नई दिल्ली।अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला बोला था। ईरान पर हमले से विश्व में हाहाकार मच गया था।कच्चे तेल की कीमत कई महीनों तक 100 डॉलर के पार रही थी,लेकिन चीन पर कोई फर्क नहीं पड़ा।चीन ने ईरान युद्ध से पहले जमकर कच्चा तेल खरीदा था।युद्ध के दौरान चीन ने अपने भंडार से तेल निकालकर काम चलाता रहा।इस बार चीन जमकर एलएनजी खरीद रहा है।
तेजी से बढ़ा है चीन का एलएनजी आयात
हाल के दिनों में चीन का लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का आयात तेजी से बढ़ा है। 19 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में चीन में साप्ताहिक एलएनजी डिलीवरी में 137 फीसदी बढ़ोतरी हुई और यह लगभग 2 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गई,जो पिछले 22 महीनों में सबसे अधिक है। फरवरी के मध्य से चीन का एलएनजी आयात चार गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है।पिछले हफ्ते फरवरी 2025 के बाद पहली बार अमेरिका से एलएनजी कार्गो चीन पहुंचा।
कहां से आ रही है एलएनजी
जून में चीन का एलएनजी आयात पिछले साल के मुकाबले 8.3 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 5.68 मिलियन टन रहा। लगातार दूसरे महीने इसमें तेजी आई है।इस बीच जुलाई में अब तक चीन के आयात में ऑस्ट्रेलिया की हिस्सेदारी 43 फीसदी रही,जो मलेशिया,रूस और कतर से कहीं अधिक है। साफ है कि चीन तेजी से एलएनजी का स्टॉक जमा कर रहा है।
चीन की एलएनजी स्टोरेज क्षमता 25.4 मिलियन क्यूबिक मीटर
चीन की एलएनजी स्टोरेज क्षमता 25.4 मिलियन क्यूबिक मीटर है। चीन के तटीय इलाकों में 100 से अधिक तटीय टैंक हैं।साथ ही चीन अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए तेजी से अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है।इसमें राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 270,000 से 240,000 क्यूबिक मीटर क्षमता वाले अल्ट्रा-लार्ज टैंक शामिल हैं।चीन विश्व में एलएनजी का सबसे बड़ा इंपोर्टर है।चीन खाड़ी देशों पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है और रूस से पाइपलाइन आपूर्ति बढ़ा रहा है।