पांच महीने में चावल बेचकर भारत ने कमाए 22,864 करोड़, किसानों और निर्यातकों के लिए IREF का मास्टर प्लान तैयार
पांच महीने में चावल बेचकर भारत ने कमाए 22,864 करोड़, किसानों और निर्यातकों के लिए IREF का मास्टर प्लान तैयार

16 Oct 2026 |   33



 

नई दिल्ली।भारत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चावल के निर्यात के मामले में नंबर वन है।भारत की ग्लोबल सप्लाई में 40-45 फीसदी हिस्सेदारी है।भारत के चावल निर्यात से होने वाली कमाई में वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती 5 महीनों में अच्छी बढ़ोतरी हुई है।अप्रैल से अगस्त के दौरान चावल निर्यात से भारत को 45,739 रुपए करोड़ का रेवेन्यू मिला,ये पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 12.9 फीसदी ज्यादा है। इस बढ़ोतरी के बीच निर्यातकों के लिए सरकारी इन्सेंटिव योजनाओं,व्यापार समझौतों और विदेशों में बाजार तक पहुंच के मौकों पर ध्यान बढ़ गया है।

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के मुताबिक इस अवधि में बासमती चावल के निर्यात से 22,864 करोड़ रुपए की कमाई हुई,जो सालाना आधार पर 11.6 फीसदी अधिक है। वहीं, गैर-बासमती चावल के निर्यात से 22,874 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिला,जिसमें 14.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

भारत के चावल निर्यात पर उत्पादन,सरकारी खरीद और खाद्यान्न भंडार का भी असर पड़ेगा।अमेरिकी कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण भारत का चावल उत्पादन 2025-26 के लगभग 154 मिलियन टन से घटकर 2026-27 में 147 मिलियन टन रह सकता है।

IREF का मानना है कि सरकारी गोदामों में मौजूद चावल का बड़ा भंडार संभावित सप्लाई के दबाव को कम करने में मदद कर सकता है। सरकारी चावल स्टॉक 3.8 करोड़ टन से अधिक बताया गया है, जो अक्टूबर के लिए निर्धारित 1.025 करोड़ टन के बफर स्टॉक मानक से करीब चार गुना है।

USDA ने कैलेंडर वर्ष 2027 में भारत के चावल निर्यात का अनुमान लगभग 24 मिलियन टन लगाया है। इस लेवल को बनाए रखने के लिए डोमेस्टिक फूड सप्लाई, सरकारी खरीद और निर्यात की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।

भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026 का आयोजन 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा। सम्मेलन में 24 अक्टूबर को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक सरकारी योजनाओं, इन्सेंटिव और चावल एक्सपोर्ट के अवसरों पर स्पेशल सेशन होगा।

इस इवेंट के खास सेशन में केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं के लिए पात्रता, जरूरी दस्तावेज, आवेदन प्रक्रिया और इन्सेंटिव राशि प्राप्त करने के तरीकों पर चर्चा होगी। इसके अलावा एक्सपोर्ट लोन,बीमा,गारंटी और गोदाम की रसीद के आधार पर फाइनेंशिंग जैसे विषय भी शामिल होंगे।
निर्यातकों के लिए सस्ता वर्किंग कैपिटल लोन और समय पर वित्तीय सहायता महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे वे विदेशी खरीदारों के ऑर्डर समय पर पूरे कर सकते हैं और कारोबार की लागत नियंत्रित रख सकते हैं।

IREF के उपाध्यक्ष और आंध्र प्रदेश स्थित चावल निर्यातक कंपनी CLRK के निदेशक बिपिन अग्रवाल के मुताबिक गैर-बासमती चावल के निर्यातकों के लिए नीतियों में स्थिरता और प्रोत्साहन का समय पर मिलना विशेष रूप से जरूरी है। माल ढुलाई की लागत,आयात शुल्क और निर्यात नियमों में बदलाव का सीधा असर ऑर्डर से होने वाले मुनाफे पर पड़ता है। अफ्रीका और एशिया के कीमत-संवेदनशील बाजारों में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक कारोबारी योजनाओं के अनुकूल नीतियां जरूरी हैं।

BIRC 2026 राइस एक्सपोर्ट पॉलिसी वॉच तैयार करने का प्रस्ताव है। इसमें अगले 12 महीनों के दौरान भारत के चावल व्यापार को प्रभावित कर सकने वाली खास पॉलिसी बदलावों की पहचान की जाएगी। इसमें लागू नियमों, घोषित बदलावों, प्रस्तावित सुधारों और अभी बातचीत के स्तर पर मौजूद व्यापार समझौतों के बीच अंतर पर चर्चा की जाएगी।

इससे एक्सपोर्टर्स को बाजार तक पहुंच, कंप्लायंस लागत, फाइनेंस से जुड़ी जरूरतों और कारोबारी योजनाओं पर संभावित असर समझने में मदद मिल सकती है। सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य अफ्रीका, यूरोप और एशिया में भारतीय चावल के बाजार का विस्तार करना तथा प्रोसेसिंग, क्वालिटी सुधार और वैल्यू एडिशन चावल के प्रोडक्ट्स में इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देना है।

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