नई दिल्ली।विश्वभर में जारी जंग फिलहाल किसी के नियंत्रण में नहीं दिख रही है।हालात बेकाबू होते देख अब ग्लोबल पॉलिटिक्स में वो देखने को मिल रहा है,जिसकी पहले उम्मीद नहीं की जा रही थी।दरअसल रूस और अमेरिका के रिश्तों में संभावित नरमी के संकेत मिल रहे हैं,यही नहीं अमेरिका कुछ ऐसे कदम उठा रहा है,जिससे रूस को सीधा फायदा मिलेगा वहीं यूरोपीय देशों का गुस्सा बढ़ेगा।
अमेरिकी प्रशासन ने यूक्रेन की सेना के इस्तेमाल में आने वाली सैटेलाइट संचार सुविधा को सीमित करने का निर्देश दिया है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी पहल पर रूस को G20 की वित्तीय बैठकों में फिर से जगह मिली है,इससे पहले अमेरिका ने रूस पर लगे डीजल प्रतिबंधों में भी नरमी दी है।इससे संकेत मिलता है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का प्रशासन रूस के साथ बातचीत और संबंधों में नरमी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इसका असर केवल रूस-अमेरिका संबंधों तक सीमित नहीं है. इससे यूक्रेन युद्ध,यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों और ग्लोबल एनर्जी मार्केट बाजार की दिशा और उससे आगे दुनिया भर के बाजारों पर देखने को मिल सकता है।
हाल ही में यूक्रेन की सेना को मिलने वाली स्टारशील्ड की सेवाएं सीमित कर दी गई हैं।यूक्रेन की सेना युद्ध के दौरान संचार और ड्रोन ऑपरेशन के लिए स्पेसएक्स की सैन्य सैटेलाइट सेवा स्टारशील्ड का इस्तेमाल करती है।अमेरिकी अधिकारियों और मामले की जानकारी रखने वाले एक पश्चिमी अधिकारी ने बताया कि इस सेवा के इस्तेमाल को सीमित करने का निर्देश व्हाइट हाउस के भीतर से आया था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आदेश किस अधिकारी ने दिया था।
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक तेज गति से चलने वाले ड्रोन पर लगे सैटेलाइट रिसीवर के कामकाज में आई रुकावट से सैन्य अभियानों पर असर पड़ा है।बाद में यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि रिसीवर फिर से काम करने लगे थे, लेकिन ये 100 मील प्रति घंटे यानी करीब 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक ही सीमित थी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है,जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन पर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने का दबाव बना रहे हैं।ट्रंप ने ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर भी चिंता जताई है।
अमेरिका के निमंत्रण पर G20 की बैठक में लौटा रूस
रूस और अमेरिका के बीच संभावित नजदीकी का दूसरा संकेत बैंकॉक में हुई G20 की वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक से मिला। रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव ने इस बैठक में हिस्सा लिया। 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद G20 की बैठकों में रूस की व्यक्तिगत स्तर पर भागीदारी सीमित रही थी।अमेरिका,जो इस साल G20 की अध्यक्षता कर रहा है, ने रूस को वित्तीय वार्ताओं में वापस जगह दी।इस कदम से संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन रूस को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिर से शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
हालांकि यूरोपीय देशों ने इस पहल पर नाराजगी जताई है। जर्मनी के वित्त मंत्री लार्स क्लिंगबाइल ने कहा कि रूस को सामान्य G20 सदस्य की तरह वापस स्वीकार नहीं किया जा सकता, जबकि यूक्रेन के खिलाफ उसका युद्ध जारी है।बैठक किसी संयुक्त बयान के बिना समाप्त हुई,जिससे रूस के मुद्दे पर सदस्यों के बीच मतभेद साफ दिखाई दिए।
अमेरिकी प्रशासन ने रूसी डीजल के आयात पर प्रतिबंधों में अप्रैल तक अस्थायी छूट देने की पहल भी की है।इस कदम की यूक्रेन और यूरोपीय सहयोगियों ने आलोचना की है,इससे साफ है कि वॉशिंगटन की नीति में रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को लेकर नरमी के संकेत हैं, लेकिन इस पर पश्चिमी देशों के बीच सहमति नहीं है।
दोनों घटनाओं को साथ रखकर देखें तो ट्रंप प्रशासन की ओर से रूस के साथ तनाव कम करने और बातचीत के रास्ते खुले रखने की कोशिश के संकेत मिलते हैं।यूक्रेन की सैन्य संचार सुविधा पर कथित पाबंदी और G20 की बैठक में रूस की वापसी इस दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं।
फिलहाल सबसे अहम संकेत यह है कि ट्रंप प्रशासन रूस को अलग-थलग रखने के बजाय उसके साथ बातचीत और सीमित आर्थिक सहयोग के विकल्प तलाश रहा है,इस नीति से यूक्रेन और यूरोप के साथ अमेरिका के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है।आगे यह देखना अहम होगा कि क्या यह पहल युद्ध समाप्त करने के लिए किसी ठोस समझौते की ओर बढ़ती है या केवल कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर सीमित बदलाव तक रहती है।