घरेलू शेयर बाजारों का दर्द दूर होने में लगेगा समय,यूबीएस ने दी चेतावनी,गिनाईं बाजार के सामने खड़ी 3 बड़ी चुनौतियां
घरेलू शेयर बाजारों का दर्द दूर होने में लगेगा समय,यूबीएस ने दी चेतावनी,गिनाईं बाजार के सामने खड़ी 3 बड़ी चुनौतियां

11 Sep 2026 |   21



 

नई दिल्ली।भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाले कुछ महीने आसान नहीं होंगे।यूबीएस इंडिया के कंट्री हेड मिकी दोशी का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी,जियो पॉलिटिकल टेंशन और बाजार में लगातार नए शेयरों की सप्लाई के कारण भारतीय इक्विटी मार्केट पर अगले एक से दो तिमाहियों तक दबाव बना रह सकता है।

बरहाल कमजोर बाजार माहौल के बावजूद यूबीएस को भारतीय कंपनियों की कमाई को लेकर उम्मीद है।मिकी दोशी का मानना है कि कॉरपोरेट अर्निंग्स में सुधार धीरे-धीरे बाजार के लिए सहारा बन सकता है और 2027 की ओर बढ़ते हुए तस्वीर बेहतर हो सकती है।

मिकी दोशी के मुताबिक इस समय बाजार का माहौल बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं है।भारतीय बाजार पहले भी ऐसे कई उतार-चढ़ाव वाले दौर देख चुका है।इस समय बाजार के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं।जियो पॉलिटिकल टेंशन,कच्चे तेल की कीमतें और शेयर बाजार में लगातार बढ़ती शेयरों की सप्लाई।बाजार में IPO और अन्य माध्यमों से नए शेयर लगातार आ रहे हैं।बाजार इस सप्लाई को अब तक संभाल रहा है,लेकिन इससे निवेशकों की लिक्विडिटी पर दबाव बना रह सकता है।

Q1 में सुधरने लगी थी कंपनियों की आय

यूबीएस के कंट्री हेड ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 के दौरान कंपनियों की कमाई में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे थे।हालांकि फरवरी में शुरू हुए युद्ध के बाद परिस्थितियों ने इस रिकवरी की रफ्तार को प्रभावित किया।

जानें क्या है मिकी दोशी का मानना 

मिकी दोशी का मानना है कि कंपनियों की मुनाफा वृद्धि शायद 25% से 30% जैसी तेज नहीं होगी,लेकिन वह कमाई के आउटलुक को बहुत ज्यादा नकारात्मक भी नहीं मानते।कॉरपोरेट अर्निंग्स में धीरे-धीरे होने वाला सुधार 2027 की ओर बाजार के लिए बेहतर माहौल तैयार कर सकता है।

यूएस बॉन्ड यील्ड्स बाजार के लिए बड़ी चिंता

ग्लोबल मार्केट के लिए अमेरिका की बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी एक बड़ी चिंता बनी हुई है।अमेरिका की 10 साल और 30 साल की बॉन्ड यील्ड कई दशकों में देखे गए ऊंचे स्तरों के करीब पहुंच गई हैं।मिकी दोशी का कहना है कि इस माहौल में वैश्विक इक्विटी बाजारों को लेकर सावधानी के साथ आशावादी रहने की जरूरत है।ऊंची ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड निवेशकों को इक्विटी के बजाय सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ आकर्षित कर सकती हैं,इसका असर भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर पड़ सकता है।

FII की दिलचस्पी कम,लेकिन भारत पर भरोसा खत्म नहीं

मिकी दोशी ने माना कि बाजार और IPO गतिविधियों में विदेशी निवेशकों की भारत में कम दिलचस्पी दिखाई दे रही है।हालांकि उनके मुताबिक इसका मतलब यह नहीं है कि वैश्विक निवेशकों का भारत की अर्थव्यवस्था और लंबे समय की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा खत्म हो गया है।भारत की ग्रोथ, कॉरपोरेट सेक्टर और घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती लंबे समय में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती रह सकती है।

NSE और Jio जैसे बड़े IPO ला सकते हैं नया विदेशी पैसा

यूबीएस का मानना है कि भारत की मजबूत IPO पाइपलाइन विदेशी निवेशकों को दोबारा आकर्षित करने में मदद कर सकती है।मिकी दोशी के मुताबिक NSE और Jio जैसे बड़े IPO केवल मौजूदा बाजार की लिक्विडिटी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के बजाय दुनिया भर से नए निवेशकों को भी भारत की तरफ ला सकते हैं।उनका मानना है कि NSE की लिस्टिंग भारत की आर्थिक और पूंजी बाजार की ग्रोथ का प्रतीक है और इससे विदेशी निवेशकों को भारत की विकास कहानी में सीधे भाग लेने का एक और मौका मिल सकता है।

निजी बैंकों पर यूबीएस का भरोसा

सेक्टर की बात करें तो यूबीएस को फाइनेंशियल सेक्टर में खासतौर पर मजबूत प्राइवेट बैंकों पर भरोसा है।कुछ बड़े प्राइवेट बैंकों में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर निवेशकों की नजर बनी हुई है,इसके बावजूद यूबीएस का मानना है कि इन बैंकों के मूलभूत आंकड़े मजबूत बने हुए हैं।खासतौर पर एसेट क्वालिटी को लेकर स्थिति अच्छी है,जो बैंकिंग शेयरों के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है।

निवेशकों के लिए क्या मायने

यूबीएस के इस आकलन से साफ है कि भारतीय शेयर बाजार में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव और दबाव का दौर जारी रह सकता है।कच्चे तेल की कीमतें,अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी निवेश का रुख बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे,लेकिन दूसरी तरफ,कॉरपोरेट कमाई में संभावित सुधार,मजबूत IPO पाइपलाइन और भारतीय अर्थव्यवस्था की लंबी अवधि की ग्रोथ बाजार के लिए सहारा बन सकती है।यानी अगले 1-2 तिमाहियों में बाजार में दबाव बना रह सकता है,लेकिन 2027 की ओर बढ़ते हुए कॉरपोरेट अर्निंग्स में सुधार बाजार की तस्वीर बदल सकता है।

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