यूपी सरकार ने एससी को बताया,राम मंदिर में चंदे के कथित गबन की जांच के लिए एस‌आईटी बनी
यूपी सरकार ने एससी को बताया,राम मंदिर में चंदे के कथित गबन की जांच के लिए एस‌आईटी बनी

27 Jul 2026 |   25



 

नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित गबन की जांच के लिए आईजी किरण एस. की अध्यक्षता में चार सदस्यों वाली एक स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम (एस‌आईटी) बनाई है।एससी ने राज्य सरकार से कहा कि वह एस‌आईटी में पांचवें सदस्य के तौर पर एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करे।यह टीम दो हफ्ते के अंदर अपनी पहली स्टेटस रिपोर्ट सौंपेंगी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने यूपी सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर ध्यान दिया।मेहता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद 25 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन के जरिए एस‌आईटी का गठन किया गया था।

तुषार मेहता ने बताया कि आईजीपी के अलावा जो उस टीम का हिस्सा थे,जिसने जांच की थी कि एफआईआर दर्ज करने की जरूरत है या नहीं,एस‌आईटी में डीआईजी रैंक के अधिकारी,सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एस‌एसपी) और एडिशनल एसपी भी शामिल होंगे।

बेंच ने कहा कि एस‌आईटी को अपनी रिपोर्ट देने दें।बेंच ने सुनवाई दो हफ्ते के लिए टालते हुए कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे,हम घटना की अच्छी तरह से जांच करने पर ध्यान दे रहे हैं।
चीफ जस्टिस ने कहा,हम निष्पक्ष,तेज और बिना किसी भेदभाव के जांच कराने पर ध्यान दे रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने तर्क दिया कि एस‌आईटी को राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर से मिले दान की रसीदों का ऑडिट करना चाहिए।कामत ने कहा कि लोगों ने 500 रुपये,1000 रुपये दिए हैं, बड़े पैमाने पर ऐसी खबरें हैं कि आखिरकार पैसा ट्रस्ट तक नहीं पहुंचा।ट्रस्ट को जो भी रसीदें मिली हैं, उन्हें वेबसाइट पर डाला जाए ताकि लोगों को पता चल सके कि पैसा पहुंचा है या नहीं,वरना यह एक असंभव काम है,छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और यह कोई विरोधी मामला नहीं है।

बेंच ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने पर जोर दिया और कहा कि कोर्ट का ध्यान इस पूरे मामले की अच्छी गुणवत्ता वाली जांच पर है।एक वकील ने प्रस्ताव दिया कि जांच की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज को नियुक्त किया जाना चाहिए। तुषार मेहता ने कहा कि ऐसे निर्देश की शायद जरूरत नहीं है क्योंकि तीन जजों की मौजूदा बेंच एस‌आईटी की जांच की निगरानी कर रही है।चीफ जस्टिस ने कहा कि अभी कोर्ट का पूरा ध्यान जांच पर है।

सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था,जिनमें अयोध्या राम मंदिर के निर्माण के लिए मिले फंड में कथित हेराफेरी की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) से कराने की मांग की गई थी।

बता दें कि इससे पहले 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मामले का राजनीतिकरण न करने की चेतावनी दी थी और कहा था कि यह अपराध का मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा इसे तार्किक अंजाम तक पहुंचाया जाना चाहिए। 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की एस‌आईटी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से भी जवाब मांगा था। 20 को बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि वह चंदे के कथित गबन की जांच के लिए एस‌आईटी बनाने की संभावना के बारे में जानकारी दे।

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