होर्मुज छोड़ अब इस रास्ते से तेल भेज रहा सऊदी, जानें क्या है पूरी रणनीति
होर्मुज छोड़ अब इस रास्ते से तेल भेज रहा सऊदी, जानें क्या है पूरी रणनीति

30 Jul 2026 |   23



 

 
नई दिल्ली।पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने कच्चे तेल की सप्लाई जारी रखने के लिए नया रास्ता अपनाया है।अब सऊदी अरब मिस्र की SUMED पाइपलाइन, सिदी केरिर टर्मिनल और स्वेज नहर के जरिए तेल एशियाई देशों तक पहुंचा रहा है।ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर के रास्ते पर लगातार खतरा बना हुआ है।

आखिर क्यों बदलना पड़ा रास्ता

होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है,लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।ऐसे में सऊदी अरब ने तेल की सप्लाई न रुके, इसलिए दूसरा रास्ता अपनाया है।सऊदी अरब पहले कच्चे तेल को SUMED पाइपलाइन के जरिए मिस्र पहुंचाता है। इसके बाद सिदी केरिर बंदरगाह से जहाजों में लोड कर स्वेज नहर के रास्ते एशियाई देशों तक भेजा जाता है। हालांकि यह सिर्फ एक वैकल्पिक रास्ता है और होर्मुज की पूरी भरपाई नहीं कर सकता।

यह रास्ता आसान नहीं

इस रास्ते से तेल भेजने में 20 से 30 दिन ज्यादा लगते हैं। इसके अलावा ढुलाई का खर्च भी बढ़ जाता है।बड़े तेल टैंकरों का माल बीच में दूसरे जहाजों में उतारना पड़ता है।इससे सऊदी अरब की लॉजिस्टिक्स लागत करीब 5 डॉलर प्रति बैरल बढ़ सकती है।

विश्व के लिए कितना बड़ा खतरा

अगर होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब दोनों रास्तों पर पूरी तरह रुकावट आ जाती है,तो विश्व में लगभग 18 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल और 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। दूसरे देशों से अतिरिक्त सप्लाई मिलने के बाद भी बाजार में 11 से 13 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी रह सकती है।

होर्मुज ही नहीं,लाल सागर भी चिंता की वजह

होर्मुज से तेल की आवाजाही अभी भी युद्ध से पहले के मुकाबले 80-85 फीसदी कम है। वहीं लाल सागर के रास्ते भी तेल की ढुलाई धीमी पड़ने लगी है। अगर यह स्थिति और बिगड़ती है, तो विश्व के सामने तेल सप्लाई की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

आगे क्या हो सकता है

अनुमान है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव बना रहेगा, तब तक ब्रेंट क्रूड 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकता है।अगर तनाव और बढ़ता है, तो कीमतें 100 डॉलर से ऊपर जाकर 120 डॉलर तक पहुंच सकती हैं।वहीं अगर हालात सामान्य होते हैं और होर्मुज का रास्ता पूरी तरह खुल जाता है, तो ब्रेंट 80 डॉलर से नीचे फिसलकर 70-68 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है।

More news