पटना।नेपाल में आई अचानक भीषण बाढ़ के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से लगे इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।नेपाल-चीन सीमा के पास बढ़े जलस्तर और नदियों के तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। खास तौर पर गंडक और कोसी नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
छह जिलों में हाई अलर्ट जारी
बाढ़ के खतरे को देखते हुए बिहार के छह जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।अधिकारियों को संभावित स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने को कहा गया है।गंडक बैराज के गेट को जरूरत के अनुसार संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं,ताकि अगर नेपाल से अतिरिक्त पानी आता है तो उसे सुरक्षित तरीके से आगे निकाला जा सके और निचले इलाकों में खतरा कम हो।
त्रिशूली नदी में बढ़ा अचानक पानी
नेपाल के फुर्के खोला इलाके में त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की जानकारी सामने आई है।यह क्षेत्र भारत नेपाल सीमा से लगभग 160 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है।आशंका जताई जा रही है कि नेपाल-चीन सीमा के पास संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF जैसी गतिविधि के कारण नदी में अचानक पानी बढ़ा हो सकता है। यह पानी आगे चलकर गंडक नदी तक पहुंच सकता है।हालांकि रास्ते में पानी का बहाव कम होने की संभावना जताई गई है,लेकिन बिहार के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन इसे गंभीरता से ले रहा है।
SSB की टीमें अलर्ट पर
भारत नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB)ने भी अपनी तैयारियां बढ़ा दी हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए 11 रेस्क्यू टीमों को अलर्ट किया गया है,जबकि सात अतिरिक्त टीमें स्टैंडबाय पर रखी गई हैं। SSB की टीमों को स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहने और जरूरत पड़ने पर बचाव अभियान में मदद करने के निर्देश दिए गए हैं।
नेपाल के रसुवा में बाढ़ से भारी नुकसान
नेपाल के रसुवा जिले में आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है।भोटेकोशी नदी में अचानक पानी बढ़ने से टिमुरे बाजार और आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया।
बाढ़ से कई घर,वाहन,सड़कें और पुल प्रभावित हुए हैं। बेट्रावती से रसुवागढ़ी बॉर्डर तक लगभग 42 किलोमीटर सड़क को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल सेना और सुरक्षा बल राहत बचाव अभियान में जुटे हैं। नुकसान का पूरा आकलन अभी जारी है।
बिहार में पहले से बढ़ा हुआ है नदियों का दबाव
बिहार में पहले से ही कई नदियों के जलस्तर को लेकर चिंता बनी हुई है।ऐसे में नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी हालात को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है।प्रशासन लगातार नदियों के जलस्तर,तटबंधों और संवेदनशील इलाकों की निगरानी कर रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते कदम उठाए जा सकें।