जापान जैसा दोस्त हो तो नहीं रुकेगी भारत की गाड़ी,चाहे होर्मुज खुले या न खुले
जापान जैसा दोस्त हो तो नहीं रुकेगी भारत की गाड़ी,चाहे होर्मुज खुले या न खुले

20 Jun 2026 |   13



 

नई दिल्ली।भारत का एशिया में जापान एक बेहद शानदार दोस्त है।जापान भारत को कभी भी तकलीफ में नहीं डालता है,मुश्किल समय में भारत के साथ खड़ा नजर आया। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या हालिया अमेरिका-ईरान युद्ध से तेल और गैस की सप्लाई पर संकट आया तो भी जापान आगे बढ़कर भारत की मदद की। खास तौर पर लिक्विफा इड नेचुरल गैस की सप्लाई भारत को कम नहीं होने दी। बता दें कि बीते माह 28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट के जरिये खाड़ी देशों से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई तकरीबन ठप सी हो गई है।ऐसे में जापान जैसे सच्चे दोस्तों ने उम्मीद बढ़ा दी है।

अमेरिका से एल‌एनजी लाकर भर-भरकर भारत को बेचा

जापान ने अमेरिका से बड़ी मात्रा में एलएनजी लाकर भारत और चीन जैसे देशों को आपूर्ति कराई।एक नए एनालिसिस जीरो कार्बन एनालिटिक्स के मुताबिक 2020 और 2025 के बीच जापान ने एशियाई देशों को अमेरिका की लिक्विफाइड नेचुरल गैस दोबारा बेची।जापान अब दुनिया के सबसे बड़े एल‌एनजी ट्रेडर्स में से एक है।अमेरिका और एशियाई बाजारों के बीच जापान एक मध्यस्थ के तौर पर काम कर रहा है। जापान भारत,चीन,दक्षिण कोरिया,ताइवान,थाईलैंड,सिंगापुर, बांग्लादेश,पाकिस्तान और मलेशिया जैसे देशों को एल‌एनजी कार्गो दोबारा बेचता है। 2020 और 2025 के बीच जापान द्वारा खरीदी गई और दूसरे देशों को दोबारा बेची गई अमेरिकी एल‌एनजी का लगभग 31 प्रतिशत हिस्सा एशिया भेजा गया।

जापान ने खुद से ज्यादा दूसरों के लिए खरीदी एलएनजी

एनालिसिस से पता चलता है कि 2021 से जापान ने घरेलू इस्तेमाल के लिए आयात की गई मात्रा की तुलना में विदेशी बाजारों में ज्यादा अमेरिकी एल‌एनजी बेची।डेटा डेस्क‌ के मुताबिक 2021 और 2025 के बीच जापान की अमेरिकी एल‌एनजी की विदेशी बिक्री उसके घरेलू एल‌एनजी आयात से 77 प्रतिशत ज्यादा थी।

एल‌एनजी बाजार के विस्तार में जापान की अहम भूमिका

जापान में एल‌एनजी ट्रेडिंग में बढ़ोतरी और यूएस एल‌एनजी निर्यात का विस्तार एक साथ हुआ। 2023 में यूएस दुनिया का सबसे बड़ा एल‌एनजी निर्यातक बन गया और 2025 तक इस स्थिति को बनाए रखा। 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए एल‌एनजी निर्यात प्रोजेक्ट्स की मंजूरी पर लगी पिछली रोक हटा दी और जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में आपूर्ति के उद्देश्य से 44 बिलियन डॉलर के अलास्का एल‌एनजी प्रोजेक्ट को बढ़ावा दिया।

जापान तेजी से खरीद रहा एलएनजी

मई 2026 तक अमेरिकी सरकार ने लुइसियाना और टेक्सास में पांच नए एल‌एनजी टर्मिनलों और एक मौजूदा टर्मिनल से निर्यात को मंजूरी या दोबारा मंजूरी दे दी थी।साथ ही जापान ने लंबे समय के लिए एल‌एनजी की खरीद भी बढ़ाई है। जून 2025 में घरेलू मांग में गिरावट के बावजूद एनर्जी फॉर ए न्यू एरा ने यूएस एल‌एनजी आपूर्तिकर्ताओं के साथ कई 20-वर्षीय समझौते किए। मार्च 2026 में कई वर्षों के अतिरिक्त आपूर्ति अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए।

जापान से सबसे ज्यादा खरीद रहे द. कोरिया, चीन और भारत

दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों ने भी एल‌एनजी आयात बढ़ाया है। घरेलू गैस भंडार में कमी के कारण 2020 और 2024 के बीच थाईलैंड का एल‌एनजी आयात 100 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया।अप्रैल 2025 में थाईलैंड ने 15 वर्षों में 15 मिलियन मीट्रिक टन यूएस एल‌एनजी आयात करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। दक्षिण कोरिया,चीन और भारत ये तीन एशियाई देश जापान से दोबारा बेचे जाने वाले यूएस एल‌एनजी कार्गो के लिए जापान के दस सबसे बड़े गंतव्यों में शामिल थे।

63.5 बिलियन किलो CO2 का उत्सर्जन

जीरो कार्बन एनालिटिक्स के एनालिसिस के मुताबिक 5 साल में दोबारा बेची गई इस एलएनजी से अनुमानित 63.5 बिलियन किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उत्सर्जन हुआ,जो लगभग कोयले से चलने वाले 17 पावर प्लांट के सालाना उत्सर्जन के बराबर है।जीरो कार्बन एनालिटिक्स का यह एनालिसिस सेंटर फार रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर‌ और स्वतंत्र जांच समूह डेटा डेस्क के एल‌एनजी शिपमेंट डेटा पर आधारित है। इसमें प्रोडक्शन, लिक्विफैक्शन,शिपिंग,रीगैसिफिकेशन और कंबशन (जलाने) के चरणों में उत्सर्जन का अनुमान लगाया गया है।

किस चीज से कितना उत्सर्जन हुआ

रिपोर्ट का अनुमान है कि जापान के रीसेल कॉन्ट्रैक्ट के तहत अमेरिका में उत्पादित और एशियाई देशों को भेजी गई 16.5 बिलियन किलोग्राम एल‌एनजी से पूरी सप्लाई चेन में 63.5 बिलियन किलोग्राम CO2 का उत्सर्जन हुआ।कुल उत्सर्जन में दहन का हिस्सा सबसे ज्यादा 78 प्रतिशत था। उत्पादन और लिक्विफैक्शन का योगदान लगभग 16 प्रतिशत था, जबकि शिपिंग का हिस्सा 4.8 प्रतिशत और रीगैसिफिकेशन व वितरण का हिस्सा लगभग 0.5 प्रतिशत था।

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