एटा में 2008 के राजस्व परिषद परिपत्र के अनुपालन पर उठे सवाल,कलेक्ट्रेट और तहसीलों में लिपिकीय कर्मचारियों की लंबी तैनाती के आरोप,नवागत डीएम से जांच व स्थिति स्पष्ट करने की उम्मीद
एटा में 2008 के राजस्व परिषद परिपत्र के अनुपालन पर उठे सवाल,कलेक्ट्रेट और तहसीलों में लिपिकीय कर्मचारियों की लंबी तैनाती के आरोप,नवागत डीएम से जांच व स्थिति स्पष्ट करने की उम्मीद

24 Sep 2026 |   39



ब्यूरो तुर्रम सिंह 

एटा।राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा 20 जून 2008 को जारी परिपत्र संख्या 7644/12-10ई/2008 के अनुपालन को लेकर जनपद एटा में सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं और कुछ स्थानीय कर्मचारियों का आरोप है कि कलेक्ट्रेट और तहसील स्तर पर कुछ लिपिकीय कर्मचारियों की तैनाती निर्धारित अवधि से अधिक समय तक चल रही है। हालांकि, किसी विशिष्ट कर्मचारी के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है।बताया गया है कि उक्त परिपत्र तत्कालीन आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद द्वारा मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को जारी किया गया था। इसमें कलेक्ट्रेट एवं तहसीलों में कार्यरत लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों की तैनाती, स्थानांतरण तथा संवेदनशील पटल पर कार्य की अवधि को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए थे।

एक तहसील में 10 और कलेक्ट्रेट में 15 वर्ष की सीमा

परिपत्र के अनुसार किसी कर्मचारी को उसके पूरे सेवाकाल में एक ही तहसील में 10 वर्ष और कलेक्ट्रेट में 15 वर्ष से अधिक समय तक तैनात नहीं किए जाने का प्रावधान बताया गया है। इसके साथ ही किसी एक पद अथवा पटल पर लगातार तीन वर्ष से अधिक तैनाती न किए जाने की व्यवस्था भी दी गई है।संवेदनशील माने जाने वाले पदों,जिनमें राजस्व न्यायालयों के पेशकार,नाजिर,मोहर्रिर जुडिशियल,शस्त्र लिपिक,सामान्य लिपिक,राजस्व सहायक और स्थानीय निश्चय लिपिक आदि शामिल हैं,पर कुल तैनाती अवधि को लेकर भी सीमा निर्धारित की गई थी।

कलेक्ट्रेट और तहसीलों के बीच स्थानांतरण का प्रावधान

परिपत्र में वेतनमान 3050-4590 वाले कर्मचारियों के संबंध में सेवा के प्रथम दस वर्षों में न्यूनतम पांच वर्ष कलेक्ट्रेट तथा पांच वर्ष अन्य तहसीलों में कार्य करने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। पांच वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद कलेक्ट्रेट से तहसील तथा तहसील से कलेक्ट्रेट स्थानांतरण किए जाने की व्यवस्था भी बताई गई है।इसके अलावा स्थानांतरण के दौरान ऐसी तहसील को प्राथमिकता देने के निर्देश बताए गए हैं, जहां संबंधित कर्मचारी पूर्व में कार्यरत न रहा हो। गृह तहसील में तैनाती से बचने का भी प्रावधान परिपत्र में बताया गया है।

संबद्धीकरण पर भी निर्धारित की गई थी सीमा

परिपत्र में कर्मचारियों के संबद्धीकरण को सामान्य स्थिति में न किए जाने की बात कही गई है।अपरिहार्य परिस्थितियों में संबद्धीकरण होने पर भी इसकी अवधि एक वर्ष से अधिक न रखने तथा पूरे सेवाकाल में कुल संबद्धीकरण की अवधि एक वर्ष से अधिक न होने का प्रावधान बताया गया है।संबद्धीकरण की अवधि को संबंधित पद पर तैनाती की अवधि में शामिल किए जाने की व्यवस्था भी बताई गई है।

एटा में अनुपालन की स्थिति पर मांगी जा रही है स्पष्टता

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जनपद एटा के कलेक्ट्रेट एवं विभिन्न तहसीलों में कुछ लिपिकीय कर्मचारियों की तैनाती अवधि इन निर्धारित सीमाओं से अधिक होने की स्थिति की जांच आवश्यक है। आरोप है कि कुछ कर्मचारी लंबे समय से एक ही पटल अथवा कार्यालय में कार्यरत हैं।हालांकि,यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी कर्मचारी की निर्धारित अवधि से अधिक तैनाती का आरोप तभी प्रमाणित माना जा सकता है, जब संबंधित कर्मचारी की सेवा पंजिका, नियुक्ति एवं स्थानांतरण आदेश तथा वर्तमान तैनाती से संबंधित आधिकारिक अभिलेखों का परीक्षण किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि वर्ष 2008 के उक्त परिपत्र की वर्तमान में लागू स्थिति क्या है तथा बाद में जारी किसी शासनादेश, परिषद के निर्देश अथवा संशोधन से इसमें कोई परिवर्तन हुआ है या नहीं।

नवागत डीएम से जांच की उम्मीद

जनपद में नवागत जिलाधिकारी एम अरुन्मोली के कार्यभार संभालने के बाद इस मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं और स्थानीय लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं। लोगों का कहना है कि यदि 2008 का परिपत्र वर्तमान में प्रभावी है तो कलेक्ट्रेट और तहसीलों में लिपिकीय कर्मचारियों की तैनाती अवधि की निष्पक्ष समीक्षा कराई जानी चाहिए और निर्धारित मानकों के अनुरूप आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं यदि बाद के किसी आदेश अथवा शासन स्तर के निर्देश के कारण उक्त व्यवस्था में बदलाव हुआ है तो प्रशासन द्वारा उसकी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किए जाने से भ्रम की स्थिति समाप्त हो सकती है।

समाचार लिखे जाने तक जिला प्रशासन अथवा राजस्व परिषद की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी थी। इस रिपोर्ट में किसी कर्मचारी पर व्यक्तिगत रूप से अनियमितता का आरोप सिद्ध नहीं माना जा रहा है। वास्तविक स्थिति संबंधित सरकारी अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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