दालों का आयात करने वाला भारत निर्यात में तेजी से बढ़ा आगे,चीन में हुई बंपर मांग,इंपोर्ट बिल को लेकर खुशखबरी
दालों का आयात करने वाला भारत निर्यात में तेजी से बढ़ा आगे,चीन में हुई बंपर मांग,इंपोर्ट बिल को लेकर खुशखबरी

24 Jul 2026 |   24



 

नई दिल्ली।भारत दालों का बड़ा आयातक वाला देश है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।आयात का भुगतान खर्च भी बड़ा होता है।अब वित्त वर्ष (2025-26) में दालों के आयात बिल में काफी कमी दर्ज हुई है,ये एक अच्छा संकेत है।इतना ही नहीं भारत दालों का निर्यात करने के मामले में भी आगे बढ़ा है।खासकर चीन में भी भारतीय दाल की मांग बढ़ी है।इसका मुख्य कारण घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी,अंतरराष्ट्रीय बाजार में दालों की कीमतों में नरमी और सरकार की आयात नियंत्रण को लेकर बनाई नीति रही।इससे देश में दालों की आयात पर निर्भरता कम हुई है।साथ ही कुछ दालों के निर्यात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आयात में 34 फीसदी की गिरावट

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में दलहन का आयात 3.63 अरब डॉलर का रह गया,जो पिछले साल के रिकॉर्ड 5.54 अरब डॉलर से 34 फीसदी कम है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक शिपमेंट 12 फीसदी घटकर 6 मिलियन टन रह गया, जबकि 2024-25 में यह 7.34 मिलियन टन था। इस भारी गिरावट का कारण कम मांग और देश में मजबूत उत्पादन का मिलाजुला प्रभाव है।

इन दालों के आयात में तगड़ी गिरावट

काबुली चना का आयात वित्त वर्ष 2025 के 8.25 करोड़ डॉलर (82.5 मिलियन डॉलर) से घटकर 2026 में मात्र 9.7 लाख डॉलर रह गया।इसमें लगभग 99 फीसदी की गिरावट आई है।ग्लोबल मार्केट में में देसी चने के भाव भी 25 फीसदी तक गिरने से आयात 111.66 करोड़ डॉलर से घटकर 53.59 करोड़ डॉलर हो गया, लगभग 52 फीसदी की कमी आई है।इसके अलावा पीली मटर का इंपोर्ट 96.06 करोड़ डॉलर से गिरकर 39.77 करोड़ डॉलर हुआ,जो कि बड़ी गिरावट है। वहीं मसूर दाल का आयात 91.60 करोड़ डॉलर से कम होकर 65.97 करोड़ डॉलर रह गया। इन सब के अलावा अरहर में 26.3 फीसदी, राजमा में 23.6 फीसदी और लोबिया के आयात में 13.9 फीसदी की भारी-भरकम कमी दर्ज की गई है।

निर्यात में अच्छी बढ़त

भारत दालों का बड़ा आयातक देश रहा है।अब केंद्र सरकार की ओर से दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत दालों की खेती को प्रमोट किया जा रहा है।इससे देश में दालों के आयात में अच्छी बढ़त देखी गई है।काबुली चना का एक्सपोर्ट वित्तवर्ष 25 में $179.7 मिलियन से बढ़कर $212.2 मिलियन हो गया है,जो कि 18.1 फीसदी की बढ़ोतरी है।दूसरी सूखी फलियों (लेग्युमिनस सब्जियों) का एक्सपोर्ट भी $9.7 मिलियन से बढ़कर $23 मिलियन हो गया जो कि दोगुने से भी ज्यादा है।बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने मीडिया से बातचीत करते हुए इंपोर्ट में कमी की वजह घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी को बताया।उन्होंने कहा कि पिछले साल इन फसलों का उत्पादन अच्छा रहा,जिससे इंपोर्ट की जरूरत कम हुई और एक्सपोर्ट की गुंजाइश बनी।

दालों के उत्पादन में भी बढ़ोतरी

 वित्त वर्ष25 में लगभग 25.7 मिलियन टन की तुलना में इस साल भारत का कुल दाल उत्पादन बढ़कर 27.4 मिलियन टन हो गया। इसी अवधि में रबी दालों का उत्पादन 15.2 मिलियन टन से बढ़कर 16.9 मिलियन टन हो गया।ग्लोबल स्तर पर ज्यादा उत्पादन और कीमतों में कमी से चालू वित्त वर्ष में आयात की लागत 30-40 फीसदी तक कम हुई है,लेकिन आयात में कमी लाने में कुछ घरेलू नीतियां भी मददगार रही हैं। जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पक्की खरीद की व्यवस्था, दालों के मामले में आत्मनिर्भरता का मिशन शामिल है,जिसके तहत गैर-पारंपरिक इलाकों में भी दालों की खेती का दायरा बढ़ाया जा रहा है।

चीन में भारतीय मूंग का दबदबा

भारत में पिछली फसल तक दालों का उत्पादन अच्छा रहा है, जिससे भारत को दूसरे देशों,खासकर चीन को अपना एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिली है,जहां भारतीय हरी मूंग को खूब पसंद किया जा रहा है।ग्लोबल मार्केट में दालों की कीमतों में 40-50 फीसदी की गिरावट से घरेलू बाजार में भी कीमतें बनाए रखने में मदद मिली है।

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