होर्मुज से तनाव घटने के संकेत,कच्चे तेल में आई नरमी,WTI 82 डॉलर के नीचे,लेकिन रूस-यूक्रेन तनाव सप्लाई की बढ़ा रहा है चिंता
होर्मुज से तनाव घटने के संकेत,कच्चे तेल में आई नरमी,WTI 82 डॉलर के नीचे,लेकिन रूस-यूक्रेन तनाव सप्लाई की बढ़ा रहा है चिंता

27 Aug 2026 |   144



 

नई दिल्ली।कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को हल्की नरमी दिखाई दे रही है।होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव कम होने के संकेतों से कीमतों पर दबाव बना है।हालांकि रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव और रूसी तेल सप्लाई पर खतरे की वजह से बड़ी गिरावट फिलहाल कम देखने को मिली है।
गुरुवार सुबह WTI क्रूड लगभग 0.5 फीसदी की गिरावट के साथ 82 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार कर रहा था। वहीं ब्रेंट क्रूड लगभग 86.60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। इस हफ्ते अब तक WTI की कीमत लगभग 6 फीसदी नीचे आ चुकी है।

होर्मुज को लेकर क्या बदला

कच्चे तेल की कीमतों पर सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी खबरों का पड़ रहा है। ईरान और ओमान के बीच होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर प्रगति के संकेत मिले हैं। इससे बाजार में उम्मीद बढ़ी है कि इस अहम समुद्री रास्ते से तेल की सप्लाई धीरे-धीरे बेहतर हो सकती है।

ईरानी सेना के मुताबिक...

ईरानी सेना के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ओमान के साथ रेवेन्यू शेयरिंग यानी कमाई बांटने का समझौता हुआ है।हालांकि ईरान ने साफ किया है कि इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज तुरंत पूरी तरह खुल जाएगा। इसके बावजूद बाजार इसे तनाव कम होने की दिशा में अहम संकेत मान रहा है।

बता दें कि होर्मुज विश्व में तेल की आवाजाही के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है।ऐसे में होर्मुज में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ती है तो बाजार में सप्लाई की चिंता कम होती है और इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई देता है।

ट्रंप के बयान से भी बढ़ी उम्मीद

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि मंगलवार को करीब 1 करोड़ बैरल तेल होर्मुज से बाहर निकला। ट्रंप के इस बयान से भी उम्मीद बढ़ी है कि होर्मुज से तेल की आवाजाही धीरे-धीरे बढ़ रही है। सैटेलाइट तस्वीरों से ऐसे संकेत भी मिले हैं कि सऊदी अरब फारस की खाड़ी के भीतर से तेल की लोडिंग बढ़ा सकता है। माना जा रहा है कि विश्व का सबसे बड़ा कच्चा तेल निर्यातक बदलते हालात के हिसाब से अपने एक्सपोर्ट रूट में बदलाव कर रहा है।

रूस-यूक्रेन तनाव ने क्यों संभाली कीमतें

एक तरफ होर्मुज को लेकर राहत की उम्मीद है,लेकिन दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों को ज्यादा गिरने से रोक रहा है।यूक्रेन की ओर से रूस की रिफाइनरियों और बंदरगाहों पर हमलों के कारण ईंधन उत्पादन और निर्यात प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। अगर रूस से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई में बड़ी रुकावट आती है तो ग्लोबल मार्केट में सप्लाई फिर घट सकती है।इसी वजह से गुरुवार के कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। रूस-यूक्रेन संघर्ष बढ़ने की खबरों से शुरुआत में कीमतें ऊपर गईं, लेकिन ईरान और ओमान के बीच होर्मुज को लेकर प्रगति की खबर आने के बाद तेजी खत्म हो गई।

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