरह डिजाइन किया है कि जरूरत पड़ने पर वे भारतीय वायुसेना के लिए अस्थायी रनवे का काम कर सकें।अगर किसी युद्ध या आपात स्थिति में एयरबेस पर हमला हो जाए या उनका इस्तेमाल मुश्किल हो जाए, तो इन्हीं एक्सप्रेसवे से लड़ाकू विमान उड़ान भर सकते हैं और उतर भी सकते हैं।

देश में इस तरह की इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी के दायरे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।पिछले कुछ वर्षों में भारतीय वायुसेना ने कई एक्सप्रेसवे पर मिराज 2000, सुखोई 30 एमकेआई,राफेल,जगुआर, सी 130 जे सुपर हरक्यूलिस और एएन 32 जैसे विमानों की सफल लैंडिंग और टेकऑफ का प्रदर्शन किया है।

देश में कई एक्सप्रेसवे अब सिर्फ तेज सफर का जरिया नहीं रह गए हैं. इन्हें इस तरह तैयार किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर भारतीय वायुसेना इनके चुनिंदा हिस्सों का इस्तेमाल लड़ाकू और सैन्य विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ के लिए कर सके।उत्तर प्रदेश,राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में ऐसे एक्सप्रेसवे बनाए गए हैं या बनाए जा रहे हैं,जहां आपात स्थिति में एयरबेस के विकल्प के रूप में ऑपरेशन चलाए जा सकते हैं।

मई 2015 में मथुरा के पास यमुना एक्सप्रेसवे पर भारतीय वायुसेना ने पहली बार मिराज 2000 लड़ाकू विमान की सफल लैंडिंग कराई थी।यह देश का पहला एक्सप्रेसवे था,जहां इस तरह का परीक्षण किया गया। इसके बाद देश में एक्सप्रेसवे आधारित एयरस्ट्रिप विकसित करने की दिशा में तेजी आई।

सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर लगभग 3.3 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप बनाई गई है।नवंबर 2021 में भारतीय वायुसेना ने यहां सुखोई 30 एमकेआई, मिराज 2000, जगुआर, सी 130 जे सुपर हरक्यूलिस, एएन 32 और एमआई 17 हेलीकॉप्टर सहित कई विमानों का सफल प्रदर्शन किया था।यह उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण एयर ऑपरेशन कॉरिडोर में से एक है।

राजस्थान के बाड़मेर जिले में पाकिस्तान सीमा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 925ए पर भारत की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी बनाई गई है,जो किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर विकसित की गई।सितंबर 2021 में यहां सुखोई 30 एमकेआई और सी 130 जे सुपर हरक्यूलिस विमान की सफल लैंडिंग हुई थी। पाकिस्तान सीमा के नजदीक होने के कारण इसका सामरिक महत्व काफी ज्यादा है।

मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला गंगा एक्सप्रेसवे पर शाहजहांपुर के पास लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप तैयार की जा रही है,इसका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर भारतीय वायुसेना को वैकल्पिक रनवे उपलब्ध कराना है।एक्सप्रेसवे का निर्माण अंतिम चरण में है और एयरस्ट्रिप को भी सैन्य जरूरतों के हिसाब से विकसित किया जा रहा है।

दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस तरह डिजाइन किया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर वहां इमरजेंसी एयर ऑपरेशन की सुविधा विकसित की जा सके।हालांकि इस एक्सप्रेसवे पर अभी भारतीय वायुसेना की सार्वजनिक लैंडिंग ड्रिल नहीं हुई है,लेकिन इसे देश के रणनीतिक सड़क नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

आखिर क्यों जरूरी हैं ये एयरस्ट्रिप

अगर युद्ध के दौरान किसी एयरबेस के रनवे को नुकसान पहुंचता है तो लड़ाकू विमानों का संचालन प्रभावित हो सकता है।ऐसे समय में एक्सप्रेसवे पर बनी इमरजेंसी एयरस्ट्रिप तुरंत वैकल्पिक रनवे का काम करती हैं,इससे वायुसेना बिना ज्यादा समय गंवाए अपने अभियान जारी रख सकती है।इन एयरस्ट्रिप को सामान्य सड़क की तरह नहीं बनाया जाता. इनके चुने गए हिस्सों में मजबूत कंक्रीट, पर्याप्त चौड़ाई, लंबाई और आसपास कम से कम बाधाएं रखी जाती हैं ताकि लड़ाकू और सैन्य विमान सुरक्षित तरीके से उतर और उड़ान भर सकें।

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