प्रयागराज।उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।सुनवाई के बाद एक बार फिर चुनाव की प्रक्रिया को लेकर हलचल तेज हो गई है।करीब डेढ़ घंटे तक चली सुनवाई में चुनाव की टाइमलाइन,आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।अब मामले की अगली सुनवाई कल गुरुवार दोपहर 12 बजे होने की बात सामने आई है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आयोग की रिपोर्ट का इंतजार पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को और आगे खींचेगा या अदालत चुनाव कराने का रास्ता साफ करेगी।इसी सवाल पर अब सबकी नजर गुरुवार की सुनवाई पर है.।
कोर्ट में आया चुनाव को आगे बढ़ाने का सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से यह टिप्पणी सामने आई कि यदि रिपोर्ट तैयार होने में समय लग रहा है तो चुनाव कराकर रिपोर्ट की प्रक्रिया आगे जारी रखने पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता।अगर यह टिप्पणी कोर्ट की कार्यवाही/ऑर्डर-शीट में दर्ज है, तो इसे पंचायत चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाएगा। फिलहाल इसे चुनाव कराने का अंतिम आदेश या चुनाव की तारीख घोषित होना नहीं माना जा सकता।
आखिर कहां अटका है पंचायत चुनाव
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2021 में हुआ था।ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का पांच वर्ष का संवैधानिक कार्यकाल मई 2026 में पूरा हो चुका है,इसके बाद से ही समय पर चुनाव नहीं होने को लेकर अदालत में मामला चल रहा है।चुनाव की प्रक्रिया में ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट और मतदाता सूची समेत कई तैयारियां महत्वपूर्ण हैं। हाईकोर्ट पहले भी राज्य सरकार से ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव कार्यक्रम की स्थिति स्पष्ट करने को कह चुका है।
पहले भी कोर्ट ने देरी पर जताई थी नाराजगी
पंचायत चुनाव में देरी का मामला पहले भी हाईकोर्ट में गंभीरता से उठा है।जून में अदालत ने कहा था कि पंचायतों का पांच वर्ष का कार्यकाल संवैधानिक व्यवस्था के तहत तय है और चुनाव को अनिश्चित समय तक आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।कोर्ट ने सरकार से चुनाव की समयसीमा स्पष्ट करने को भी कहा था।अगस्त में लखनऊ बेंच ने भी टिप्पणी की थी कि अधिसूचना की तारीख से छह महीने के भीतर चुनाव कराने की संवैधानिक बाध्यता है और सरकार के अनुसार यह अवधि नवंबर 2026 में समाप्त होगी।
कल 12 बजे फिर होगी सुनवाई, क्या खुलेगा चुनाव का रास्ता
बुधवार की सुनवाई के बाद अब सबसे ज्यादा नजर गुरुवार दोपहर 12 बजे की कार्यवाही पर है।अगर अदालत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश देती है, तो पंचायत चुनाव की आगे की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है,लेकिन जब तक राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं होता, तब तक किसी तारीख को चुनाव की अंतिम तारीख मानना सही नहीं होगा।
90 मिनट की सुनवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल
डेढ़ घंटे की सुनवाई के बाद फिलहाल मामला किसी अंतिम चुनावी तारीख तक नहीं पहुंचा है,लेकिन सुनवाई में रिपोर्ट की देरी और चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से जुड़ा सवाल सामने आने से अगली सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है।अब गुरुवार दोपहर 12 बजे होने वाली सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि कोर्ट चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए क्या दिशा देता है और ओबीसी रिपोर्ट को लेकर क्या रुख अपनाता है। यानी पंचायत चुनाव को लेकर फैसले का असली राज अब अगली सुनवाई में खुलने की उम्मीद है।