नई दिल्ली।अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है।सोमवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में कच्चे तेल के दाम बढ़े।होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास तेल टैंकरों पर अमेरिका और ईरान की ओर से जवाबी हमलों ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 0.6 फीसदी की तेजी के साथ 96.8 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले हफ्ते भी कच्चे तेल में तेज उछाल आया था। ब्रेंट करीब 7.8 फीसदी और WTI लगभग 10 फीसदी महंगा हुआ था।
कच्चा तेल क्यों हो रहा महंगा
तेल बाजार की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली आवाजाही है।विश्व की तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज से गुजरता रहा है।अमेरिका और ईरान के बीच हमले दोबारा तेज होने के बाद होकर होर्मुज से तेल की आवाजाही काफी कम हो गई है।केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 10 दिनों में औसतन सिर्फ 10 कमोडिटी जहाज रोजाना होर्मुज से गुजरे। यह मई के बाद सबसे कम स्तर है।
तेल टैंकरों पर हमलों से बढ़ा तनाव
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक शनिवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला किया। इनमें एक टैंकर ईरान के खार्ग द्वीप के पास था। खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात के लिए बेहद अहम इलाका है।दूसरी तरफ ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना ने कहा कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया। ईरान का दावा है कि ये टैंकर तय रास्तों का पालन नहीं कर रहे थे। इसके अलावा तीन अमेरिकी जहाजों को भी दूसरे इलाकों में निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
समुद्री खुफिया कंपनी Marisks ने इन हमलों को समुद्री संघर्ष में बड़ी बढ़ोतरी बताया है। चिंता यह है कि अब कारोबारी जहाज भी अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का हिस्सा बन रहे हैं।
होर्मुज के बाहर बनेगा प्रतिबंधित क्षेत्र
तनाव आगे और बढ़ने की आशंका भी है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने रविवार को कहा कि आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर एक प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया जाएगा।अगर जहाजों की आवाजाही पर और पाबंदियां लगती हैं तो वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि ट्रेडर्स अभी कच्चे तेल की कीमतों में जोखिम को जोड़कर देख रहे हैं।
OPEC+ ने नहीं बदली उत्पादन नीति
इस बीच रविवार को हुई बैठक में OPEC+ ने अक्टूबर के लिए अपनी तेल उत्पादन नीति में कोई बदलाव नहीं किया। समूह को आगे उत्पादन बढ़ाने या घटाने का फैसला लेने से पहले सदस्य देशों के नए उत्पादन कोटे पर सहमति बनानी है।
कब सामान्य हो सकती है तेल की सप्लाई
ANZ के विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय तक तनाव बने रहने की आशंका ज्यादा है। बीच-बीच में सीमित सैन्य कार्रवाई भी जारी रह सकती है। इससे पश्चिम एशिया से तेल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। ANZ का अनुमान है कि 2026 के बाकी महीनों में तेल निर्यात पर दबाव बना रह सकता है। 2026 की चौथी तिमाही के आखिर में स्थिति धीरे-धीरे सुधर सकती है। हालांकि युद्ध से पहले के स्तर जितनी तेल की आवाजाही 2027 की पहली तिमाही के आखिर या दूसरी तिमाही की शुरुआत तक ही लौटने की उम्मीद है।