पेट्रोल-डीजल की बढ़ी खपत, एलपीजी की मांग 12% घटी
पेट्रोल-डीजल की बढ़ी खपत, एलपीजी की मांग 12% घटी

02 Nov 2026 |   29



 

नई दिल्ली।भारत में अक्टूबर के दौरान पेट्रोल और डीजल की खपत में वृद्धि दर्ज की गई तो वहीं एलपीजी की मांग में भारी गिरावट आई।पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में पेट्रोल की खपत सालाना आधार पर 3.11 प्रतिशत बढ़कर 37.7 लाख टन हो गई।डीजल की बिक्री 11.69 प्रतिशत बढ़कर 85.1 लाख टन पर पहुंच गई। इसके उलट एलपीजी की खपत 12.11 प्रतिशत घटकर 26.4 लाख टन रह गई।

अक्टूबर में एटीएफ की खपत घटी

अक्टूबर में विमान में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की मांग में भी गिरावट आई।इसकी खपत पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 1.34 प्रतिशत घटकर 7.62 लाख टन रह गई। हालांकि अप्रैल से अक्टूबर के दौरान एटीएफ की कुल खपत 0.28 प्रतिशत बढ़कर 52 लाख टन रही।

क्यों घट रही है एलपीजी की मांग

भारत में एलपीजी की खपत में गिरावट का एक प्रमुख कारण मिडिल ईस्ट में जारी संकट और आयात से जुड़ी मुश्किलें हैं। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसके अलावा एलपीजी की सप्लाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फरवरी के आखिर से मिडिल ईस्ट में जारी संकट से होर्मुज से होने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है,इससे एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव पड़ा है।

केंद्र सरकार रसोई गैस पर निर्भरता कम करने के लिए उठा रही  कदम 

केंद्र सरकार रसोई गैस पर निर्भरता कम करने के लिए कदम उठा रही है। इसके तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को पाइप के जरिए घरों तक नेचुरल गैस पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।साथ ही,जहां पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध हैं,वहां एलपीजी उपभोक्ताओं को पाइप वाली गैस अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।सप्लाई में दिक्कतों और पीएनजी की ओर उपभोक्ताओं को ट्रांसफर करने की कोशिशों के बीच हाल के महीनों में एलपीजी की खपत में तेज गिरावट देखने को मिली है।

अप्रैल से अक्टूबर के बीच एलपीजी की खपत 14.5% घटी

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर 2026 के दौरान भी पेट्रोल और डीजल की खपत बढ़ी,जबकि एलपीजी की मांग में गिरावट जारी रही।

PPAC के आंकड़े

पेट्रोल की खपत 6.53 प्रतिशत से बढ़कर 2.647 करोड़ टन हो गई,जो पिछले साल की समान अवधि में इससे कम थी।डीजल की मांग 5.91 प्रतिशत बढ़कर 5.644 करोड़ टन पर पहुंच गई। एलपीजी की खपत 14.52 प्रतिशत घटकर 1.631 करोड़ टन रह गई। पिछले साल इसी अवधि में यह 1.909 करोड़ टन थी।एविएशन टर्बाइन फ्यूल की खपत 0.28 प्रतिशत से बढ़कर 52 लाख टन हो गई।

क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े

अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि देश में परिवहन से जुड़े फ्यूल की मांग मजबूत बनी हुई है।पेट्रोल और डीजल की खपत में बढ़ोतरी इसका संकेत देती है।दूसरी ओर एलपीजी की खपत में लगातार गिरावट रसोई गैस की सप्लाई में आ रही चुनौतियों और पीएनजी की ओर बढ़ते बदलाव को दिखाती है। आने वाले महीनों में एलपीजी की खपत का ट्रेंड काफी हद तक मिडिल ईस्ट के हालात,आयात की उपलब्धता और घरेलू स्तर पर पीएनजी कनेक्शन के विस्तार पर निर्भर करेगा।

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