नई दिल्ली।दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को एक अजीबो-गरीब नजारा दिखा।आम आदमी पार्टी के मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद अदालत में आए और मांग की कि जो जज उनका केस सुन रही हैं,वो इस केस से हट जाएं। सीबीआई ने इसे नाटक कहा।जज ने अर्जी ले ली और अगले सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख दे दी।
यह पूरा मामला दिल्ली में कुछ साल पहले शराब की दुकानों के लिए बनाई गई एक नई नीति से शुरू हुआ।आरोप लगा कि इस नीति में बड़ा घोटाला हुआ,गलत लोगों को फायदा पहुंचाया गया और पैसों का लेनदेन हुआ।सीबीआई ने इस मामले में केजरीवाल,मनीष सिसोदिया और 21 और लोगों को आरोपी बनाया।
निचली अदालत ने क्या किया
27 फरवरी को निचली अदालत ने कहा कि सीबीआई का पूरा केस बेहद कमजोर है,उसमें कोई दम नहीं है और सभी 23 लोगों को आरोपों से मुक्त कर दिया। अरविंद केजरीवाल और बाकी सब बरी हो गए।अदालत ने सीबीआई को भी जमकर फटकार लगाई।
क्यों गई CBI हाईकोर्ट
सीबीआई को यह फैसला मंजूर नहीं था,वो हाईकोर्ट चली गई। वहां यह केस जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के पास आया। 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने कहा कि निचली अदालत के कुछ फैसले गलत लगते हैं। जस्टिस शर्मा ने यह भी रोक दिया कि सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई न हो, जो निचली अदालत ने कहा था।यहीं से केजरीवाल खेमे को लगा कि यह जज उनके पक्ष में नहीं हैं।
केजरीवाल ने जज बदलने की मांग की
11 मार्च को पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और बाकी लोगों ने कहा कि जस्टिस शर्मा के सामने सुनवाई निष्पक्ष नहीं होगी।उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य जज से भी अनुरोध किया कि यह केस किसी दूसरे जज को दे दिया जाए,लेकिन मुख्य जज ने मना कर दिया,उन्होंने कहा कि यह फैसला तो जस्टिस शर्मा को खुद लेना होगा।
क्या हुआ आज
अरविंद केजरीवाल खुद हाईकोर्ट पहुंचे और अपनी अर्जी दी। सीबीआई के वकील तुषार मेहता ने कड़ा विरोध किया।मेहता बोले कि यह अदालत नाटक करने की जगह नहीं है।यह अर्जी बेकार है और अदालत की तौहीन है।जस्टिस शर्मा ने अर्जी ले ली और कहा कि 13 अप्रैल को सुनवाई होगी।
क्या है पूरी बात
अरविंद केजरीवाल एक बार बरी हो चुके हैं,लेकिन सीबीआई ने हार नहीं मानी।अब हाईकोर्ट में लड़ाई है और केजरीवाल चाहते हैं कि जो जज यह केस सुन रही हैं वो हट जाएं। 13 अप्रैल को पता चलेगा कि जस्टिस शर्मा इस केस में बनी रहती हैं या नहीं।