केजरीवाल की अर्जी पर आया फैसला,सुनवाई से खुद को अलग नहीं करेंगी जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा,केजरीवाल की मांग को किया खारिज
केजरीवाल की अर्जी पर आया फैसला,सुनवाई से खुद को अलग नहीं करेंगी जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा,केजरीवाल की मांग को किया खारिज

20 Apr 2026 |   22



 

नई दिल्ली।दिल्ली हाई कोर्ट ने आबकारी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य की ओर से दाखिल की गई रिक्यूजल याचिका को खारिज कर दिया है।जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया।बता दें कि इस याचिका के जरिए पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और अन्य ने एक्साइज पॉलिसी केस में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को सुनवाई से हटाने की मांग की थी। सोमवार को इस मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।केजरीवाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिल्ली हाई कोर्ट में पेश हुए।

जस्टिस शर्मा ने खुद को अलग करने की केजरीवाल की मांग को खारिज किया 

सुनवाई से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को अलग करने की अरविंद केजरीवाल की मांग को खारिज कर दिया है।जस्टिस शर्मा ने कहा कि अगर मैं खुद को इस मामले से अलग कर लेती हूं तो जनता को यह लगने लगेगा कि जज किसी खास राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़े हुए हैं।यह अदालत खुद को मामले से अलग करके,ऐसी धारणा बनने की अनुमति नहीं दे सकती।

अलग किया तो किसी भी जज के लिए काम करना नामुमकिन:जस्टिस शर्मा

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि मेरा न्यायिक करियर 34 साल का है,लेकिन क्या ऐसा हो सकता है कि जजों को अब मुकदमा लड़ने वाले की तरफ से तय किया गया एक और टेस्ट पास करना पड़े, ताकि यह साबित हो सके कि वे केस सुनने के लिए योग्य हैं,ऐसे में जजों को उस मनगढ़ंत टेस्ट की शर्तों को पूरा करना होगा,जैसे कि उन्होंने किसी संगठन के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया हो, या उनके परिवार के सदस्य कानूनी पेशे में न हों। ऐसा होने पर किसी भी जज के लिए काम कर पाना नामुमकिन हो जाएगा।जस्टिस शर्मा ने कहा कि मुझे पता है कि एक न्यायाधीश के रूप में मेरी आलोचना की जाएगी। चाहे वो इंटरनेट मीडिया हो या आवेदक। मुझे पता है कि मुझे कितना और क्या करना है। उन्होंने कहा कि अगर मैं बिना सुने इन्कार कर देती तो मैं अपनी ड्यूटी सरेंडर कर देता।

सुनवाई से अलग होने के गहरे संवैधानिक प्रभाव होंगे:जस्टिस शर्मा

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि यह बार-बार कहा गया था कि मेरी ईमानदारी पर कोई संदेह नहीं है और मेरी बहुत इज्जत करते हैं पर उन्हें कहा कि वो अपने मन का क्या करें जब उनके मन में ऐसे विचार आ रहे हैं।उन्होंने कहा कि सुनवाई से अलग होने के गहरे संवैधानिक प्रभाव होंगे। जस्टिस शर्मा ने कहा कि मैंने अपने आप से पूछा कि अगर मैं इनकार नहीं करूंगी तो क्या हो सकता है।फिर मैंने सोचा अगर मैं मना कर दूं तब क्या होगा।कहा कि मैंने बहुत से एमपी-एमएलए केस भी दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर किए हैं, अगर मुझे महसूस हुआ कि केस यहां नहीं सुना जाना चाहिए।

सिसोदिया की तरफ से पेश वकील के तर्क का किया जिक्र

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मनीष सिसोदिया की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े के तर्क का जिक्र किया। जिसमें उन्होंने माता सीता को एक बार नहीं बल्कि दो बार अग्नि परीक्षा देने का जिक्र किया था। जस्टिस शर्मा ने कहा कि यह कोर्ट इस नई बात के लिए शुक्रगुजार है, लेकिन अगर इस कोर्ट को एक आरोपित अग्नि परीक्षा देने के लिए कहता है, जिसे बरी कर दिया गया है, तो इस कोर्ट को यह सवाल करना चाहिए कि एक जज को सिर्फ एक आरोपित के कहने पर अग्नि परीक्षा क्यों देनी पड़ती है, सिर्फ इसलिए कि उसे डर है कि जज गलत नतीजा दे सकता है।

कोई वादी बिना साक्ष्य के जज को भी जज नहीं कर सकता:जस्टिस शर्मा

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि एक आरोपित यह साबित कर सकता है कि वह बेगुनाह है, लेकिन उसे यह साबित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती कि जज दागी है। जस्टिस शर्मा ने कहा कि जब वादी अदालत को जज करेगा और जब अदालत उसे जज करेगी, उसका अलग क्राइटेरिया नहीं हो सकता। कोई वादी बिना साक्ष्य के जज को भी जज नहीं कर सकता।

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