जयंत चौधरी कल सपा के गढ़ में भरेंगे हुंकार,जानें किन सीटों पर निगाह
जयंत चौधरी कल सपा के गढ़ में भरेंगे हुंकार,जानें किन सीटों पर निगाह

03 Jun 2026 |   19



 

 

मुरादाबाद।भारतीय जनता का सहयोगी दल राषटीय लोकदल ने अपनी सियासी जमीन बनानी शुरू कर दी है।कल गुरुवार को केंद्रीय मंत्री रालोद मुखिया जयंत चौधरी ठाकुरद्वारा में होने वाली रैली में समाजवादी पार्टी के गढ़ में हुंकार भरेंगे।रालोद की उन सीटों पर निगाह है,जहां भाजपा अर्से से जीत के लिए तरस रही है।रालोद की निगाह ठाकुरद्वारा के अलावा कांठ और मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर भी है।परिणाम क्या होंगे,किस तरह के समीकरण सामने आएंगे यह समय तय करेगा,लेकिन रालोद के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त जोश  है।

पार्टी के मुखिया जयंत चौधरी की रैली को लेकर रालोद के प्रदेश स्तरीय नेता और योगी कैबिनेट में मंत्री अनिल कुमार भी सघन जनसंपर्क में जुटे हैं।रालोद वहां गुंजाइश ढूंढ रही है कि जहां भाजपा को भी किसी तरह का ऐतराज नहीं होगा। 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद सपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल हो गई और जयंत केंद्रीय मंत्री बन गए।

रालोद नेताओं का कहना हैं कि मुरादाबाद से चौधरी चरण सिंह और अजित चौधरी का गहरा नाता रहा है।अब उसी परिपाटी को पार्टी मुखिया जयंत चौधरी आगे बढ़ाने आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री एवं रालोद के मुखिया जयंत चौधरी की चार जून को मुरादाबाद में बड़ी रैली क्या गुल खिलाएगी अभी कहना मुश्किल है,लेकिन सियासी हलकों में चर्चा का विषय है। भाजपा को पिछले चुनाव में छह में सिर्फ मुरादाबाद नगर सीट मिली थी।भाजपा कुंदरकी उप चुनाव में जीती थी।चार सीटें सपा के पास हैं।

जयंत चौधरी की इस रैली के कई निहितार्थ हैं। जयंत चौधरी रालोद के मूल मतदाताओं को बताना चाहते हैं कि रालोद अभी किस तरह से सक्रिय होकर अपने कार्यकर्ताओं के लिए काम कर रही है।रालोद के स्थानीय नेताओं के अलावा पार्टी में यूपी के बड़े नेता भी सफल बनाने के लिए ताकत झोंक चुके हैं।रालोद के कोटे से मंत्री बने अनिल कुमार प्रभारी मंत्री हैं। वह सरकार के प्रतिनिधि के रूप में अक्सर आते हैं।नया एपीसोड इसमें जुड़ा है पूर्व विधायक विजय यादव के रूप में। 2007 में विजय यादव बसपा के टिकट से ठाकुरद्वारा से चुनाव लड़े और जीते। इसे दूरगामी सियासत से जोड़ कर देखा जा रहा है। भाजपा की जीत में कठिन मानी जाने वाली एक सीट पर गठबंधन के समीकरण बिठाने की कोशिश है।

रालोद की निगाह ठाकुरद्वारा के अलावा कांठ और मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर भी है,जहां रालोद अपना परंपरागत वोट भी मानती है।भले ही रालोद यहां जीती नहीं,लेकिन रालोद के नेताओं की सोच है कि भाजपा लगातार हारी सीटों पर रालोद के प्रत्याशी को अवसर दे सकती है। सपा के गढ़ में भाजपा रालोद दोनों के लिए बंजर भूमि पर हो सकता है। रालोद के हैंडपंप से विजय श्री का जल निकले इस उम्मीद के साथ उत्साह चरम पर है। इसमें भाजपा और रालोद मिलकर अंजाम देने की जुगत में हैं। सीट कौन सी होगी अभी कहा नहीं जा सकता।

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