जौनपुर।घर के सदस्य के मरने पर परिजन अंतिम संस्कार से लेकर तेरहवीं तक करते हैं।वहीं पशुओं के प्रति अथाह प्रेम रखने वाले लोग भी इस धरती पर हैं।इसकी अनूठी मिसाल विकासखंड क्षेत्र के चक गोविंदपुर गांव के पूर्व सरपंच रामलगन यादव ने पेश की है। 28 वर्षीय बैल की मृत्यु के बाद रामलगन ने उसका अंतिम संस्कार किया।अब 27 अक्टूबर को बैल की तेरहवीं का आयोजन करेंगे।इसके लिए बाकायदा निमंत्रण पत्र भी छपवाया गया है।ब्राह्मण भोज,दान और लगभग तीन हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था की जा रही है।एक पालतू पशु की मौत के बाद इस तरह धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने और सामूहिक भोज आयोजित करने की तैयारी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
चक गोविंदपुर निवासी रामलगन यादव का पालतू बैल (नकछेदन महादेव बाबा) की 15 अक्टूबर को मौत हो गयी। 28 वर्षों तक परिवार के साथ रहने के कारण उससे घर के लोगों का गहरा भावनात्मक जुड़ाव था।
बैल की मौत के बाद रामलगन यादव ने उसे परिवार के सदस्य की तरह सम्मान देते हुए ग्रामीणों की मौजूदगी में गांव में ही समाधि देकर अंतिम संस्कार किया। इसके बाद 19 अक्टूबर को घाट कर्म की परंपरा निभाई गई।इस दौरान रामलगन के साथ गांव वाले और रिश्तेदारों ने बाल और दाढ़ी बनवाने के साथ ब्राह्मण के माध्यम से धार्मिक क्रियाकर्म भी कराया।
बता दें कि हिंदू धर्म में देवाधिदेव महादेव के वाहन नंदी की पूजा का विशेष महत्व है।किसान के जीवन में बैल को खेती-किसानी और पारिवारिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है।ऐसे में 28 वर्षों तक परिवार के साथ रहे पालतू बैल की मौत के बाद उसके लिए अंतिम संस्कार से लेकर तेरहवीं तक की परंपरा निभाने का रामलगन यादव का निर्णय पशु प्रेम की अनूठी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल मनुष्य और पशु के बीच बनने वाले भावनात्मक रिश्ते तथा जीवों के प्रति संवेदना के महत्व को भी सामने लाती है।