नई दिल्ली।अमेरिका से लेकर जापान तक शेयर बाजारों में हाहाकार मचने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार बमबम बोल रहा है।गुरुवार को दलाल स्ट्रीट में जोरदार तेजी देखने को मिली।सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में लगभग 2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव बना रहा। बाजार में इस तेजी के पीछे दिग्गज शेयरों में खरीदारी,एआई शेयरों में दुनियाभर में बिकवाली और कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों से मिल रहे सकारात्मक संकेत प्रमुख वजह रहे।
कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 1500 अंक से अधिक उछलकर 73330 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया।वहीं एनएसई निफ्टी 50 लगभग 400 अंक से अधििक की छलांग के साथ 23056 के स्तर तक पहुंचा।इसके उलट बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स और बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 0.50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
शेयर बाजार में तेजी के 3 बड़े कारण
1.बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह ब्लू-चिप यानी बड़ी और मजबूत कंपनियों के शेयरों में खरीदारी रही। निवेशक मौजूदा वैल्यूएशन को अपेक्षाकृत आकर्षक मानते हुए बड़े शेयरों पर दांव लगा रहे हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों का रुझान मिडकैप और स्मॉलकैप की तुलना में बड़े शेयरों की ओर बढ़ा है।गुरुवार सुबह लगभग 10:50 बजे के करीब भारती एयरटेल,आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिसटेक, एचसीएल और टीसीएस सेंसेक्स की तेजी में प्रमुख योगदान देने वाले शेयरों में शामिल थे।
2.ग्लोबल मार्केट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े शेयरों में बिकवाली का दबाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान बदलने की संभावना है।गुरुवार को दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लगभग 8 फीसद तक टूट गया,जबकि ताइवान के शेयर बाजार में लगभग 4 फीसद की गिरावट आई। अमेरिका का नैस्डैक भी 2 प्रतिशत लुढ़क गया।एआई से जुड़े शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर बढ़ती चिंता के कारण एशियाई बाजारों में दबाव देखा गया। इसके बीच भारतीय बाजार में निवेश के वैकल्पिक अवसर तलाशने वाले विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद बढ़ सकती है।पिछले एक साल से भारतीय बाजार का प्रदर्शन कुछ प्रमुख एशियाई बाजारों की तुलना में कमजोर रहा है।इसकी एक वजह एआई और सेमीकंडक्टर से जुड़े शेयरों में भारत की सीमित हिस्सेदारी भी मानी जाती है।अब अगर एआई शेयरों में तेजी का दौर कमजोर पड़ता है और निवेशक दूसरे बाजारों की ओर रुख करते हैं, तो भारत को इसका फायदा मिल सकता है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की वास्तविक खरीदारी पर ही इस संभावना की पुष्टि होगी।
3.कंपनियों के वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजों की शुरुआत भी बाजार के लिए पॉजिटिव सिग्नल दे रही है। टीसीएस और एचसीएल टेक जैसी आईटी कंपनियों के नतीजों और कारोबारी संकेतों से निवेशकों को उम्मीद मिली है कि आईटी सेक्टर की स्थिति धीरे-धीरे सुधर सकती है। आईटी शेयरों में खरीदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निफ्टी आईटी इंडेक्स तीन लगातार कारोबारी सत्रों में, गुरुवार सहित, 9 फीसद से अधिक चढ़ गया।हालांकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का बढ़ा स्तर और विदेशी निवेशकों की बिकवाली अब भी बाजार के लिए जोखिम बने हुए हैं। इसके बावजूद निवेशक चुनिंदा शेयरों में गिरावट पर खरीदारी कर रहे हैं।
निवेशक अब क्या करें
बाजार में तेजी के बावजूद सभी शेयरों में समान रूप से खरीदारी नहीं दिख रही है। सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़त के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट यह संकेत देती है कि फिलहाल निवेशक चुनिंदा बड़े शेयरों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।आगे बाजार की दिशा तय करने में तीन बातें अहम रहेंगी। दूसरी तिमाही के नतीजे, विदेशी निवेशकों का रुख और वैश्विक बाजारों में एआई शेयरों की चाल। कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।