छोटे शहरों से बढ़ रही म्युचुअल फंड की ताकत,हिंदी पट्टी बन रही निवेश की नई ग्रोथ स्टोरी
छोटे शहरों से बढ़ रही म्युचुअल फंड की ताकत,हिंदी पट्टी बन रही निवेश की नई ग्रोथ स्टोरी

23 Sep 2026 |   20



 

नई दिल्ली।म्युचुअल फंड उद्योग अब पारंपरिक बड़े शहरों से आगे बढ़कर विकास के नए अवसर तलाश रहा है।हिंदी भाषी क्षेत्रों के छोटे शहर और कस्बे नए निवेशकों के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभर रहे हैं। हाल के वर्षों में म्युचुअल फंड एसेट्स का भौगोलिक विस्तार भी तेज हुआ है।

एम्फी-क्रिसिल फैक्टबुक 2026 के मुताबिक...

एम्फी-क्रिसिल फैक्टबुक 2026 के मुताबिक टॉप 30 से बाहर (बी30) शहरों में एसेट्स अंडर मैनजमेंट (एयूएम) मार्च 2021 के 5.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 में 13.9 लाख करोड़ रुपये हो गईं।इसके मुकाबले टॉप 30 (टी30) शहरों में एयूएम इसी अवधि में 26.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 59.8 लाख करोड़ रुपये हो गया।हालांकि टॉप-30 शहरों में अब भी उद्योग की कुल एसेट्स का बड़ा हिस्सा है, लेकिन बी-30 बाजारों में तेज वृद्धि से संकेत मिलता है कि म्युचुअल फंड उद्योग की नई वृद्धि अब भौगोलिक रूप से ज्यादा व्यापक हो रही है।इस रुझान को पारंपरिक वित्तीय केंद्रों से बाहर डिजिटल पहुंच बढ़ने, निवेशकों में जागरूकता बढ़ने और सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) को तेजी से अपनाए जाने से मदद मिल रही है।

युवा निवेशकों से बढ़ी म्युचुअल फंड की पहुंच

अवीसा वेल्थ क्रिएटर्स के मुख्य निवेश अधिकारी आदित्य अग्रवाल ने कहा कि हिंदी भाषी राज्यों में म्युचुअल फंड निवेशकों की अगली पीढ़ी में युवाओं की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। अग्रवाल ने कहा कि नए निवेशक आधार में जेन-जी और मिलेनियल क्लास के वेतनभोगी कर्मचारी, स्थानीय कारोबारी और पहली बार निवेश करने वाले खुदरा निवेशक शामिल हैं।ये निवेशक अपनी बचत का एक हिस्सा पारंपरिक बैंक एफडी से निकालकर म्युचुअल फंड में लगा रहे हैं।अग्रवाल ने कहा कि हिंदी भाषी राज्यों के कई गैर-मेट्रो क्षेत्रों में फोलियो की सालाना वृद्धि दोहरे अंक में रही है। इससे संकेत मिलता है कि म्युचुअल फंड उद्योग के अगले चरण के विस्तार में ये बाजार नए निवेशकों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।बी-30 बाजारों की बढ़ती अहमियत उनके एसेट्स आधार से भी स्पष्ट होती है, जो अब करीब 15 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है।

म्युचुअल फंड की नई ग्रोथ स्टोरी लिख रही हिंदी पट्टी

मास्टर कैपिटल सर्विसेज में वेल्थ मैनेजमेंट की एवीपी आकांक्षा शुक्ला ने कहा कि म्युचुअल फंड उद्योग की वृद्धि तेजी से भारत की हिंदी पट्टी की ओर बढ़ रही है। इसमें युवा निवेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।लखनऊ, जयपुर और चंडीगढ़ जैसे शहरों में पहली बार निवेश करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। इनमें से कई निवेशक पहले कभी म्युचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स या फंड हाउस के संपर्क में नहीं आए थे। इसके बजाय, वे डिजिटल मंचों के जरिए निवेश की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं और खुद ही निवेश शुरू कर रहे हैं।
शुक्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश में म्युचुअल फंड एसेट्स 2025 में 19.3 फीसदी बढ़ीं और इसमें 63,217 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश म्युचुअल फंड एसेट्स वाले सबसे बड़े राज्यों में शामिल हो गया। राजस्थान और हरियाणा में भी क्रमशः 19.5 फीसदी और 17.9 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि उद्योग की करीब 18 फीसदी की वृद्धि दर के आसपास या उससे ज्यादा रही।
वित्त वर्ष 2025 में एनएसई पर नए निवेशकों की संख्या बढ़ने के मामले में भी उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा। राज्य में 29.5 लाख नए निवेशक जुड़े।

डिजिटल पहुंच से बढ़ा निवेश का दायरा

छोटे शहरों में म्युचुअल फंड की बढ़ती पहुंच इस बात को दिखाती है कि निवेशकों के वित्तीय उत्पादों तक पहुंचने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है।डिजिटल माध्यम से निवेश की प्रक्रिया पूरी होने से निवेशकों के लिए वितरकों या वित्तीय संस्थानों के कार्यालय जाने की जरूरत कम हुई है। इससे छोटे शहरों में पहली बार निवेश करने वाले लोगों के लिए एसआईपी शुरू करना और डिजिटल मंचों के जरिए सीधे म्युचुअल फंड में निवेश करना आसान हो गया है।युवा और डिजिटल माध्यमों से निवेश करने वाले लोगों की बढ़ती संख्या उद्योग के नए निवेशक आधार की तस्वीर भी बदल रही है। जो निवेशक पहले काफी हद तक बैंक जमा और बचत के दूसरे पारंपरिक साधनों पर निर्भर रहते थे, वे अब बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों में भी रुचि ले रहे हैं।टॉप-30 से बाहर के शहरों की एसेट्स 2022 के बाद से दोगुने से ज्यादा हो चुकी हैं। यह दिखाता है कि सबसे बड़े वित्तीय केंद्रों से बाहर भी म्युचुअल फंड की पहुंच तेजी से बढ़ रही है।

क्या हिंदी पट्टी बनेगी अगली ग्रोथ का आधार

बी-30 बाजारों की बढ़ती हिस्सेदारी से संकेत मिलता है कि म्युचुअल फंड उद्योग के अगले चरण का विस्तार पहले से विकसित वित्तीय केंद्रों में पहुंच बढ़ाने के बजाय छोटे शहरों और कस्बों से नए निवेशकों को औपचारिक निवेश व्यवस्था से जोड़ने पर अधिक निर्भर हो सकता है।एक्सपर्ट्स का मानना है कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में यह अवसर खास तौर पर बड़ा है। इन राज्यों में बड़ी युवा आबादी, बढ़ती आय, डिजिटल पहुंच का विस्तार और वित्तीय उत्पादों को लेकर बढ़ती जागरूकता म्युचुअल फंड को अपनाने में मदद कर सकती है।हालांकि निकट भविष्य में म्युचुअल फंड की कुल एसेट्स में टी-30 शहरों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी बनी रहने की संभावना है। ऐसे में उभरता रुझान बड़े वित्तीय केंद्रों से दूर जाने का नहीं, बल्कि उद्योग के विकास के आधार को और व्यापक बनाने का है।म्युचुअल फंड उद्योग के लिए हिंदी पट्टी आगे चलकर नए फोलियो, एसआईपी निवेश और पहली बार निवेश करने वाले लोगों का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती है। इससे भौगोलिक विस्तार उद्योग की अगली विकास यात्रा का एक प्रमुख विषय बन सकता है।

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