तीसरे विश्व युद्ध की आहट के बीच दुनिया दो शक्तिशाली गुटों में बंटती नजर आ रही है,तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो कौन देश किसके साथ होगा,दिखने लगा नया वर्ल्ड ऑर्डर:धनंजय सिंह 
तीसरे विश्व युद्ध की आहट के बीच दुनिया दो शक्तिशाली गुटों में बंटती नजर आ रही है,तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो कौन देश किसके साथ होगा,दिखने लगा नया वर्ल्ड ऑर्डर:धनंजय सिंह 

31 Mar 2026 |   116



 

 

लखनऊ।ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच बीते एक महीने से जंग चल रही है।इस जंग से खाड़ी के कई देश सीधेतौर पर प्रभावित हैं।ईरान पर हमले से पहले अमेरिका ने वेनेजुएला में अटैक करते हुए वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति को उठा लिया था। क्यूबा पर भी हमले की धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप दे रहे हैं।इसके अलावा रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से लड़ाई चल रही है,जिससे यूरोप का बड़ा हिस्सा प्रभावित है। 

मिडिल ईस्ट में दहक रही है आग 

मिडिल ईस्ट में दहकती आग और रूस-यूक्रेन के बीच खिंचता युद्ध ने विश्व को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है,जहां हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है कि क्या तीसरा विश्व युद्ध शुरू होने वाला है।सोशल मीडिया से लेकर कूटनीतिक गलियारों तक तीसरे विश्व युद्ध की चर्चा बहुत तेज है।हालांकि विशेषज्ञ अभी इसे महायुद्ध नहीं मानते,लेकिन वैश्विक शक्तियों की गोलबंदी ने एक नया वर्ल्ड ऑर्डर जरूर तैयार कर दिया है।अगर कल को विश्व दो हिस्सों में बंटता है, तो कौन किसके साथ खड़ा होगा।आइए इसे वर्तमान भू-राजनीतिक समीकरणों के आधार पर इसे विस्तार से समझते हैं।

विश्व युद्ध की परिभाषा और मौजूदा हालात 

हर बड़े संघर्ष को विश्व युद्ध नहीं कहा जा सकता है।किसी भी युद्ध को विश्व युद्ध तब माना जाता है जब वह कई महाद्वीपों में फैल जाए और विश्व की महाशक्तियां सीधे एक-दूसरे के सामने आ जाएं,इसके अलावा इसका असर महीनों नहीं बल्कि सालों तक रहे और वैश्विक अर्थव्यवस्था,तेल की सप्लाई और समुद्री व्यापार पूरी तरह ठप हो जाए।फिलहाल पश्चिमी एशिया और यूक्रेन में हालात गंभीर हैं,लेकिन महाशक्तियां अभी तक प्रॉक्समी वॉर यानी परोक्ष युद्ध लड़ रही हैं, सीधे आमने-सामने नहीं आई हैं।

अमेरिका के नेतृत्व वाली ताकत

अगर तीसरा विश्व युद्ध छिड़ता है तो एक खेमा अमेरिका के नेतृत्व में खड़ा होगा,इसमें नाटो के सभी सदस्य देश जैसे ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी शामिल होंगे।एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जापान,दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया इस गुट की रीढ़ बनेंगे। पश्चिमी एशिया में इजराइल इस गठबंधन का सबसे भरोसेमंद साथी होगा।यह गुट मुख्य रूप से लोकतांत्रिक मूल्यों और मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को बचाने के नाम पर एकजुट होगा।ताइवान और यूक्रेन को भी इसी खेमे का सक्रिय समर्थन मिलने की पूरी संभावना है।

यूरेशियन ब्लॉक

दूसरी ओर चीन और रूस के नेतृत्व में एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी गुट तैयार हो रहा है,इस खेमे में उत्तर कोरिया,ईरान और बेलारूस जैसे देश शामिल होंगे।ईरान की भागीदारी इस युद्ध को पश्चिमी एशिया में और भी घातक बना देगी, जबकि उत्तर कोरिया अपनी परमाणु शक्ति और विशाल सेना के साथ चीन का साथ दे सकता है।सीरिया और वेनेजुएला जैसे देश भी अपनी अमेरिका-विरोधी नीतियों के कारण इसी ब्लॉक की ओर झुक सकते हैं।यह गठबंधन मुख्य रूप से अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने के उद्देश्य से एक साथ आएगा।

विश्व का सबसे बड़ा वाइल्डकार्ड

इस संभावित महायुद्ध में भारत की स्थिति सबसे दिलचस्प और जटिल होगी।भारत को एक वाइल्डकार्ड प्लेयर माना जा रहा है।भारत के रूस के साथ पुराने और अच्छे रक्षा संबंध हैं, तो वहीं अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी है। भारत अपनी पुरानी गुटनिरपेक्ष नीति पर चलते हुए तटस्थ रहने की कोशिश करेगा।हालांकि चीन के साथ सीमा विवाद और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए भारत को अंततः कड़ा फैसला लेना पड़ सकता है।भारत की स्थिति इस युद्ध के नतीजे को किसी भी तरफ मोड़ने की ताकत रखती है।

विचारधारा नहीं,संसाधनों के आधार पर बनेगी बात

तीसरे विश्व युद्ध में गठबंधनों का आधार केवल लोकतंत्र या तानाशाही नहीं होगा,बल्कि संसाधन सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे।कई देश केवल इसलिए किसी गुट के साथ जा सकते हैं, क्योंकि उन्हें अनाज,तेल या आधुनिक तकनीक की जरूरत होगी।उदाहरण के लिए अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई देश अपनी आर्थिक जरूरतों के कारण चीन या अमेरिका में से किसी एक को चुन सकते हैं।यह युद्ध विचारधारा की लड़ाई से कहीं ज्यादा संसाधनों पर कब्जे की जंग साबित हो सकता है।

युद्ध की चिंगारी और ट्रिगर पॉइंट क्या होगा

विश्व युद्ध की शुरुआत किस मुद्दे पर होती है, यह तय करेगा कि कौन सा देश तुरंत एक्शन में आएगा।यदि युद्ध का ट्रिगर ताइवान होता है,तो चीन और अमेरिका सीधे भिड़ेंगे। वहीं अगर रूस नाटो के किसी सदस्य देश पर हमला करता है, तो पूरा यूरोप और अमेरिका तुरंत युद्ध में कूद पड़ेंगे। वर्तमान में रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी एशिया के संघर्ष पहले से ही इन गठबंधनों की नींव रख चुके हैं।विश्व इस समय एक बारूद के ढेर पर बैठा है, जहां एक छोटी सी गलतफहमी तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत कर सकती है।

आज की स्थिति अलग क्यों है

आज भले ही कई देश किसी संघर्ष में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल हों,जैसे समर्थन देना,हथियार भेजना या सीमित सैन्य कार्रवाई करना,लेकिन स्थिति अभी सीमित क्षेत्रों तक केंद्रित है।विश्व की सभी बड़ी महाशक्तियां सीधे युद्ध में आमने-सामने नहीं हैं और किसी ने औपचारिक रूप से विश्व युद्ध की घोषणा भी नहीं की है।इसलिए मौजूदा हालात को क्षेत्रीय संघर्ष या बहु-देशीय टकराव मान सकते हैं,न कि विश्व युद्ध।

क्या हालात बिगड़ सकते हैं

अगर बड़ी ताकतें सीधे भिड़ जाएं,युद्ध कई महाद्वीपों में फैल जाए और लंबे समय तक चले,तब उसे विश्व युद्ध कहा जा सकता है।फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण और चिंताजनक जरूर है,लेकिन इतिहास के पैमाने पर देखें तो इसे अभी तीसरा विश्व युद्ध कहना सही नहीं होगा।

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