पाकिस्तान-बांग्लादेश में बिगड़े हालात,गैस खत्म,बिजली गुल
पाकिस्तान-बांग्लादेश में बिगड़े हालात,गैस खत्म,बिजली गुल

22 Jul 2026 |   40



 

नई दिल्ली।अमेरिका और ईरान में बढ़ते तनाव का असर अब  ज़ंग क्षेत्र तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका सीधा प्रभाव एशिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।सबसे ज्यादा परेशानी पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे देशों को हो रही है। पाकिस्तान और बांग्लादेश को अब बिजली उत्पादन के लिए पहले से कहीं अधिक महंगी लिक्विफाइड नेचुरल गैस खरीदनी पड़ रही है।इससे सरकारों पर वित्तीय बोझ तेजी से बढ़ रहा है और आम लोगों के लिए बिजली और गैस की कीमतें बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है।

दरअसल अमेरिका और ईरान में जारी संघर्ष से विश्व की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति लाइनों में से एक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज प्रभावित हुआ है।विश्व की लगभग 20 फीसदी एल‌एनजी सप्लाई होर्मुज के रास्ते से गुजरती है। इस रूट में बाधा आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में एल‌एनजी की कीमतों में तेज उछाल आ गया है।इसीसे पाकिस्तान और बांग्लादेश को स्पॉट मार्केट से बेहद ऊंची कीमत पर गैस खरीदनी पड़ रही है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश की हालत खराब

पाकिस्तान की सरकारी कंपनी पाकिस्तान एल‌एनजी लिमिटेड ने जुलाई के अंत के लिए लगभग 21.88 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट की दर से एल‌एनजी खरीदी है। यह 2022 के बाद उसकी सबसे महंगी खरीद मानी जा रही है। बांग्लादेश ने भी अगस्त महीने की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊंची कीमत पर एल‌एनजी कार्गो खरीदने का फैसला किया है।अगर पाकिस्तान और बांग्लादेश को यही गैस कतर के साथ लंबे समय के अनुबंध के तहत मिलती, तो इसकी कीमत लगभग आधी पड़ती।

इसलिए स्थिति और गंभीर हो गई

इसलिए स्थिति और गंभीर हो गई,क्योंकि कतर,जो पाकिस्तान और बांग्लादेश का सबसे बड़ा एल‌एनजी सप्लायर है,उसने मार्च में ईरानी हमले के बाद अपने निर्यात केंद्रों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। इसके चलते पहले से तय कई एल‌एनजी सप्लाई रद्द करनी पड़ीं।नतीजतन पाकिस्तान और बांग्लादेश में बिजली संकट और गहरा गया और कई इलाकों में लंबे समय तक बिजली कटौती करनी पड़ी।हालांकि महंगी एल‌एनजी खरीदने से फिलहाल बिजली संकट को कुछ हद तक टाला जा सकता है,लेकिन इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है।सरकारों को अब बिजली और गैस पर ज्यादा सब्सिडी देनी पड़ सकती है या फिर उपभोक्ताओं के लिए बिजली और गैस के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। ऐसे में आम लोगों की जेब पर भी इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।इसी संकट ने दोनों देशों को अपनी ऊर्जा नीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। 

बांग्लादेश अब तेजी से सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ रहा

बांग्लादेश अब तेजी से सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ रहा है। सरकार ने हाल ही में 2035 तक सोलर सेक्टर को टैक्स में छूट देने जैसी कई नई योजनाएं शुरू की हैं। इसके अलावा चीन से सोलर पैनलों और सोलर सेल का आयात भी तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश में 10 गीगावॉट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करना है, जबकि अभी यह क्षमता करीब 1.7 गीगावॉट है।
वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान भी एल‌एनजी पर निर्भरता कम करने के लिए परमाणु ऊर्जा,कोयला आधारित बिजली उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। जून 2026 में पाकिस्तान में परमाणु ऊर्जा उत्पादन में पिछले साल की तुलना में लगभग 30 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि कोयले से बिजली उत्पादन में भी लगभग 5 फीसदी की वृद्धि हुई।

बता दें कि अगर अमेरिका और ईरान में तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो एल‌एनजी की वैश्विक कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।ऐसे में केवल पाकिस्तान और बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि ऊर्जा आयात पर निर्भर कई अन्य एशियाई देशों को भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि अब स्वच्छ और घरेलू ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना इन देशों की प्राथमिकता बनता जा रहा है।

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