कच्चा तेल नहीं रहा खलनायक,आम आदमी पर यहां से बड़ा खतरा मंडरा रहा है:धनंजय सिंह 
कच्चा तेल नहीं रहा खलनायक,आम आदमी पर यहां से बड़ा खतरा मंडरा रहा है:धनंजय सिंह 

19 Jun 2026 |   34



 

लखनऊ।अमेरिका और ईरान में शांति समझौते के बाद आखिरकार होर्मुज स्ट्रेट खुल गया है।अमेरिका और ईरान में युद्ध से अर्थशास्त्री लगातार ये चेतावनी देते हुए नजर आ रहे थे कि ये संघर्ष महंगाई के लिहाज से बड़ा खतरा बन जाएगा।हुआ भी ऐसा। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से विश्व में गहराए तेल-गैस संकट से पेट्रोल-डीजल,एलपीजी तक सब महंगी भी हुई। ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ी तो महंगाई ने छलांग लगा दी। कच्चे तेल की कीमतो में आए उछाल से ये सब हुआ।

अमेरिका और ईरान में शांति समझौते पर साइन हो गयी है तो  कच्चा तेल भी खलनायक नहीं रहा। अमेरिका और ईरान के शांति समझौते के ऐलान के बाद से ही कच्चा तेल टूटता जा रहा है।इससे महंगाई का जोखिम भी कम हो गया है,क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से तेल की सप्लाई चेन से जुड़ी बाधाएं खत्म होती जा रही हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की बात करें तो भारत में खुदरा महंगाई दर मई में बढ़कर 3.93 प्रतिशत हो गई,ये अप्रैल में 3.48 प्रतिशत थी।फूड प्रोडक्ट्स की कीमतों में उछाल और पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मुख्य रोल निभाया।वहीं थोक महंगाई भी मई में 9.68 प्रतिशत तक पहुंच गई। आरबीआई ने भी ऊर्जा की बढ़ती लागत और ग्लोबल अनिश्चितता का हवाला देते हुए FY2027 के लिए अपने महंगाई दर के अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया‌।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जो कच्चा तेल लंबे समय तक 100-110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचकर विश्व को महंगाई की मार से डरा रहा था।अमेरिका-ईरान में शांति समझौता होने के ऐलान के साथ ही भरभराकर क्रैश हो गया और ब्रेंट क्रूड की कीमत फिसलकर 77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

कुछ सप्ताह पहले तक कच्चे तेल को लेकर महंगाई पर चर्चा हो रही थी,तो अब एक्सपर्ट का मानना ​​है कि कच्चा तेल नहीं बल्कि खलनायक कोई और है,इसका बड़ा खतरा हमारे घर के बहुत करीब उभर सकता है।आज भारत में महंगाई का सबसे बड़ा जोखिम तेल नहीं मानसून है।कमजोर मानसून अब भारत के लिए कच्चे तेल की तुलना में महंगाई का बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।कारण सीधा है कि भारत में महंगाई की कैलकुलेशन में पेट्रोल और डीजल से कहीं ज्यादा खाद्य पदार्थों का रोल रहता है।भारत की लगभग आधी एग्रीकल्चर लैंड बारिश पर निर्भर है,इसकी कमी से अनाज,दालों, सब्जियों,फलों और तिलहन के प्रोडक्शन में भारी कमी आ सकती है,इससे महंगाई दर में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है और घरेलू बजट गड़बड़ा सकता है।

साफ शब्दों में कहें तो कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महज ट्रांसपोर्टेशन को प्रभावित करती है,जबकि कम बारिश का सीधा असर उन रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है,जिन्हें लोग रोज खरीदते हैं।कमजोर मानसून का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव अधिकतर सब्जी बाजार और किराना स्टोर पर पड़ता है।सीधा सी बात है जब बारिश कम होती है, तो कृषि उत्पादन प्रभावित होता है,आपूर्ति कम हो जाती है और कीमतें बढ़ने लगती हैं।

कमजोर मानसून खासकर अल नीनो की स्थिति में खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों से घरेलू खर्चों में काफी बढ़ोतरी करता है।कम बारिश अधिकतर सब्जियों,दालों,खाद्य तेलों और दूध की महंगाई को दोहरे अंकों तक पहुंचा देती है। मिडिल क्लास के शहरी परिवार के लिए,इससे महीने के खर्च में 1,000 रुपये से 3,000 रुपये तक की बढ़ोतरी का अनुमान है,चूंकि निम्न आय वर्ग के परिवार अधिक संवेदनशील हैं, क्योंकि उनके खर्च का एक बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है।

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