2027 विधानसभा चुनाव में सॉफ्ट हिंदुत्व से होगा अखिलेश का बेड़ा पार,राम मंदिर की सियासत पर घिरे
2027 विधानसभा चुनाव में सॉफ्ट हिंदुत्व से होगा अखिलेश का बेड़ा पार,राम मंदिर की सियासत पर घिरे

12 Jul 2026 |   42



 

लखनऊ।उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होगा, लेकिन चुनाव की सियासी रणभेरी अभी से बज चुकी है। यूपी में एक पुरानी कहावत है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर जाता है और जिस पार्टी का यूपी में डंका बजता है, उसी की तूती केंद्र में बोलती है।यही कारण है कि यूपी के सभी प्रमुख राजनीतिक दल अभी से अपनी सियासी गोटियां बिछानी शुरू कर दी है।कोई जातिगत समीकरणों को साधने में जुटा है,तो कोई अपनी पुरानी कोर कॉम्पिटेंसी (मूल विचारधारा) से बाहर निकलकर नए प्रयोग कर रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव के इस कुरुक्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव समाजवादी पार्टी में नजर आ रहा है।सपा मुखिया अखिलेश यादव अब भाजपा के कोर एजेंडे में घुसकर सॉफ्ट हिंदुत्व की सियासत का बड़ा दांव खेल रहे हैं।

सपा मुखिया अखिलेश यादव अब सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अब सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चलते नजर आ रहे हैं।राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को सबसे बड़ा हथियार बनाकर अखिलेश सीधे भाजपा के कोर वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं। लखनऊ में सपा मुख्यालय के बाहर लगे सनातन ही समाजवादी है की होर्डिंग ने यूपी का सियासी पारा बढ़ा दिया है।हालांकि सीएम योगी की आक्रामक रणनीति के आगे सपा खुद घिरती दिख रही है।सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि लगता है अब अखिलेश भी भगवा पहनने वाले हैं।

अखिलेश के हिंदुत्व कार्ड पर सीएम योगी का पलटवार

आजकल उत्तर प्रदेश की सियासत में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला गरमाया हुआ है।सपा ने इसे अपना मुख्य सियासी हथियार बना लिया है।अखिलेश यादव का राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर खुला विरोध जताना और लखनऊ में सपा मुख्यालय के बाहर सनातन ही समाजवादी है लिखे बड़े-बड़े होर्डिंग लगवाना अखिलेश का सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति का खुला ऐलान माना जा रहा है।

सपा का क्या है एजेंडा

सियासी गलियारों में चर्चा है कि सपा इसके जरिए बहुसंख्यक हिंदू मतदाताओं को यह संदेश देना चाहती है कि वह धर्म विरोधी नहीं है।मगर एक तरफ जहां सपा राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर भाजपा को घेरने की पुरजोर कोशिश कर रही है तो दूसरी तरफ वह खुद अपने ही बुने इस सियासी जाल में घिरती हुई दिख रही है।सीएम योगी की बेहद अचूक और कुशल रणनीति के आगे सपा का ये नया दांव फिलहाल फेल होते नजर आ रहे हैं।सीएम योगी और उनकी पूरी टीम ने सपा को उसी के हथियार से घेरना शुरू कर दिया है।

सीएम योगी का अखिलेश पर तीखा तंज

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को उठाने और उस पर सबसे ज्यादा सियासी शोर मचाने में सपा और अखिलेश यादव सबसे आगे रहे हैं।सपा के इस बदले हुए रूप और हिंदुत्व प्रेम पर तंज कसते हुए सीएम योगी ने करारा प्रहार किया है।सीएम योगी ने बीते दिनों मुस्कुराते हुए तंज कसा था,लगता है अब अखिलेश यादव भी भगवा बाना (कपड़े) पहनने की तैयारी कर रहे हैं।इसके साथ ही कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने सपा पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि अखिलेश यादव केवल चुनावी और राजनीतिक लाभ लेने के लिए हिंदुत्व की राजनीति का ढोंग रच रहे हैं।

सपा का पलटवार,चंदा चोरों को बचा रही भाजपा

भाजपा के इन तीखे हमलों के बाद सपा भला कहां चुप बैठने वाली थी।सपा की तरफ से पलटवार करते हुए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने मोर्चा संभाला।उदयवीर ने कहा कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब सपा पर ऐसे आरोप लग रहे हैं,इससे पहले भी सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के कई वीडियो और साक्ष्य मौजूद हैं जो उनके धर्म और संस्कृति के प्रति जुड़ाव को दर्शाते हैं।अखिलेश यादव के नेतृत्व में चित्रकूट जैसी पवित्र जगहों पर कई अहम बैठकें की गई हैं।

उदयवीर सिंह ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा...

उदयवीर सिंह ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा सिर्फ राम मंदिर में हुई असल चोरी से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सपा पर निशाना साध रही है।भाजपा चंदा चोरों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न करके जनता के सामने पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है,क्योंकि इस चोरी के तार सीधे दिल्ली तक जुड़े हुए हैं।

सपा को कांग्रेस का समर्थन

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस ने भी सपा का समर्थन किया है।कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम कितने बड़े सनातनी है,या नहीं है इसका सर्टिफिकेट भाजपा नहीं दें सकती,जो भाजपा खुद राम मंदिर में चोरी के मामले में खुद घिरी है,ऐसे में जनता सब देख रही है और समझ रही।जनता आगामी चुनाव में इसका मुहतोड़ जवाब देगी।

जानें सियासी पंडित क्या कह रहे हैं

सियासी पंडितों का मानना है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद बदले राजनीतिक माहौल में सपा हिंदू मतदाताओं तक अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रही है।इसी रणनीति के तहत पार्टी की ओर से धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को प्रमुखता दी जा रही है।

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