दीवाली से पहले व्यापारियों की बढ़ी धड़कनें,1 नवंबर को राहुल गांधी की रैली से दांव पर लगा 12000 करोड़ का कारोबार
दीवाली से पहले व्यापारियों की बढ़ी धड़कनें,1 नवंबर को राहुल गांधी की रैली से दांव पर लगा 12000 करोड़ का कारोबार

30 Oct 2026 |   24



 

नई दिल्ली।दीवाली से पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कारोबारियों में चिंता काफी बढ़ गई है।दिल्ली के प्रमुख व्यापार संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा है।पत्र में मांग की गई है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा 1 नवंबर को रामलीला मैदान में बुलाई गई मेगा रैली को दीवाली के बाद तक के लिए टाल दिया जाए। 

राहुल क्यों कर रहे हैं रैली

1 नवंबर को राहुल गांधी ने महारैली निकालने का ऐलान किया है। राहुल गांधी केंद्र सरकार और वोट चोरी के खिलाफ ये रैली निकाल रहे हैं।राहुल की इस रैली में करीब 10 लाख लोगों और 15000-20000 गाड़ियों के आने की संभावना है। ऐसे में व्यापारियों का कहना है कि अगर इस समय सेंट्रल दिल्ली में भारी भीड़ उमड़ी,तो राजधानी के 20 बड़े बाजारों का 10-12 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है।

सीटीआई को किस बात की चिंता

इस साल 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दीवाली है। 1 नवंबर का दिन त्योहारी सीजन की खरीदारी और ट्रांसपोर्टेशन के लिहाज से सबसे व्यस्त दिनों में से एक होता है।ऐसे में सीटीआई ने सवाल उठाया है कि 15,000 से 20,000 गाड़ियों को कहां पार्क किया जाएगा।रामलीला मैदान में 200 बड़ी बसों को भी पार्क करने की ढंग से जगह नहीं है। सीटीआई अध्यक्ष बृजेश गोयल ने साफ किया कि वे रैली के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि दिवाली के इस महत्वपूर्ण समय में व्यापारियों को रोजगार को बचाने की गुहार लगा रहे हैं।कहा कि अगर सेंट्रल दिल्ली में लॉकडाउन जैसी स्थिति बन गई, तो बाजारों तक धनतेरस का सामान कैसे पहुंचेगा।

इन बाजारों पर पड़ेगा असर

व्यापारियों का कहना है कि रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले लगभग 20 थोक और खुदरा बाजार बुरी तरह से प्रभावित होंगे।इनमें चांदनी चौक,सदर बाजार, कनॉट प्लेस,पालिका बाजार,जनपथ,भागीरथ प्लेस,खारी बावली,कश्मीरी गेट,नया बाजार,चवड़ी बाजार,किनारी बाजार,दरियागंज,करोल बाग,गफ्फार मार्केट और अजमेरी गेट आदि शामिल हैं।

बता दें कि ट्रांसपोर्टरों ने अभी से बाजारों में गाड़ियां भेजने से हाथ खड़े करना शुरू कर दिया है।व्यापारियों का तर्क है कि 10 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर सिर्फ 5 से 7 हजार लोग जुटे थे,तब भी सेंट्रल दिल्ली 8 घंटे तक जाम रही थी। ऐसे में 10 लाख लोगों के आने से क्या हाल होगा, इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है।

व्यापारियों ने रखीं दो मांग

त्योहारी सीजन के बीच राहुल गांधी की रैली को देखते हुए कारोबारियों ने अपने पत्र में सोनिया गांधी से दो मांगे रखीं। सीटीआई का कहना है कि इस महारैली को 10 नवंबर तक के लिए टाल दिया जाए और उसके बाद कभी भी आयोजित किया जाए। साथ ही अगर 1 नवंबर की तारीख बदलना मुमकिन नहीं है तो रैली की जगह बदलकर बुराड़ी मैदान कर दी जाए।

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