पीएम मोदी के गढ़ में MLC सीट पर साइकिल की दहाड़,बीजेपी खिला नहीं पाई कमल,भारी मतों से जीते आशुतोष सिन्हा
पीएम मोदी के गढ़ में MLC सीट पर साइकिल की दहाड़,बीजेपी खिला नहीं पाई कमल,भारी मतों से जीते आशुतोष सिन्हा

29 Oct 2026 |   32



 

वाराणसी।उत्तर प्रदेश के लिए सबसे हॉट सीट बनी वाराणसी खंड क्षेत्र की स्नातक सीट पर इस बार समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर से अपनी जीत का परचम लहराया है।सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने बीजेपी प्रत्याशी को लगभग 20000 वोटो के साथ पीछे छोड़कर एक बार फिर से स्नातक एमएलसी के सीट पर जीत का परचम लहराया है।सपा ने अपने पुराने जीते हुए प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा पर दांव लगाया गया था,तो वहीं भाजपा ने अपने पुराने हारे हुए प्रत्याशी केदारनाथ सिंह पर दांव लगाया था।

बता दें कि वाराणसी शिक्षक एवं स्नातक एमएलसी की सीट के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था,जहां शिक्षक एमएलसी सीट पर लगभग 24000 के करीब मतदाताओं ने मतदान किया था।स्नातक की सीट पर लगभग 118000 मतदाताओं ने मतदान किया था। 27 अक्टूबर से मतगणना की शुरुआत हुई।  27 अक्टूबर की देर रात शिक्षक एमएलसी सीट पर चुनाव के परिणाम घोषित किए गए,जिसमें सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव एक बार फिर से अपनी जीत को सुनिश्चित किए और उन्होंने भाजपा के प्रमोद कुमार को हराया।वहीं आज स्नातक एमएलसी की भी रिजल्ट सामने आ गए,जहां आशुतोष सिंह ने लगभग 20 हजार की लीड के साथ इस सीट पर अपनी जीत हासिल की,इसके साथ ही एक बार फिर से वाराणसी खंड की दोनों सीट सपा के खाते में चली ग‌ई है।

जनता को दिया धन्यवाद

इस बारे में इस सपा के विजयी प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने कहा कि यह चुनाव नहीं चुनौती थी,क्योंकि जिस तरीके से बीजेपी ने लामबंदी के साथ रे काउंटिंग की मांग को लेकर के विरोध करना शुरू कर दिया,हर तरीके से उन्होंने अपनी चाल चली,लेकिन जनता के वोट के आगे सब पीछे रह गया।सिन्हा ने कहा कि हमारे साथ ,जिस तरीके का लोगों ने षड्यंत्र करने की कोशिश की,वह षड्यंत्र हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष और जनता के साथ से चल नहीं पाया और जनता ने एक बार फिर से समाजवादी पार्टी पर भरोसा जताया है।हम बहुत खुश हैं और इसके लिए धन्यवाद देना चाहते हैं।सिन्हा ने कहा कि प्रमाण पत्र लेना है,लेकिन लगभग 20000 से ज्यादा वोट से जीत हुई है।

दो बार से जीत रही सपा

बता दें कि वाराणसी खंड का चुनाव वाराणसी के साथ चंदौली जौनपुर गाजीपुर मिर्जापुर सोनभद्र भदोही बलिया जिले तक शामिल है,इस पूरे निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 2.88 लाख स्नातक और 34900 शिक्षक मतदाता है,जिसमें स्नातक के 1 लाख 18000 के करीब मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था,तो वही शिक्षक में लगभग 24000 के करीब मतदाता वोट किये थे। 2020 में आशुतोष सिन्हा को 26335 मत मिले थे,जबकि केदारनाथ सिंह को 22685 मत मिले थे। वहीं इस बार आशुतोष सिन्हा को 55046 वोट मिले और केदार सिंह को 35114 वोट मिले।आशुतोष सिन्हा ने 19932 से अधिक मतों के साथ जीत हासिल की है।

23 अक्टूबर को हुआ था मतदान 

बताते चलें कि वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र में कुल 74,840 मतदाता है,जो 21 मतदान केंद्रों पर बने 102 बूथों में अपने मताधिकार का प्रयोग किए थे,शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की बात करें तो इसमें 69952 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 7888 मतदाता है। वाराणसी की बात करें तो यहां पर स्नातक और शिक्षक दोनों सीटों के लिए कोई 34 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था।स्नातक सीट पर 24 और शिक्षक सीट पर 10 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाए थे।इस बार वाराणसी में बीजेपी और सपा में कड़ी टक्कर देखने को मिली।बीजेपी ने पूर्व एमएलसी केदारनाथ सिंह पर दाव लगाया था, तो वहीं वहीं सपा ने निवर्तमान एमएलसी आशुतोष सिंह पर दांव लगाया था।शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की बात करें तो सपा के निवर्तमान एमएलसी लाल बिहारी यादव और बीजेपी के डॉक्टर प्रमोद कुमार और पूर्व एमएलसी चेतनारायण सिंह के बीच कड़ा टक्कर दिखी,जहां सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव जीत हासिल किए एक बार फिर से बीजेपी से डॉक्टर प्रमोद कुमार को पटखनी दे दी।

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जानिए कौन है आशुतोष सिन्हा,जिन्होंने पीएम के गढ़ में की सेंधमारी

आशुतोष सिन्हा की बात करें तो,इसके पहले 2020 में सिन्हा ने समाजवादी से एमएलसी सीट का चुनाव लड़ा था,जिसमें को जीत हासिल हुई थी और इस बार फिर से सपा ने सिन्हा पर भरोसा जताते हुए उन्हें बतौर प्रत्याशी मैदान में उतारा,जहां सिन्हा ने भाजपा प्रत्याशी को हराते हुए कब्जा बरकरार रखा है।सिन्हा के राजनीतिक अनुभव की बात करें तो उन्होंने हरिशचंद्र पीजी कॉलेज से अपने छात्र राजनीति की शुरुआत की।सिन्हा ने विधि में स्नातक की पढ़ाई करने के साथ 2006 में छात्र संघ चुनाव में हिस्सा लेते हुए उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल किया,जिसके बाद सिन्हा समाजवादी छात्र सभा के साथ जुड़ गए।यहां से आगे बढ़ते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव के वह बेहद करीबी बन गए।सिन्हा के पारिवारिक पृष्टभूमि की बात करें तो वो वाराणसी के सिद्धगिरी बाग के मूल निवासी हैं।सिन्हा दो भाइयों में सबसे छोटे है।पिता मध्य प्रदेश में पेपर मिल में इंचार्ज थे,मां गृहणी है।

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