वंदे मातरम् का विरोध बर्दाश्त नहीं,कानून बनाने की पहल पर बोले ओपी राजभर
वंदे मातरम् का विरोध बर्दाश्त नहीं,कानून बनाने की पहल पर बोले ओपी राजभर

20 Jul 2026 |   39



ब्यूरो धीरज कुमार द्विवेदी 

लखनऊ।योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार को दो अहम मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देकर सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी।ओपी राजभर एक ओर राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट को एसआईटी द्वारा स्टेटस रिपोर्ट सौंपे जाने की पुष्टि की,वहीं दूसरी ओर वंदे मातरम् का विरोध करने वालों के खिलाफ कानून बनाए जाने की पहल का खुलकर समर्थन किया।राजभर ने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत देश की अस्मिता और सम्मान से जुड़े विषय हैं, इसलिए उनका विरोध करने वालों के खिलाफ कानून बनाया जाना एक अच्छी पहल है।

राजधानी लखनऊ में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ओपी राजभर ने कहा कि सरकार और न्यायालय अपने-अपने स्तर पर संवेदनशील मामलों में पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं।राजभर ने स्पष्ट किया कि दोनों ही मामलों में कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई होनी चाहिए और किसी भी तरह की राजनीतिक भावना से ऊपर उठकर निर्णय लिया जाना चाहिए।

पत्रकारों द्वारा जब ओपी राजभर से वंदे मातरम् का विरोध करने वालों के खिलाफ कानून बनाए जाने की पहल पर सवाल पूछा गया तो राजभर ने बिना किसी हिचकिचाहट के उसका समर्थन किया।राजभर ने कहा कि यह अच्छी पहल है क्योंकि जो लोग वंदे मातरम् का विरोध करते हैं,उनके लिए कानून होना चाहिए। राजभर ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि देश की आजादी के संघर्ष की पहचान और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं का प्रतीक है। ऐसे राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए। यदि कोई जानबूझकर इसका विरोध करता है तो उस पर कानूनी प्रावधानों के तहत विचार किया जाना उचित है।बता दें कि ओपी राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर देशभर में समय-समय पर बहस होती रही है। कई प्रदेशों में इस विषय को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा और प्रस्ताव भी सामने आते रहे हैं।

ओपी राजभर ने कहा कि राष्ट्र की एकता,अखंडता और सम्मान सर्वोपरि है।राजभर ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अधिकार देता है,लेकिन उसके साथ नागरिकों के कुछ कर्तव्य भी जुड़े हैं। देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना हर भारतीय की जिम्मेदारी है।राजभर ने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है,जहां सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान किया जाता है, लेकिन जब बात राष्ट्र के सम्मान की आती है तो सभी नागरिकों को एकजुट होकर देशहित में खड़ा होना चाहिए।राजभर ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है।

ओपी राजभर ने कथित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। राजभर ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी और विशेष जांच दल (एसआईटी) अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कर चुका है।राजभर ने कहा कि अब पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार होगी।राजभर ने कहा कि सरकार किसी भी मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता के पक्ष में है तथा जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपना कार्य कर रही हैं।

ओपी राजभर ने कहा कि यदि किसी भी जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो जांच के माध्यम से सच्चाई भी सामने आ जाएगी।राजभर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी को बचाना या फंसाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। इसी कारण एसआईटी को स्वतंत्र रूप से जांच करने की जिम्मेदारी दी गई और अब उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जा चुकी है।

ओपी राजभर ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रीय हित और कानून व्यवस्था जैसे विषयों पर उनकी पार्टी का रुख स्पष्ट है।राजभर ने कहा कि देश के संविधान,न्यायपालिका और कानून का सम्मान सभी को करना चाहिए।चाहे मामला राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का हो या किसी कथित आर्थिक अनियमितता की जांच का, हर निर्णय कानून के अनुसार ही होना चाहिए।राजभर ने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका सर्वोच्च है और सरकार का दायित्व न्यायालय के निर्देशों का पालन करना है। इसी भावना के तहत राम मंदिर चंदा मामले में एसआईटी ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है।

बता दें कि ओपी राजभर के दोनों बयानों के बाद सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। वंदे मातरम् के मुद्दे पर राजभर का स्पष्ट समर्थन ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विषयों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिलती रही है। दूसरी ओर राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर उनका यह बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह मामला पहले से ही न्यायिक प्रक्रिया में है। ऐसे में एसआईटी की रिपोर्ट दाखिल होने के बाद आगे की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।आने वाले दिनों में इन दोनों मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस और तेज हो सकती है। विशेषकर यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई महत्वपूर्ण टिप्पणी करता है या वंदे मातरम् से जुड़े प्रस्ताव पर आगे कोई विधायी पहल होती है तो इसका व्यापक राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।

फिलहाल दोनों मुद्दों पर देश की निगाहें आगे की घटनाओं पर टिकी हुई हैं। एक ओर वंदे मातरम् का विरोध करने वालों के खिलाफ कानून बनाए जाने की मांग को लेकर बहस तेज हो सकती है, वहीं दूसरी ओर राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट पर अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।ओपी राजभर के बयान ने इन दोनों विषयों को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय की अगली प्रक्रिया और सरकार के संभावित कदम इन मामलों को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

More news