नई दिल्ली।कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को गिरावट देखने को मिल रही है।ब्रेंट क्रूड का नवंबर वायदा करीब 0.43 फीसदी गिरकर 108.28 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड का अक्टूबर वायदा करीब 0.84 फीसदी की गिरावट के साथ 104.94 डॉलर प्रति बैरल पर है।
कच्चे तेल में आज की गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आया भंडार का आंकड़ा है।अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी एपीआई के मुताबिक 11 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में अमेरिका का कच्चे तेल का भंडार 71.4 लाख बैरल बढ़ गया। बाजार को इसके उलट करीब 18 लाख बैरल की कमी की उम्मीद थी। यानी बाजार के अनुमान के मुकाबले अमेरिका में काफी ज्यादा तेल जमा हुआ है। आमतौर पर भंडार में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी को मांग में कमजोरी का संकेत माना जाता है और इससे तेल की कीमतों पर दबाव पड़ता है।
सिर्फ कच्चे तेल का भंडार ही नहीं, पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन के भंडार में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे अमेरिकी बाजार में तेल की मांग को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी वजह से पश्चिम एशिया से सप्लाई को लेकर जारी खतरे के बावजूद बुधवार को कच्चे तेल में बिकवाली देखने को मिल रही है।
आज की गिरावट से पहले मंगलवार को कच्चे तेल में तेज उछाल आया था। ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों 3 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा चढ़े थे और मई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुए थे। इसकी बड़ी वजह सऊदी अरब से तेल की सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता थी।
हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद कर दी है। इसके बाद यानबू बंदरगाह पर तेल की लोडिंग भी रोक दी गई। इस पाइपलाइन के जरिए करीब 40 लाख बैरल प्रतिदिन तेल लाल सागर की तरफ भेजा जा रहा था। यह दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 4 फीसदी है।
इसलिए अभी कच्चे तेल के बाजार में दो उलट ताकतें काम कर रही हैं। एक तरफ अमेरिका में भंडार बढ़ने से कीमतों पर दबाव है। दूसरी तरफ सऊदी अरब की सप्लाई में रुकावट और पश्चिम एशिया का तनाव कीमतों को नीचे जाने से रोक रहा है। इसी वजह से आज गिरावट के बावजूद ब्रेंट अभी भी 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।