नई दिल्ली।कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को नरमी दिखी। ब्रेंट क्रूड अभी भी 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बना हुआ है।क्रूड में इस उछाल ने विश्वभर में महंगाई को बढ़ाने की आशंकाएं बना दी हैं,इससे सरकारों की टेंशन बढ़ गई है। फिलहाल विश्वभर के देश क्रूड को नियंत्रण में लाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।हालांकि क्रूड में दबाव डालने वाले फैक्टर्स भी कम मजबूत नहीं हैं,इसी वजह से असर सीमित ही दिख रहा है।आइए एक नजर डालें विश्वभर में तेल को नियंत्रण में लाने के लिए देश क्या कर रहे हैं।
जी 7 जारी करेगा 10 करोड़ बैरल तेल
जी 7 देशों ने अगले चार महीनों में अपने आपातकालीन भंडार से कुल 10 करोड़ बैरल तेल और ईंधन उत्पाद जारी करने की योजना बनाई है,इसमें शुरुआती 20 दिनों में बड़ी मात्रा में डीजल जारी किया जाएगा,इसका उद्देश्य खास तौर पर डीजल की ऊंची कीमतों और आपूर्ति की कमी से राहत देना है।
जी7 में अमेरिका,ब्रिटेन,कनाडा,फ्रांस,जर्मनी,इटली और जापान है शामिल
जी7 में अमेरिका,ब्रिटेन,कनाडा,फ्रांस,जर्मनी,इटली और जापान शामिल है।यह फैसला ऐसे समय में आया है,जब यूरोप और अमेरिका में डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं और पश्चिम एशिया और पूर्वी यूरोप के युद्धों के कारण ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी किसानों,ट्रक चालकों और कारोबारियों पर डीजल की कमी का पूरा बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
सऊदी अरब हूती के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में
इस बीच मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की खबरों से तेल बाजार में जोखिम बना हुआ है।सऊदी अरब यमन में ईरान समर्थित हूती समूह के खिलाफ सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। क्षेत्रीय और पश्चिमी अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई के विकल्पों में लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने के लिए तटीय अभियान या यमन के कई मोर्चों पर व्यापक कार्रवाई शामिल है।
आने वाले हफ्तों में शुरू हो सकता है अभियान
आने वाले हफ्तों में अभियान शुरू हो सकता है,इसमें सऊदी
अरब के समर्थन वाले यमनी बल जमीनी स्तर पर कार्रवाई कर सकते हैं,जबकि सऊदी अरब हवाई सहायता देगा। अधिकारियों के अनुसार अभियान के आकार के आधार पर 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को जुटाया जा सकता है।
इस कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण वापस हासिल करना बताया जा रहा है।यह लाल सागर का महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है और यूरोप तथा एशिया के बीच व्यापारिक जहाजों के लिए बेहद अहम है।
अमेरिका के डीजल एक्सपोर्ट पर भी नजर
अमेरिकी प्रशासन ने यूरोपीय देशों से डीजल भंडार जारी करने की अपील की थी।इससे पहले अमेरिका में डीजल के निर्यात पर संभावित रोक की चर्चा भी हुई थी,हालांकि बाद में इस विकल्प पर रुख नरम पड़ता दिखाई दिया,ऐसी रोक से यूरोप में ईंधन आपूर्ति पर और दबाव पड़ने की आशंका जताई गई थी।इससे पहले मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच तेल कीमतों में तेजी आई थी।अब जी7 के रणनीतिक भंडार से तेल और डीजल जारी करने के फैसले ने कीमतों को कुछ राहत दी है।हालांकि लाल सागर और मध्य पूर्व में संभावित सैन्य गतिविधियों के कारण आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
क्या है क्रूड पर दबाव बढ़ाने वाले फैक्टर्स
ईरान के सख्त रूख से क्रूड को नियंत्रण में लाने के लिए किए जा रहे उपाय ज्यादा कारगर नहीं हो रहे हैं।एक्सपर्ट्स के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोले बिना तेल को नियंत्रण में लाना संभव नहीं है।एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अमेरिका में मिड टर्म चुनाव के बाद ही कोई हल निकल सकता है,ये चुनाव नवंबर के पहले हफ्ते में हैं,इसके अलावा हूती विद्रोही के एक्शन भी तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं।
इसके अलावा रूस यूक्रेन संकट का डीजल के सप्लाई पर असर देखने को मिल रहा है।कुल मिलाकर तेल बाजार के सामान्य होने में जियोपॉलिटिकल टेंशन सबसे अहम हैं।इन तनाव के खत्म होने के साथ ही तेल बाजार में नरमी देखने को मिल सकती है।