चीनी का तेवर पड़ा ढीला,हफ्तेभर में गिरा 20% तक भाव, सरकारी अनुमति का आधा ही हो पाएगा आयात
चीनी का तेवर पड़ा ढीला,हफ्तेभर में गिरा 20% तक भाव, सरकारी अनुमति का आधा ही हो पाएगा आयात

26 Aug 2026 |   25



 

नई दिल्ली।चीनी की कीमतों पर काबू पाने लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाएं गए कदमों का असर अब बाजार में दिखने लगा है।बाजार में चीनी का तेवर ढीला पड़ने लगा है।घरेलू चीनी की कीमतों में गिरावट से चीनी मिलों और रिफाइनरियों द्वारा केंद्र सरकार की ओर से शुल्क-मुक्त आयात के लिए मंजूर 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी में से लगभग आधी मात्रा ही आयात किए जाने की संभावना है।

सस्ती हुई 20 फीसदी चीनी

केंद्र सरकार की सख्ती और चीनी आयात करने के फैसले के बाद घरेलू एक्स-मिल चीनी कीमतों में पिछले सप्ताह के रिकॉर्ड स्तर से लगभग 20 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। 24 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक भाव 58.29 रुपये प्रतिकिलो और खुदरा भाव 63.05 प्रति किलो बताया जा रहा है।उससे पहले चीनी की खुदरा कीमतें औसतन 67 रुपये प्रतिकिलो के आसपास पहुंच गई थीं। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि देश में चीनी की कमी नहीं है।आने वाले दिनों में फुटकर बाजारों में कीमतें कम होने की उम्मीद है।

चीनी आयात करना फायदे का सौदा नहीं

केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी है,इसकी पूरी संभावना ब्राजील से आने की है। हालांकि ब्राजील से भारत तक चीनी पहुंचने में लगभग 40 दिन का समय लग सकता है।जब घरेलू चीनी कीमतें मजबूत और लगातार बढ़ रही थीं,तब आयात व्यावसायिक रूप से आकर्षक दिखाई दे रहा था,लेकिन केंद्र सरकार की घोषणा के बाद कीमतों में तेज गिरावट से मिलों के लिए आयात की रुचि कम हो गई है।आयात पर मिलने वाला मार्जिन अब काफी कम हो गया है और यह भी अनिश्चित है कि लगभग दो महीने बाद जब आयातित चीनी भारत पहुंचेगी,तब आयात लाभदायक रहेगा या नहीं।

सरकार की अनुमति से आधा होगा आयात

राहिल शेख और वैश्विक व्यापारिक घरानों के चार अन्य डीलरों ने कहा कि आयात करीब 500,000 टन से अधिक होने की संभावना नहीं है।उनका मानना है कि मुनाफा कम होने और समय से पहले घरेलू मिलों में क्रशिंग शुरू होने से इंपोर्ट कम होगा।चीनी उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक है,जमाखोरी से कीमतें बढ़ी थी,लेकिन सरकार की सख्ती से स्टॉकिस्टों के ऊपर अपना माल निकालने का दबाव है,ऐसे में बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी।दूसरी तरफ भारतीय रिफाइनरियां आयात में ज्यादा दिलचस्पी भी नहीं दिखा रही है,क्योंकि उनके पास पहले का स्टॉक पड़ा है।

रिफाइनरियों को घरेलू बाजार में चीनी बेचने की अनुमति

भारत में कुछ बंदरगाह-आधारित चीनी रिफाइनरियां कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात कर उसे रिफाइन करके सफेद चीनी बनाती हैं और उसका निर्यात करती हैं। केंद्र सरकार के हालिया फैसले के तहत ये रिफाइनरियां आयात कोटे के लिए आवेदन कर सकती हैं और पहले से आयात की गई कच्ची चीनी से तैयार की गई रिफाइंड चीनी को अक्टूबर के अंत तक घरेलू बाजार में बेच सकती हैं।इन रिफाइनरियों के पास फिलहाल लगभग 3 लाख टन चीनी का स्टॉक है, जिसे वे तेजी से घरेलू बाजार में बेच सकती हैं। हालांकि चीनी मिलों ने आयात में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई है। इसका प्रमुख कारण यह है कि अक्टूबर के मध्य से नया गन्ना पेराई सत्र शुरू होने की उम्मीद है,जिससे घरेलू चीनी की आपूर्ति बढ़ेगी और स्थानीय कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।

15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने का आग्रह

केंद्र सरकार ने चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीनी मिलों से 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने के लिए कहा है। केंद्र सरकार ने फिलहाल केवल कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके लिए चीनी मुख्य रूप से ब्राजील से आने की संभावना है। घरेलू बाजार में बिक्री से पहले इस कच्ची चीनी को रिफाइन करना जरूरी होगा।

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