दिल्ली में आर्टिफिशियल बारिश की फिर तैयारी,आईआईटी कानपुर कर रहा समीक्षा,पिछला ट्रायल हुआ था फेल
दिल्ली में आर्टिफिशियल बारिश की फिर तैयारी,आईआईटी कानपुर कर रहा समीक्षा,पिछला ट्रायल हुआ था फेल

03 Apr 2026 |   11



 

नई दिल्ली।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस बार गर्मी के दौरान एकबार फिर क्लाउड-सीडिंग के जरिए आर्टफिशियल बारिश करने की तैयारी शुरू हो ग‌ई है।बीते साल अक्टूबर में क्लाउड सीडिंग ट्रायल किए गए थे,लेकिन सफलता नहीं मिली थी। आईआईटी कानपुर ने एक बयान में बादलों में नमी के निम्न स्तर को कारण बताया था।दिल्ली पर्यावरण विभाग और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) कानपुर के बीच 25 सितंबर 2025 को एक समझौता हुआ था,इसके बाद ये ट्रायल किया गया था।

बीते दो ट्रायल से प्लानिंग पहले से और मजबूत 

आईआईटी कानपुर ने कहा है कि बीते दो ट्रायल से उनकी प्लानिंग पहले से और मजबूत हुई है और क्लाउड सीडिंग के लिए किस तरह का मौसम और परिस्थितियां चाहिए होती हैं इसका पता लगाने में मदद मिली है।

पिछले ट्रायल से मिले परिणाम की समीक्षा

एक अधिकारी ने बताया कि आईआईटी कानपुर ने एक और ट्रायल के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से अनुमति मांगी है।आईआईटी कानपुर पिछले ट्रायल से मिले परिणाम की समीक्षा कर रहा है,जिसके बाद इस गर्मी में एक और ट्रायल की योजना बनाई जा सकती है,हालांकि फाइनल टाइम आईआईटी कानपुर द्वारा ही तय किया जाएगा।समीक्षा रिपोर्ट को दिल्ली सरकार के साथ साझा किया जाएगा।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी जिक्र

23 मार्च को जारी राजधानी दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी बताया गया है कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के परामर्श से क्लाउड सीडिंग के और ज्यादा ट्रायल किए जाएंगे। सर्वेक्षण में कहा गया है कि आर्टफिशियल बारिश के जरिए हवा में मौजूद प्रदूषण के कण को खत्म किया जा सकता है।

जानें क्या है क्लाउड-सीडिंग

बता दें कि क्लाउड सीडिंग मौसम में बदलाव करने की एक तकनीक है,इसे बादलों से बारिश होने की संभावना बढ़ाने के लिए बनाया गया है।इसमें सिल्वर आयोडाइड और अन्य केमिकल को बादलों में फैलाया जाता है,ताकि बादलों के अंदर हलचल पैदा हो और बारिश की बूंदें बनने लगें। पिछले साल हुए ट्रायल में सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड वाले आठ केमिकल फ्लेयर्स बादलों में छोड़े गए थे।

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