ब्यूरो तुर्रम सिंह
जलेसर/एटा।जलेसर उपजिलाधिकारी न्यायालय की जर्जर इमारत अब सीधे-सीधे जनजीवन के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। छत का पलस्तर जगह-जगह से झड़ चुका है,लोहे की सरिया बाहर लटक रही हैं और दीवारों में गहरी दरारें साफ संकेत दे रही हैं कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। यह स्थिति अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि वर्षों से चली आ रही घोर लापरवाही का नतीजा है।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जनपद एटा से उपजिलाधिकारी पीयूष रावत हाल ही में लगभग एक माह के अंदर ही जलेसर में तैनात हुए हैं।ऐसे में इस जर्जर व्यवस्था की जड़ें पहले की प्रशासनिक अनदेखी और उपेक्षा में गहराई से जुड़ी हुई हैं। बावजूद इसके वर्तमान में भी हालात जस के तस बने रहना सवाल खड़े करता है कि आखिर सुधार की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है।
पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता संघ संगठन जलेसर एडवोकेट सुनील यादव ने वीडियो जारी कर इस खतरनाक स्थिति को उजागर किया है।उनका कहना है कि इस समस्या को लेकर बार-बार शिकायतें की गईं,लेकिन वर्षों तक इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।अब जब हालात बेहद नाजुक हो चुके हैं, तब भी ठोस कार्रवाई का अभाव चिंताजनक है।
न्याय का केंद्र माना जाने वाला यह भवन अब खुद असुरक्षा का प्रतीक बन गया है।यहां रोजाना सैकड़ों वकील,मुवक्किल और कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।यदि समय रहते मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई,तो कोई भी अनहोनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।
स्थानीय वकीलों और जनता में आक्रोश बढ़ रहा है। उनका साफ कहना है कि यह केवल एक इमारत का मामला नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या नई तैनाती के साथ इस लंबे समय से चली आ रही लापरवाही पर विराम लगेगा, या फिर कोई बड़ी घटना ही व्यवस्था को जगाने का कारण बनेगी। फिलहाल जलेसर न्यायालय की यह जर्जर इमारत हर दिन एक संभावित हादसे की चेतावनी देती नजर आ रही है।