नई दिल्ली।लाल सागर में यमन के हूती विद्रोहियों के बढ़ते खतरों से सऊदी अरब के कच्चे तेल के टैंकर को अपने रास्ते बदलने पड़ रहे हैं।हूती विद्रोहियों ने दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला किया।ऐसे में सऊदी से भारत आने वाले टैंकरों ने यू-टर्न ले लिया है।इस समुद्री नाकाबंदी और तनाव से भारत के सालाना कच्चे तेल का आयात बिल 8 से 10 अरब डॉलर (लगभग 77000 करोड़ रुपये से 97000 करोड़ रुपये) तक बढ़ सकता है।होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से जारी तनाव के साथ यह घटनाक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए नई चिंता पैदा कर रहा है।
यू-टर्न लेने को मजबूर हुए जहाज
मरीन ट्रैफिक डेटा के मुताबिक सऊदी बंदरगाहों से भारत और चीन के लिए निकले दो क्रूड टैंकर्स को लाल सागर में सुरक्षा कारणों से अपने रास्ते बदलने पड़े हैं। XIN LONG YANG (सिंगापुर-फ्लैग): 20 जुलाई को यनबू से चीन के क्विनझोउ के लिए रवाना हुआ यह टैंकर लाल सागर के बीच से ही वापस लौट आया। RODOS (लाइबेरिया-फ्लैग): अल मुअज्जिज से भारत के न्यू मंगलोर के लिए चले इस जहाज ने अपना गंतव्य बदलकर स्वेज नहर की ओर कर दिया।
कम हुआ जहाजों का आना-जाना
Kpler के आंकड़ों के मुताबिक बाब अल-मंदेब मार्ग पर जहाजों का आना-जाना 34 फीसदी घटकर बेहद कम रह गया है।अदन की खाड़ी के पास कम से कम चार जहाजों के यू-टर्न लेने से साफ है कि शिपिंग कंपनियां जोखिम लेने से बच रही हैं,जिससे एशिया तक तेल पहुंचने में कई हफ्तों की देरी हो सकती है।
केप ऑफ गुड होप से घूमकर आना होगा
भारत अपनी दैनिक जरूरत का 55 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है,जिसमें से 40-45 फीसदी हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है।जहाजों को अब लाल सागर के बजाय अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से घूमकर आना पड़ेगा,जिससे सफर में 10 से 15 दिन ज्यादा लगेंगे।
कितना बढ़ जाएगा खर्च
YES सिक्योरिटीज के रणनीतिकार हितेश जैन के मुताबिक 20 लाख बैरल क्षमता वाले वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (VLCC) का ट्रांसपोर्ट कॉस्ट 0.75 डॉलर से 2 डॉलर प्रति बैरल बढ़ जाएगा।अगर जहाजों की कमी हुई तो यह बढ़ोतरी 3 डॉलर प्रति बैरल से भी अधिक हो सकती है।
वॉर-रिस्क इंश्योरेंस
जहाजों का युद्ध-जोखिम बीमा शुल्क 160 मिलियन डॉलर के जहाज के लिए 8 मिलियन डॉलर (लगभग 5 फीसदी वैल्यू) प्रति यात्रा तक पहुंच गया है।
प्रति बैरल प्रभाव
PwC इंडिया के मानस मजूमदार का अनुमान है कि भारत के लिए क्रूड की लैंडेड कॉस्ट में 2 डॉलर से 4 डॉलर प्रति बैरल का सीधा इजाफा हो सकता है।इससे भारत का मासिक आयात बिल 70 से 100 करोड़ डॉलर बढ़ जाएगा।
रूसी तेल पर भी संकट
जून में भारत की कुल खपत का लगभग 50 फीसदी कच्चा तेल रूस से आया था,लेकिन अब लंबे रूट और ज्यादा चार्टर रेट से रूसी तेल भी महंगा हो जाएगा।बढ़ा हुआ भाड़ा और बीमा खर्च उस डिस्काउंट को पूरी तरह खत्म कर देगा,जो भारतीय रिफाइनरियों को साल 2022 से मिल रहा था।