दिल्ली में न‌ई निर्भया के साथ चलती बस में हुआ गैंगरेप, इलाज ना कराने की रुला देगी उसकी मजबूरी
दिल्ली में न‌ई निर्भया के साथ चलती बस में हुआ गैंगरेप, इलाज ना कराने की रुला देगी उसकी मजबूरी

14 May 2026 |   23



 

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 की रात वसंत कुंज इलाके में सड़क पर चलती एक बस में निर्भया के साथ दरिंदगी हुई थी।निर्भया के साथ हुई दरिंदगी से पूरे देश हिला गया था। लगभग 14 साल बाद एक बार फिर राजधानी दिल्ली की हमेशा व्यस्त रहने वाली सड़कों पर 30 वर्षीय एक नई निर्भया के साथ उसी तरह घटना को अंजाम दिया गया है। गनीमत है कि पीड़िता की जान बची है,लेकिन वह जिस तरह दरिंदगी का शिकार हुई और खून से लथपथ हालत में बस से फेंके जाने के बाद भी अस्पताल में इलाज ना करा सकी, उसकी दशा और मजबूरियां रुलाने वाली हैं।

रानीबाग इलाके की घटना

यह घटना सोमवार रात राजधानी दिल्ली के रानीबाग इलाके में घटी।पीतमपुरा की झुग्गियों में गरीबी और बीमारी की मजबूरियों से संघर्ष कर रही 30 वर्षीय पीड़िता 3 बच्चों की मां है।पति टीबी का मरीज है और काम पर नहीं जा पाता है। ऐसे में पीड़िता एक फैक्ट्री में घंटों मेहनत कर किसी तरह बच्चों के भोजन और पति की दवा का इंतजाम कर पाती है। वह देर रात तक फैक्ट्री में काम करने के बाद घर जाने के लिए निकली थी।सरस्वती विहार में बी-ब्लॉक बस स्टैंड के पास पहुंची,तो उसने एक आरोपी को बस के दरवाजे के पास खड़ा देखा और उससे समय पूछा। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर उसे बस के अंदर खींच लिया और उसके साथ गैंगरेप किया।

चलती बस में 2 घंटे तक दरिंदगी,खून से लथपथ हालत में फेंका

एसी बस के बंद शीशों और पर्दों के पीछे लगभग दो घंटे तक पीड़िता को हवस का शिकार बनाया गया। बारी-बारी से दो आरोपी उसके साथ रेप करते रहे। इस दौरान बस सात किलोमीटर तक सड़क पर चलती रही। रात के लगभग 2 बजे चुके थे और पीड़िता जुल्म सहते हुए बदहवास हो चुकी थी। आरोपियों ने हवस मिटाने के बाद पीड़िता को चलती बस से नीचे फेंक दिया और फरार हो गए। खून से लथपथ हो चुकी पीड़िता ने पुलिस को सूचना दी।

क्यों अस्पताल में नहीं रही भर्ती

मौके पर पहुंची एक महिला सब-इंस्पेक्टर पीड़िता को बाबासाहेब अंबेडकर अस्पताल ले गईं। मेडिकल जांच में गैंगरेप की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने पीड़िता की गंभीर हालत को देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू की,लेकिन पीड़िता ने अपनी मजबूरियां बताते हुए कहा कि वह अस्पताल में नहीं रह सकती है। उसे हर हाल में घर जाना ही होगा। पीड़िता ने कहा कि उसके पति को टीबी है और वे घर पर ही रहते हैं। 8, 6 और 4 साल है के तीन छोटे बच्चे हैं। पीड़िता ने कहा कि यदि वह अस्पताल में भर्ती रही तो बच्चों को खाना और पति को दवा कौन देगा, उसने असहनीय दर्द के बावजूद घर जाने की इजाजत मांगी और कहा कि वह घर पर रहकर ही दवा कराएगी।

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