तांबे की सप्लाई पर बड़ा संकट,नई खदान शुरू होने में लग रहे हैं 16 साल से ज्यादा
तांबे की सप्लाई पर बड़ा संकट,नई खदान शुरू होने में लग रहे हैं 16 साल से ज्यादा

21 Oct 2026 |   34



 

नई दिल्ली। विश्व में तांबे की सप्लाई बढ़ाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक नई तांबे की खदान को खोजने से लेकर उसमें उत्पादन शुरू करने तक अब औसतन 16 साल से ज्यादा समय लग रहा है।इस बीच 2030 से मौजूदा खदानों का उत्पादन घटने की आशंका है।रिपोर्ट के मुताबिक तांबे की नई खदानों की खोज कम हो रही है।अयस्क में तांबे की मात्रा घट रही है और खदान बनाने की लागत बढ़ रही है।ऐसे में कीमतें बढ़ने के बाद भी बाजार में तांबे की नई सप्लाई जल्दी बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।

नई खदान शुरू होने में क्यों लग रहे हैं 16 साल से ज्यादा

गोल्डमैन सैक्स के रिपोर्ट के मुताबिक अब तांबे की एक नई खदान को खोजने से लेकर उत्पादन शुरू करने तक का औसत समय 16 साल से ज्यादा हो गया है।रिपोर्ट में कहा गया है कि 1990 के दशक से तांबे की बड़ी नई खोजों में कमी आई है,इसके अलावा खासकर दक्षिण अमेरिका में खदानों से निकाले जाने वाले अयस्क में तांबे की मात्रा भी कम हुई है।नई परियोजनाएं दूर-दराज के इलाकों में भी स्थित हैं,इससे खदान बनाने,उसे चलाने और उस पर शुरुआती निवेश करने का खर्च बढ़ रहा है।

2030 से पुरानी खदानों का उत्पादन घटने का अनुमान

रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा तांबे की खदानों से उत्पादन 2030 से घटना शुरू हो सकता है।इसका मतलब है कि बाजार को एक तरफ मौजूदा खदानों से कम उत्पादन मिलने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।वहीं दूसरी तरफ नई खदानों से अतिरिक्त तांबा मिलने में लंबा समय लग सकता है। गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि तांबे की सप्लाई की यह समस्या केवल कुछ समय की नहीं, बल्कि लंबे समय से जुड़ी हुई है।

नई खदान बनाने की लागत में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी

गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक तांबे की खदान बनाने में लगने वाला औसत निवेश शुरुआती व्यवहार्यता जांच के चरण से उत्पादन शुरू होने तक करीब 50 प्रतिशत बढ़ जाता है।रिपोर्ट में इसके लिए प्रति टन क्षमता की लागत 10,600 डॉलर से बढ़कर 15,900 डॉलर बताई गई है,इसके अलावा रिपोर्ट में शामिल परियोजनाओं के लिए गोल्डमैन सैक्स की ओर से आंकी गई पूंजी लागत कंपनियों के अपने अनुमानों से 25 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक ज्यादा है।इससे पता चलता है कि नई खदानों को तैयार करने में कंपनियों को शुरुआती अनुमान से काफी ज्यादा पैसा लगाना पड़ सकता है।

तांबे की कीमत बढ़ने पर भी तुरंत नहीं बढ़ेगी सप्लाई

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक आज तांबे की कीमत बढ़ने से भी अगले कई सालों तक नई सप्लाई नहीं मिल पाएगी।रिपोर्ट में कहा गया है कि आज लिए गए निवेश के फैसले 2040 के दशक में तांबे की सप्लाई को प्रभावित कर सकते हैं।यानी अगर कंपनियां अभी नई खदानों और उत्पादन बढ़ाने वाली परियोजनाओं में निवेश करती हैं, तो उसका असर आने वाले लंबे समय में दिखाई दे सकता है।

तांबे की नई परियोजनाओं से 20 अरब डॉलर की वैल्यू जुड़ने का अनुमान

गोल्डमैन सैक्स ने तांबे का उत्पादन बढ़ाने वाली कई परियोजनाओं का भी आकलन किया है।रिपोर्ट के मुताबिक इन परियोजनाओं से मिलकर करीब 20 अरब डॉलर की शुद्ध संपत्ति वैल्यू जुड़ सकती है।साथ ही 2035 के आखिर तक हर साल करीब 10 लाख टन अतिरिक्त तांबे का उत्पादन संभव हो सकता है।

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