प्याज की कीमतों में 108% का उछाल,चीनी, तेल और चावल भी महंगे
प्याज की कीमतों में 108% का उछाल,चीनी, तेल और चावल भी महंगे

30 Oct 2026 |   25



 

नई दिल्ली।देश में खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के घर का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। सितंबर में प्याज की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।वहीं चीनी,खाने का तेल और चावल भी महंगे हुए हैं। महंगाई का असर शहरों के मुकाबले गांवों में ज्यादा दिखाई दे रहा है। सरकार की अक्टूबर मंथली इकोनॉमिक रिव्यू रिपोर्ट में महंगाई को लेकर कई अहम आंकड़े सामने आए हैं।

सितंबर में कितनी बढ़ी महंगाई

रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पहुंच गई,जो अगस्त के मुकाबले 0.71 प्रतिशत अंक ज्यादा है। वहीं खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई।महंगाई बढ़ने से लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में इसका असर ज्यादा देखने को मिला है।

गांवों में शहरों से ज्यादा महंगाई

सितंबर में ग्रामीण इलाकों की खुदरा महंगाई दर 6.08 प्रतिशत रही,जबकि शहरी इलाकों में यह 4.88 प्रतिशत दर्ज की गई।खाने-पीने की चीजों की महंगाई में भी यही अंतर दिखाई दिया। गांवों में खाद्य महंगाई दर 8.06 प्रतिशत रही, जबकि शहरों में यह 7.18 प्रतिशत थी। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि ग्रामीण परिवारों के कुल खर्च में खाने-पीने की चीजों की हिस्सेदारी ज्यादा होती है।

प्याज 108% महंगा,चीनी और तेल के दाम भी बढ़े

रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर 108 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा चीनी की कीमतें 30 प्रतिशत और गुड़ की कीमतें 23 प्रतिशत बढ़ीं।वहीं रिफाइंड तेल 15 प्रतिशत,मूंगफली का तेल 14 प्रतिशत और चावल 8 प्रतिशत महंगा हुआ। जरूरी चीजों की कीमतों में इस बढ़ोतरी ने परिवारों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है।

आखिर क्यों बढ़ रही हैं कीमतें

प्याज महंगा होने की बड़ी वजह सप्लाई में कमी है। रबी सीजन की पुरानी फसल का स्टॉक घट रहा है, जबकि खरीफ की नई फसल बाजार में पहुंचने में करीब एक महीने की देरी हुई है।चीनी की कीमतें बढ़ने के पीछे गन्ने का कम उत्पादन है। ज्यादा बारिश और रेड रॉट बीमारी से फसल प्रभावित हुई है। त्योहारों से पहले बढ़ती मांग और वैश्विक स्तर पर चीनी की सीमित सप्लाई ने भी दबाव बढ़ाया है।वहीं खाड़ी देशों से भारतीय चावल की बढ़ती मांग के कारण इसकी कीमतों पर भी असर पड़ा है।

थोक महंगाई भी बढ़ी,आगे क्या होगा

सितंबर में थोक महंगाई दर अगस्त के 9.92 प्रतिशत से बढ़कर 11.39 प्रतिशत पहुंच गई। ईंधन और बिजली की थोक महंगाई 25.85 प्रतिशत रही, जबकि मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर 9.76 प्रतिशत दर्ज हुई।रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक भी सालाना आधार पर 5.8 प्रतिशत बढ़ा है। अगर खाने-पीने की चीजों और थोक कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो आने वाले समय में महंगाई को काबू करना और मुश्किल हो सकता है। फिलहाल इसका सबसे ज्यादा दबाव ग्रामीण परिवारों पर दिखाई दे रहा है।

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