जलेसर नगर पालिका में दिखावटी सफाई का खेल,नालों में सड़ांध,सड़कों पर गड्ढे,जवाबदेही पर उठे तीखे सवाल
जलेसर नगर पालिका में दिखावटी सफाई का खेल,नालों में सड़ांध,सड़कों पर गड्ढे,जवाबदेही पर उठे तीखे सवाल

25 Feb 2026 |   29



रिपोर्ट-योगेंद्र प्रताप सिंह 

एटा।उत्तर प्रदेश के एटा जिले में जलेसर नगर पालिका में नाले की सफाई और सड़क मरम्मत को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमित सफाई के बजाय केवल उच्चाधिकारियों के दौरे से पहले हड़बड़ी में काम कराया जाता है,जबकि अधिकांश समय नाले कीचड़ और कचरे से पटे रहते हैं।इससे दुर्गंध,जलभराव और दुर्घटनाओं की समस्या बढ़ रही है।

   दौरे से पहले सफाई,बाद में ढाक के तीन पात

स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे ही किसी वरिष्ठ अधिकारी या जिलाधिकारी के आगमन की सूचना मिलती है,मशीनें और मजदूर अचानक सक्रिय हो जाते हैं।कुछ मुख्य मार्गों पर सतही सफाई कर दी जाती है,लेकिन अंदर गलियों और नालों की जमी गंदगी जस की तस बनी रहती है।स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि कागज़ों में व्यापक सफाई दिखती है,ज़मीनी हकीकत में नाले सालभर भरे रहते हैं।

 निधौली चौराहे से डिग्री कॉलेज मार्ग,खतरे का गड्ढा

नगर पालिका कार्यालय के पास निधौली चौराहे से डिग्री कॉलेज की ओर जाने वाली सड़क पर लंबे समय से गहरा गड्ढा बना होने की शिकायतें हैं।बरसात में यहां पानी भर जाता है, जिससे दोपहिया वाहन फिसलने और राहगीरों के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं।स्थानीय युवाओं का कहना है कि नगर पालिका के ठीक बगल में यह स्थिति है,तो बाकी वार्डों का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

  टेंडर और बिलों पर सवाल

कुछ लोगों ने टेंडर प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े बिलों की पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठाए हैं।उनका दावा है कि नियमित निगरानी और सोशल ऑडिट न होने से गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

  नगर पालिका का पक्ष

नगर पालिका परिषद जलेसर के अध्यक्ष प्रतिनिधि संजीव वर्मा पर लगाए गए आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया।समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि ठोस शिकायत मिलती है तो जांच कराई जा सकती है।

 लोगों की मांग नियमित सफाई और जवाबदेही

लोगों की मांग है कि नालों की मासिक/पखवाड़ा सफाई का सार्वजनिक कैलेंडर जारी हो।

टेंडर,भुगतान और कार्य प्रगति की जानकारी वेबसाइट/नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जाए।

वार्ड-स्तरीय जन-सुनवाई कर समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वच्छता और सड़क सुरक्षा बुनियादी अधिकार हैं।यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो वे उच्चाधिकारियों से शिकायत और जन-आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

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