नई दिल्ली।अमेरिका और ईरान के जंग की आग में विश्व के तमाम देश झुलसे,कुछ अटैक का शिकार हुआ,तो इस जंग से सप्लाई चेन बाधित होने से कई देशों में महंगाई का बम फूटा। भारत में भी तेल-एलपीजी की किल्लत देखने को मिली, लेकिन महंगाई बढ़ने जैसी कोई मार नहीं पड़ी।वहीं अब एक रिपोर्ट आई है,जिसमें कहा जा रहा है कि भारत में महंगाई बढ़ सकती है।खास बात ये है कि Inflation Attack अमेरिका-ईरान जंग से नहीं,बल्कि गर्मी और हीटवेव इसका कारण बनने वाला है।भारत में गर्मी के कड़े तेवर दिखने शुरू हो गए हैं और अप्रैल में ही कई राज्य आग की भट्टी बने नजर आए हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक....
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत को इस साल हीटवेव और सामान्य से कम वर्षा के कारण महंगाई के खतरे का सामना करना पड़ सकता है।ये दोहरा अटैक पहले से एनर्जी की बढ़ती लागत के संकट के बीच नया आर्थिक दबाव पैदा कर रहा है।इस सप्ताह उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और घरों में ठंडक पाने के लिए एयर कंडीशनर और पंखे का यूज बढ़ने से देश में एनर्जी डिमांड रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई है।
कम बारिश से बढ़ेगी मुसीबत
सरकार ने भी जून से सितंबर के मानसून के मौसम के दौरान सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जाहिर किया है,जो एग्रीकल्चर एक्टिविटीज के लिए जरूरी है।ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड बैंकिंग ग्रुप के इकोनॉमिस्ट धीरज निम का कहना है कि लगातार जारी भीषण गर्मी और अनियमित मानसून से खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ गया है, जो अब तक स्थिर बनी हुई नजर आ रही है।बारिश के पूर्वानुमान एग्रीकल्चर इनपुट कॉस्ट के साथ मिलकर आने वाले समय में फूड प्राइस में बढ़ोतरी के साथ गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं।
5 फीसदी के पार पहुंचेगी महंगाई
लू,कमजोर मानसून और तेल की कीमतों में उछाल से भारत में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है।धीरज निम का कहना है कि 1 अप्रैल से शुरू हुए इस वित्तीय वर्ष में महंगाई दर औसतन 5 फीसदी के करीब रहेगी,जो कि भारतीय रिजर्व बैंक के 4.6 फीसदी के अनुमान से ज्यादा है।बीते साल के ज्यादातर समय भारत में महंगाई रिज़र्व बैंक के तय दायरे 4 फीसदी से नीचे रही और इसकी प्रमुख वजह सब्जियों की कीमतों में गिरावट रही थी।इकोनॉमिस्ट का कहना है कि इस बार प्रतिकूल मौसम स्थितियों के चलते ये बढ़ सकती है।
इकोनॉमी के लिए बड़ा संकट
बता दें कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में फूड प्रोडक्ट्स का हिस्सा 37 फीसदी है और महंगाई की कैटेगरी में ये बड़ा अहम रोल निभाता है।रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय जनसंख्या का 60 फीसदी से अधिक हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है और अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर कृषि और उससे संबंधित कामों पर निर्भर है।खराब फसल से आय प्रभावित हो सकती है,ग्रामीण क्षेत्रों में डिमांड कम हो सकती है और इकोनॉमिक ग्रोथ पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट में किया गया है अलर्ट
रिपोर्ट में ये अलर्ट भी किया गया है कि Food Price Hike और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के झटके से आरबीआई की मौद्रिक नीति जटिल हो जाएगी।बता दें कि केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस महीने की शुरुआत में संकेत दिया था कि आरबीआई महंगाई और ग्रोथ के जोखिमों का आकलन करने के लिए कुछ समय तक यथास्थिति बनाए रखेगा।अनुमान जाहिर किया गया था कि इस वित्तीय वर्ष में इंडियन इकोनॉमी 6.9 फीसदी की रफ्तार से भागेगी।
अमेरिका-ईरान युद्ध,क्रूड ने बढ़ाई टेंशन
ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता का अनुमान है कि अगर मानसून की बारिश सामान्य से कम रही, तो इस वित्तीय वर्ष में महंगाई दर 5.8 फीसदी तक पहुंच सकती है। अभिषेक गुप्ता ने साल 2023 का समय याद करते हुए कहा कि उस समय जब बारिश सामान्य से 5.4 फीसदी कम हुई थी, तब फसल उत्पादन में 3.5 फीसदी की गिरावट आई थी, जबकि औसत खाद्य महंगाई बढ़कर 8 फीसदी पर पहुंच गई थी।उन्होंने कहा कि कम बारिश की वजह से किसानों को अपनी जमीनों की सिंचाई के लिए डीजल से चलने वाली सिंचाई सिस्टम का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, ये कृषि की लागत को बढ़ाने वाला साबित होगा,जबकि अमेरिका और ईरान में जारी जंग के कारण कच्चे तेल की कीमत पहले से ही 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है।