नई दिल्ली।अमेरिका और ईरान के बीच जंग से मिडिल ईस्ट तनाव विश्व के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है।विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में बड़ी चेतावनी देते हुए इसके असर के बारे में जो अनुमान जताए जा रहे हैं,उसे देखकर लगता है कि मिडिल ईस्ट वॉर से डरना जरूरी है।इसमें कहा गया है कि अमेरिका और ईरान जंग से वेस्ट एशिया में बढ़ती जियो-पॉलिटिकल टेंशन से ग्लोबल एनर्जी मार्केट के साथ ही कमोडिटी बाजारों में भयानक असर देखने को मिल सकता है।
विश्व बैंक के मुताबिक...
विश्व बैंक के मुताबिक इस जंग से पैदा हुए हालातों के चलते इस साल 2026 में एनर्जी प्राइस 24 फीसदी तक बढ़ सकती है, तो वहीं कमोडिटी प्राइस में 16 फीसदी तक का तगड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है,ये विश्व में महंगाई बढ़ाने वाली साबित होगी और इसका असर ग्रोथ रेट की रफ्तार कम होने के रूप में भी देखने को मिलेगा।
होर्मुज बंदी से चरम पर टेंशन
विश्व बैंक की रिपोर्ट में मिडिल ईस्ट युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने पर फोकस किया गया है।रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल-गैस की सप्लाई ऐसे ही बाधित रहती है, तो फिर विश्व के लगभग 35 फीसदी क्रूड ऑयल व्यापार पर असर पड़ सकता है,इससे तेल आपूर्ति में अब तक का सबसे बड़ा संकट पैदा हो गया है,जिसके चलते ग्लोबल तेल सप्लाई में हर रोज लगभग 10 मिलियन बैरल की कमी दर्ज की गई है।
जंग से ऊर्जा की कीमतों में...
जंग से ऊर्जा की कीमतों में 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन जंग के समय जैसे हाई उछाल आ सकता है।एनालिसिस से पता चलता है कि इस झटके का रोजगार सृजन में रुकावट आएगी और ग्लोबल ग्रोथ में गंभीर प्रभाव देखने को मिलेगा। इसका असर अमेरिका और ईरान की जंग शुरू होने के बाद से ही दिख रहा है,जबकि क्रूड ऑयल प्राइस इस साल की शुरुआत से करीब 50 फीसदी ज्यादा बने हुए हैं.।
दिखेगा लंबे समय तक असर
विश्व बैंक की रिपोर्ट में अनुमान जाहिर किया गया है कि जंग की टेंशन खत्म होने और होर्मुज स्ट्रेट फिर से ओपन होने के बाद भी असर देखने को मिलेगा। 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल रहने की आशंका है, जो 2025 में 69 डॉलर प्रति बैरल से काफी ज्यादा है।फिलहाल इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट में इस बात पर फोकस
विश्व बैंक की रिपोर्ट में इस बात पर फोकस किया गया है कि जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने के दौरान तेल की कीमतों में अस्थिरता करीब दोगुनी हो जाती है।अगर इन तमाम कारणों से तेल उत्पादन में 1फीसदी की गिरावट आती है, तो इसकी कीमतों में औसतन 11.5 फीसदी तक की बढ़ोतरी दिखती है। इसका सीधा असर अन्य कमोडिटी मार्केट्स पर भी पड़ता है। रिपोर्ट में एक कैलकुलेशन समझाते हुए कहा गया है कि सप्लाई संकट से तेल की कीमतों में 10 फीसदी की बढ़ोतरी, प्राकृतिक गैस के दाम में करीब 7 फीसदी और फर्टिलाइजर्स प्राइस में 5 फीसदी से ज्यादा का इजाफा करती है।
करोड़ों लोगों पर खाने का संकट
विश्व बैंक चीफ इकोनॉमिस्ट इंदरमित गिल ने कहा है कि ये मिडिल ईस्ट युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे प्रभावित कर रहा है।पहले ऊर्जा की बढ़ती कीमतों,फिर फूड प्रोडक्ट के दाम में इजाफे के रूप में।अंत में महंगाई बढ़ेगी और ब्याज दरों में भी तेजी आएगी,जो कर्ज को और भी महंगा बना देगी। ऐसे हालात में सबसे गरीब लोग,जो अपनी आय का बड़ा हिस्सा भोजन और ईंधन पर खर्च करते हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
विश्व बैंक चीफ इकोनॉमिस्ट इंदरमित गिल ने जताया अनुमान
इंदरमित गिल ने अनुमान जताया है कि 2026 में फर्टिलाइजर प्राइस 31फीसदी बढ़ जाएंगे,जिससे किसानों की इनकम कम होगी और भविष्य में फसलों की पैदावार खतरे में पड़ जाएगी। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के मुताबिक अगर जंग अधिक समय तक चलती है, तो खाद्य आपूर्ति पर पड़ने वाला असर इस साल 45 मिलियन (4.5 करोड़) लोगों को गंभीर खाद्य असुरक्षा की ओर धकेल सकता है।
यूएस की भी डराने वाली रिपोर्ट
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भी अमेरिका और ईरान जंग के बुरे असर के बारे में बताया गया था।यूएन के ग्रोथ चीफ अलेक्जेंडर डी क्रू ने हाल ही में चेतावनी जारी की थी कि अमेरिका और ईरान जंग के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से सिर्फ ईंधन ही नहीं,बल्कि फर्टिलाइजर्स की सप्लाई प्रभावित हुई है,जो कि ग्लोबल फूड क्राइसिस का कारण बन सकता है। यूएन फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक भारत, बांग्लादेश,श्रीलंका,सोमालिया,सूडान,तंजानिया,केन्या और मिस्र जैसे देशों में सबसे ज्यादा जोखिम नजर आ रहा है।डी क्रू ने आगे कहा था कि भले ही अमेरिका और ईरान का ये युद्ध कल खत्म क्यों न हो जाए, लेकिन पहले से दिख रहे प्रभाव आगे भी जारी रहेंगे, जो दुनिया के 30 मिलियन या 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को गरीबी में धकेल सकते हैं।