ब्यूरो धीरज कुमार द्विवेदी
लखनऊ।सूबे की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में तीन मंजिला बिल्डिंग में सोमवार दोपहर आग लगने से 15 लोगों ने जान गंवाई।बिल्डिंग एक डेथ ट्रैप बन गई क्योंकि इसमें आने-जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था।इस रास्ते में एयर-कंडीशनिंग पैनल,उलझे हुए तार और दूसरे उपकरण लगे हुए थे,जिससे आग फैलने पर अंदर फंसे लोगों के लिए बाहर निकलने के लिए बहुत कम जगह बची थी।बिल्डिंग में धुआं बाहर निकालने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी।आग लगने के बाद पूरी बिल्डिंग और कमरों में धुआं भर गया,जिससे ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने से हुई।
बता दें कि इस अग्निकांड में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की जांच में 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी पाए गए हैं। एलडीए उपाध्यक्ष ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी है।दोषियों में पांच जोनल अधिकारी सहित कुल 18 इंजीनियर और संबंधित अधिकारी शामिल बताए गए हैं,इससे पहले एलडीए एक जूनियर इंजीनियर और एक असिस्टेंट इंजीनियर को निलंबित कर चुका है।
बिल्डिंग का हो रहा था गलत इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि बिल्डिंग का मैप आवासीय उपयोग के लिए अप्रूव कराया गया था।अप्रूव हुए मैप के उलट बिल्डिंग का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।जांच में यह भी सामने आया है कि साल 2016 में अवैध निर्माण के खिलाफ जारी ध्वस्तीकरण आदेश बाद में निरस्त कर दिया गया था।रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव ने ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त किया था।
लापरवाहियों का खुलासा
एफआईआर के मुताबिक बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे,आकस्मिक स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई वैकल्पिक या इमरजेंसी एग्जिट नहीं था,बिल्डिंग में आने-जाने के लिए सिर्फ एक मेन एंट्रेंस और एग्जिट रास्ता था, बिजली की वायरिंग और विद्युत उपकरण भी असुरक्षित तरीके से लगाए गए थे,बिल्डिंग के अंदर एसी के आउटर यूनिट और अन्य उपकरण सुरक्षा मानकों के विपरीत स्थापित थे,अग्निशमन और एनडीआरएफ टीम को रेस्क्यू के दौरान दीवार काटकर अंदर प्रवेश करना पड़ा।जांच में माना गया है कि बिल्डिंग संचालकों और जिम्मेदार लोगों को संभावित खतरे की जानकारी होने के बावजूद सुरक्षा उपाय नहीं किए गए।
बता दें कि सूबे की राजधानी लखनऊ में हुए इस अग्निकांड के बाद सवाल खड़े हुए हैं कि रिहायशी इलाके में कमर्शियल, बॉक्स जैसी इमारत कैसे चल रही थी।लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारी इस बात को लेकर जांच कर रहे हैं कि रिहायशी इलाके में रहने के मकसद से अप्रूव की गई इमारत का इस्तेमाल कमर्शियल गतिविधियों के लिए कैसे होने लगा।