नई दिल्ली।भारत अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए कच्चा तेल और अपनी रसोई के लिए कुकिंग ऑयल के भारी-भरकम आयात बिलों से जूझ रहा है।केंद्र सरकार ने शुक्रवार को डीजल और पेट्रोल की कीमतों में इजाफा कर तेल कंपनियों को कुछ राहत दी है।बरहाल सामान्य धारणा यही है कि कच्चा तेल हमारी सबसे बड़ी समस्या है,लेकिन गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि असली चुनौती हमारी रसोई में छिपी है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दोनों तरह के ऑयल पर बचत करने की अपील की थी।
तेल के आयात बिल में इजाफा
मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में भारत ने कच्चे तेल पर 121.8 अरब डॉलर खर्च किए। हम अपनी जरूरत का 88 फीसदी कच्चा तेल आयात करते हैं।वहीं कच्चे तेल के मुकाबले खाद्य तेल पर भारत को ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ी। भारत ने खाद्य तेल पर 17.59 अरब डॉलर (करीब 1.61 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए। हम अपनी जरूरत का 60 फीसदी खाद्य तेल आयात करते हैं।
भारत का कच्चे तेल पर प्लान
कच्चा तेल एक कठिन समस्या है,लेकिन भारत ने पिछले तीन सालों में इसके समाधान के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार कर लिया है। 2019-20 में रूस से आयात मात्र 1.7 फीसदी था,जो 2024-25 तक बढ़कर 35.1 फीसदी हो गया।भारत ने पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच चतुराई से रूसी तेल खरीदकर अपने बिल को नियंत्रित किया।भारत के पास विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार हैं।वहीं भारत अब अमेरिका,सऊदी अरब और रूस के बीच मोलभाव करने की स्थिति में है।
खाद्य तेल क्यों है कठिन समस्या
कच्चा तेल कहीं से भी लिया जा सकता है,लेकिन पाम ऑयल के लिए हम इंडोनेशिया/मलेशिया,सोया तेल के लिए अर्जेंटीना/ब्राजील और सूरजमुखी तेल के लिए यूक्रेन/रूस पर ही निर्भर हैं।इंडोनेशिया अपने पाम ऑयल का बड़ा हिस्सा खुद के बायोडिजल (B40 और भविष्य में B50) प्रोग्राम में इस्तेमाल कर रहा है।यानी दुनिया में निर्यात के लिए तेल कम होता जा रहा है।रुपये की कमजोरी भी बड़ी समस्या है।रुपया लगभग 96 के रेकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।कुकिंग ऑयल का बिल डॉलर में चुकाया जाता है,जिससे आयात और महंगा हो गया है।
भारत में बढ़ रही है खाद्य तेल की खपत
भारत में खाद्य तेल की खपत बढ़ रही है।पिछले 60 सालों में भारत की प्रति व्यक्ति तेल खपत 3.2 किलो से बढ़कर 19.7 किलो हो गई है। यह शरीर की हेल्थ के हिसाब से लगभग दोगुना है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद प्रति व्यक्ति सालाना 10 किलो तेल की सलाह देता है।
सरकार का क्या है प्लान
भारत ने इस चुनौती से निपटने के लिए कमर कस ली है। खाद्य तेल में साल 2030-31 तक 72 फीसदी आत्मनिर्भरता हासिल करना लक्ष्य है। वहीं 21,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ सरसों,मूंगफली और सोयाबीन के उत्पादन को 39 मिलियन टन से बढ़ाकर 69.7 मिलियन टन करना है। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती मानसून की है। भारत का 76 फीसदी तिलहन क्षेत्र मानसून पर निर्भर है और 2026 का मानसून सामान्य से कम रहने का अनुमान है।