बदलने वाले हैं 10 और 20 के नोट,सरकार ने दी मंजूरी,क्या होगा अब आगे
बदलने वाले हैं 10 और 20 के नोट,सरकार ने दी मंजूरी,क्या होगा अब आगे

27 Jul 2026 |   23



 

नई दिल्ली।देश में जल्द 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट नजर आ सकते हैं।केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 10 और 20 रुपये के 100-100 करोड़ पॉलिमर नोट परीक्षण के लिए जारी किए जाएंगे।अगर ये ट्रायल कामयाब रहा तो तभी इन नोटों को बड़े स्तर पर जारी करने पर फैसला लिया जाएगा। 

जानें वित्त राज्य मंत्री ने क्या कहा

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि वित्त मंत्रालय ने आरबीआई के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।फिलहाल यह सिर्फ एक पायलट प्रोजेक्ट है, ताकि यह देखा जा सके कि भारतीय मौसम और परिस्थितियों में प्लास्टिक नोट कितने टिकाऊ और उपयोगी साबित होते हैं।

कई देशों में प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल

आरबीआई का मानना है कि पॉलिमर नोट सामान्य कागज के नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं।कई देशों में पहले से ही प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल हो रहा है और वहां इनके बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं। यही वजह है कि भारत भी अब इस तकनीक को परखना चाहता है।

बंद नहीं किए जाएंगे कागज के नोट

हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि कागज के नोट बंद नहीं किए जाएंगे।प्लास्टिक नोट आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा नोट चलन से बाहर हो जाएंगे।अगर ट्रायल सफल रहता है,तो पॉलिमर और पेपर दोनों तरह के नोट एक साथ प्रचलन में रहेंगे।

डिजिटल पेमेंट पर क्या असर

सरकार ने यह भी कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्लास्टिक नोटों के आने से डिजिटल पेमेंट पर कोई असर पड़ेगा या नहीं। इस बारे में कोई निष्कर्ष तभी निकाला जा सकेगा, जब ये नोट आम लोगों के बीच नियमित रूप से चलन में आ जाएंगे। आरबीआई का कहना है कि कैश और डिजिटल पेमेंट दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और आने वाले समय में दोनों का इस्तेमाल साथ-साथ जारी रहेगा,यानी यूपीआई, कार्ड और ऑनलाइन पेमेंट के साथ-साथ नकद लेनदेन की भी अपनी अहम भूमिका बनी रहेगी।

कम हो सकती है नोट छापने की लागत

अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भारत की मुद्रा व्यवस्था में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। प्लास्टिक नोट ज्यादा टिकाऊ होने के साथ जल्दी खराब नहीं होंगे, जिससे नोट छापने की लागत भी लंबे समय में कम हो सकती है। फिलहाल, देशभर की नजरें आरबीआई के इस ट्रायल के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

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