ब्यूरो धीरज कुमार द्विवेदी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ने अपने परिसर में बने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।केजीएमयू के संबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख विज्ञान संकाय द्वारा जारी पत्र के मुताबिक परिसर के व्यापक अवलोकन के दौरान 8 अवैध मजारें चिह्नित की गई हैं।
केजीएमयू प्रशासन के मुताबिक सितंबर 2024 में उच्चतम न्यायालय द्वारा महिला स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।इन निर्देशों के अनुपालन में केजीएमयू परिसर का निरीक्षण किया गया, जिसका उद्देश्य महिला चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षित एवं व्यवस्थित कार्य-परिसर सुनिश्चित करना था।निरीक्षण के दौरान परिसर में शाहमीना साहब की दरगाह एवं हसनैन साहब की मजार के अतिरिक्त 6 अन्य मजारें पाई गईं।
पत्र में कहा गया है कि इन मजारों में प्रयुक्त ईंट,टाइल्स एवं निर्माण सामग्री के आधार पर यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि इनका निर्माण पिछले कुछ वर्षों के भीतर किया गया है।
केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि ये मजारें मरीजों के आवागमन मार्ग में स्थित हैं,जिससे विशेष कर गंभीर मरीजों के आवागमन में बाधा उत्पन्न होती है।इसके साथ ही इन स्थलों पर कुछ ऐसी गतिविधियां भी देखी गईं,जो सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त नहीं पाई गईं।
इस मामले में केजीएमयू प्रशासन ने नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिट पिटीशन सिविल नंबर 295 ऑफ 2022, इन री: डायरेक्शन्स इन द मैटर ऑफ डेमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर्स के अंतर्गत अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया।इसी क्रम में 22 जनवरी 2026 को संबंधित मजारों के संभावित संचालकों को पहला नोटिस जारी किया गया था।नोटिस की प्रति संबंधित मजारों पर चस्पा कराई गई और इसकी सूचना ई-मेल एवं हार्ड कॉपी के माध्यम से जिलाधिकारी लखनऊ को भी प्रेषित की गई।
केजीएमयू के जनसंपर्क अधिकारी केके सिंह द्वारा द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक नोटिस के जवाब में 5 मजारों के संबंध में कोई भी व्यक्ति अथवा प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। केवल एक मज़ार की ओर से एक अधिवक्ता द्वारा उत्तर प्रस्तुत किया गया,किंतु उसमें किसी समिति अथवा संचालक का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई परिसर में मरीजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने और महिला कर्मियों सहित सभी के लिए सुरक्षित माहौल बनाने के उद्देश्य से की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में केजीएमयू आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए अवैध निर्माणों को हटाने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।अब मामले में अगली कार्रवाई के लिए कानूनी राय ली जा रही है, ताकि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए अतिक्रमण को हटाया जा सके।