भारत से चीन को बढ़ा 40% निर्यात,इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान ने पकड़ी रफ्तार
भारत से चीन को बढ़ा 40% निर्यात,इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान ने पकड़ी रफ्तार

21 Sep 2026 |   24



 

नई दिल्ली।भारत से चीन को भेजे जाने वाले सामान में तेजी आई है।खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान का निर्यात बढ़ा है।अगस्त तक के पांच महीनों में चीन को भारत का निर्यात लगभग 40 फीसदी बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान इस बढ़ोतरी के बड़े कारण रहे हैं।

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के मुताबिक...

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर का दायरा बढ़ने से हाई-एंड उपकरणों की मांग बढ़ रही है। इसका फायदा भारत से चीन को होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को भी मिल रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में तेज बढ़ोतरी

मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत से चीन को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात तीन गुना बढ़कर 3.18 अरब डॉलर हो गया है। इसमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली,स्मार्टफोन,डिस्प्ले मॉड्यूल और टेलीकॉम उपकरण जैसे उत्पाद शामिल रहे। चालू वित्त वर्ष में भी यह तेजी जारी है।अप्रैल से अगस्त के बीच चीन को इलेक्ट्रॉनिक्स की खेप पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 15 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है।

इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव राजू गोयल के मुताबिक...

इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव राजू गोयल के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उत्पादों और बढ़ते डेटा सेंटर के लिए हाई-एंड उपकरणों की मांग बढ़ी है।इससे भारत से चीन को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़ाने में मदद मिली है।भारत के लिए यह बढ़ोतरी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की कोशिशों के लिहाज से अहम है। यह ऐसे समय में हुआ है,जब भारत और चीन अपने रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं अमेरिका की टैरिफ नीतियों के बीच दोनों देशों के पास आर्थिक रिश्ते बढ़ाने की एक और वजह बनी है।

इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू के मुताबिक...

इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू के मुताबिक यह दिखाता है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग दुनिया की सबसे प्रतिस्पर्धी ग्लोबल वैल्यू चेन में अपनी विश्वसनीयता बनाना शुरू कर रही है।

कोरोना स्टील इंडस्ट्री के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण कुमार गरोडिया के मुताबिक...

कोरोना स्टील इंडस्ट्री के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण कुमार गरोडिया के मुताबिक, निर्यात में यह बढ़ोतरी अभी छोटी है, लेकिन इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा वैश्विक माहौल में चीन भारतीय सामान के लिए पहले से ज्यादा खुला हो सकता है।

आंकड़ों में क्यों दिख रहा अंतर

हालांकि भारत और चीन के आंकड़ों में एक अंतर भी दिखाई देता है।चीन के कस्टम आंकड़ों में भारत से आने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड में वैसी बढ़ोतरी दर्ज नहीं हुई है,जैसी भारतीय आंकड़ों में दिख रही है। चीन के आंकड़ों में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा स्मार्टफोन और दूसरे टेलीकॉम उत्पादों में दिखाई देता है।इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक दोनों देश सामान को अलग-अलग तरीके से वर्गीकृत करते हैं। इसी वजह से यह ठीक-ठीक पता लगाना मुश्किल है कि बढ़ोतरी किन उत्पादों से आई है।चीन अभी भी भारतीय सामान के लिए अपेक्षाकृत छोटा बाजार है। मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत के कुल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 4.4 फीसदी रही, जो एक साल पहले 3 फीसदी से कुछ ज्यादा थी। इसके मुकाबले भारत के सबसे बड़े निर्यात बाजार अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी है।

चीन के साथ व्यापार घाटा कितना

निर्यात बढ़ने के बावजूद चीन के साथ भारत के व्यापार में बड़ा अंतर बना हुआ है।मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत ने चीन से 131.6 अरब डॉलर का सामान आयात किया है। यह भारत के कुल आयात का लगभग 17 फीसदी था और चीन को भारत के निर्यात के मुकाबले कई गुना ज्यादा रहा है।इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा इंजीनियरिंग सामान का निर्यात भी बढ़ा है।अप्रैल से अगस्त के बीच चीन को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात पिछले साल की समान अवधि से करीब 21 फीसदी बढ़ा है। इसमें मशीनरी और उसके पुर्जे, वाहन कलपुर्जे और हाथ से इस्तेमाल होने वाले औजार शामिल हैं।निर्यातकों को उम्मीद है कि चीन को भारतीय सामान की बिक्री आगे भी बढ़ सकती है।पंकज मोहिंद्रू के मुताबिक अब चुनौती इस बढ़ोतरी को बनाए रखने और पुर्जों, असेंबली तथा तैयार उत्पादों तक निर्यात का दायरा बढ़ाने की है। इसके साथ ही भारत में डिजाइन और कलपुर्जे बनाने की क्षमता भी बढ़ानी होगी।

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